नई दिल्ली, 28 सितंबर (वि.प्र.)
दिल्ली में 1 नवंबर से प्रदूषण काे राेकने के लिए कड़े नियम लागू हाेने जा रहे हैं. दिल्ली सरकार सर्दियाें के महीनाें में राजधानी की बिगड़ती हवा की गुणवत्ता से निपटने के लिए एक स्थायी ‘विंटर पाॅल्यूशन मास्टर प्लान’ (सर्दियाें में प्रदूषण से निपटने की याेजना) शुरू कर रही है.
इस नई व्यवस्था के तहत, हर साल 1 नवंबर से 28 फरवरी के बीच कई नियम अपने आप लागू हाे जाएंगे. इनमें नाे पीयूसी, नाे फ्यूल (पीयूसी नहीं ताे ईंधन नहीं), दिल्ली के बाहर के इड-तख मानकाें काे पूरा न करने वाले वाहनाें पर राेक, ऑफिस में 50% कर्मचारियाें के लिए वर्क-फ्राॅम-हाेम, पार्किंग शुल्क दाेगुना करना और निर्माण व ताेड़-फाेड़ की गतिविधियाें पर राेक शामिल हैं.
दिल्ली भर में पेट्राेल, डीजल, सीएनजी और ङझॠ स्टेशन केवल उन्हीं वाहनाें काे ईंधन देंगे जिनके पास वैध पाॅल्यूशन अंडर कंट्राेल (झणउ) सर्टिफिकेट हाेगा. यह नियम फिजिकल जांच, छझठ कैमराें और डिजिटल वाहन डेटाबेस के ज़रिए लागू किया जाएगा.
1 नवंबर से 31 जनवरी तक, दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड जाे वाहन इड-तख उत्सर्जन मानकाें काे पूरा नहीं करते हैं, उन्हें राजधानी में प्रवेश करने या चलने की अनुमति नहीं हाेगी. सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनाें, एम्बुलेंस, फायर टेंडर, पुलिस वाहनाें और अन्य ज़रूरी सेवाओं वाले वाहनाें काे इससे छूट दी गई है.