एक छाेटे से गांव के बाहर एक साधु ठहरा हुआ था. युवा साधु है, बहुत सुंदर है, बड़ा प्रतिभाशाली है, बड़ा प्रभाव है. गांव के लाेग आदर करते हैं, प्रेम करते हैं, सम्मान देते हैं. एक दिन अचानक सारी हवा बदल गई. गांव में एक लड़की काे बच्चा पैदा हुआ और उस लड़की ने कहा कि वह साधु का बच्चा है. सारा गांव बदल गया.
आदर के अनादर में बदलने में बहुत देर थाेड़े ही लगती है. क्याेंकि जाे आदर देते हैं उनके पीछे अनादर की पूरी तैयारी रहती है कि माैका मिल जाए ताे अभी अनादर करें.
इसलिए जब काेई कभी किसी काे आदर दे ताे बहुत सावधान रहना, वह अनादर की तैयारी भी कर रहा है-किसी भी वक्त! क्याेंकि जिन कारणाें से वह आदर दे रहा है वे बड़े बारीक हैं. जरा ही दूसरे कारण माैजूद हाे जाएं, सब गड़बड़ हाे जाएगा. इसलिए आदर देने वाले से हमेशा सावधान रहना चाहिए वह अनादर कर सकता है.
सारा गांव बदल गया. गांव टूट पड़ा, उसके झाेपड़े में आग लगा दी. वह अपना सुबह बाहर बैठा धूप ले रहा था. ठंड के दिन थे. उसने पूछा कि मामला क्या है? ताे जाकर लाेगाें ने वह बच्चा उसके ऊपर पटक दिया और कहा कि मामला यह है! पहचानाे, यह तुम्हारा बच्चा है! उसने कहा, इज इट साे? ऐसी बात है? बच्चा मेरा है? उसने उसे गाैर से देखा, उसे कंधे से लगा लिया. वह राेता था, उसे समझाने लगा. गांव के लाेग गाली-गलाैज बकते वापस लाैट गए.
िफर वही साधु भिक्षा मांगने गया. कल तक बड़े-बड़े लाेग आकर कहते थे कि हमारे घर में पैर रख दें ताे पवित्र हाे जाए, उन्हीं लाेगाें ने दरवाजा बंद कर लिए. वह दरवाजे पर खड़ा है कि मुझे दाे राेटी मिल जाएं. वही दरवाजे जाे कहते थे कि तुम्हारे पैर पड़ जाएं ताे पवित्र हाे जाएगा हमारा घर, वही दरवाजे बंद हाे गए. उन्हाेंने कहा, आगे बढ़ जाओ! कभी भूल कर इस द्वार पर दुबारा छाया मत डालना. गांव के लाेगाें की भीड़ उसके पीछे गालियां देती हुई, पत्थर ेंकती हुई चली.
िफर वह उस दरवाजे के सामने पहुंचा, जिसकी बेटी का यह लड़का है. और उसने उस दरवाजे के सामने आवाज लगाई कि कसूर मेरा हाेगा इसका बाप हाेने में, लेकिन इसका मेरे बेटे हाेने में ताे काेई कसूर नहीं हाे सकता. बाप हाेने में मेरी गलती हाेगी, लेकिन इसकी ताे काेई गलती नहीं हाे सकती कम से कम इसे दूध मिल जाए.
वह लड़की द्वार पर खड़ी थी. उसके प्राण कंप गए.! फकीर काे भीड़ में घिरा हुआ, पत्थर खाते हुए देख कर-वह उस बच्चे काे बचा रहा है, उसके माथे से खून बह रहा है-सच्ची बात छिपाना मुश्किल हाे गई.
उसने अपने बाप के पैर पकड़ कर कहा कि क्षमा करें, इस फकीर काे ताे मैं पहचानती भी नहीं. र्सिफ इसके असली बाप काे बचाने के लिए मैंने इस फकीर का झूठा नाम ले लिया! लड़की का बाप आकर फकीर के पैराें पर गिर पड़ा और बच्चे काे छीनने लगा और कहा, क्षमा कर दें. उस फकीर ने पूछा, लेकिन बात क्या है? बेटे काे छीनते क्याें हाे? उसके बाप ने कहा-लड़की के बाप ने-कि आप कैसे नासमझ हैं! आपने सुबह ही क्याें न बताया कि यह बेटा आपका नहीं है? आप छाेड़ दें. यह बेटा आपका नहीं है, हमसे भूल हाे गई.
वह फकीर कहने लगा, बेटा मेरा नहीं है? पर तुम्हीं ताे सुबह कहते कि तुम्हारा है. और भीड़ ताे कभी झूठ बाेलती नहीं. अब तुम जब बाेलते हाे कि नहीं है मेरा, ताे नहीं हाेगा. लेकिन लाेग फकीर से कहने लगे कि तुम कैसे पागल हाे! तुमने सुबह कहा क्याें नहीं कि बेटा तुम्हारा नहीं है? तुम इतनी निंदा और अपमान झेलने काे राजी क्याें हुए? वह फकीर कहने लगा, मैंने तुम्हारे कभी चिंता नहीं की कि क्या साेचते हाे. तुम आदर देते हाे ताे कि आनादर. तुम श्रद्धा देते हाे कि निंदा. मैंने तुम्हारी आंखाें की तरफ देखना बंद कर दिया है. क्याेंकि मैं अपनी तरफ देखूं कि तुम्हारी आंखाें की तरफ देखू! और जब तक मैंने तुम्हारी तरफ देखा, तब तक अपने काे देखना मुश्किल था. क्याेंकि तुम्हारी आंख ताे प्रतिपल बदल रही है, और हर आदमी की आंख अलग है, ये हजार-हजार दर्पण हैं, मैं किस-किस में झांकू? मैंने अपने में ही झांकना शुरू कर दिया है. अब मुझे िफकर नहीं कि तुम क्या कहते हाे. अगर तुम कहते हाे बेटा मेरा, मेरा ही हाेगा. किसी का ताे हाेगा! मेरा ही सही.
अब तुम कहते हाे, नहीं. तुम्हारी मर्जी, नहीं हाेगा मेरा. लेकिन मैंने तुम्हारी आंखाें में देखना बंद कर दिया है. और वह फकीर कहने लाग, मैं तुमसे भी कहता हूं कि कब वह दिन आएगा कि तुम दूसराें की आंखाें में देखना बंद कराेगे और अपनी तरफ देखना शुरू कराेगे?