भगवंतों की वाणी संसार के समस्त दुखों का अंत करने वाली

    28-Sep-2026
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कोथरुड, 27 सितंबर (आ. प्र.)

श्री वर्धमान सांस्कृतिक प्रतिष्ठान में विराजित गुरुदेव श्री अभिषेक मुनिजी ने कहा कि, निर्ग्रन्थ भगवंतों का प्रवचन संसार के समस्त दुखों का अंत करने वाला होता है. आवश्यकता इस बात की है कि हम उनकी वाणी को केवल सुनें नहीं, बल्कि उसे अपने जीवन में उतारने का सतत प्रयास करें. निर्ग्रन्थ वह है, जो संसार की समस्त ग्रंथियों से रहित और उपरत हो चुका है| राग-द्वेष, मोह-माया और कषायों की जो ग्रंथियां जीव को संसार के बंधनों में बांधकर रखती हैं, उनसे जो मुक्त हो जाता है, वह निर्ग्रन्थ कहलाता है. ऐसे निर्ग्रन्थ भगवंतों की वाणी में आत्मकल्याण का मार्ग निहित होता है. जो व्यक्ति भगवंतों के प्रवचनों को सुनकर उनके अनुसार चलने का प्रयास करता है और उनके वचनों को अपने जीवन में ढालने का प्रयत्न करता है, उसके जन्म-जन्मांतर के दुखों का अंत होने लगता है. केवल प्रवचन सुन लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रवचन को जीवन की दिशा और आचरण का आधार बनाना आवश्यक है. संसार में प्रत्येक प्राणी कर्मों के बंधन से बंधा हुआ है. कोई भी जीव दुख नहीं चाहता. प्रत्येक व्यक्ति सुख, शांति और प्रसन्नता की कामना करता है, लेकिन केवल सुख की इच्छा कर लेने मात्र से सुख की प्राप्ति नहीं हो जाती. जिस प्रकार किसी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए पुरुषार्थ आवश्यक है, उसी प्रकार जीवन में सुख और शांति के लिए भी उसके अनुरूप आचरण करना पड़ता है. - श्री अभिषेक मुनिजी