नई दिल्ली, 28 सितंबर (वि.प्र.)
सुप्रीम काेर्ट में याचिका दायर करने वालाें ने कहा कि ऋडडअख (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) के प्रस्तावित टाइमलाइन के तहत, ज़्यादा फैट, शुगर और नमक वाले पैक्ड फूड पर ज़रूरी वाॅर्निंग लेबल ग्राहकाें तक पहुंचने में लगभग दाे साल और लग सकते हैं.
शुक्रवार काे दायर एक जवाब में, केरल की नाॅन-प्राॅफिट संस्था म3ड एंड अवर हेल्थ’ साेसाइटी ने ऋडडअख के प्रस्तावित 365-दिन के वाॅलंटरी (स्वेच्छा से) लागू करने के समय का विराेध किया. उनका तर्क है कि फूड कंपनियां पहले से छपी हुई पैकेजिंग पर स्टिकर लगाकर बहुत जल्दी नियमाें का पालन कर सकती हैं.
23 सितंबर काे दायर अपने अनुपालन हलफनामे में, ऋडडअख ने पैक्ड फूड के लिए फ्रंट-ऑफ-पैक वाॅर्निंग सिस्टम का प्रस्ताव दिया, जिसमें सफेद चाैकाेर बैकग्राउंड पर एक लाल हेक्सागन (छह काेनाें वाली आकृति) शामिल है. अथाॅरिटी ने कहा कि प्रस्तावित नियमाें काे फाइनल करने और नाेटिफाई करने में लगभग चार महीने लगेंगे, जिसके बाद 365-दिन का वाॅलंटरी इम्प्लीमेंटेशन पीरियड हाेगा.
याचिकाकर्ताओं के वकील, राजीव शंकर द्विवेदी ने इसके बजाय मैन्युफैक्चरर्स के लिए अपनी पैकेजिंग काे फिर से डिज़ाइन करने के लिए एक महीने की समय-सीमा का प्रस्ताव दिया है. याचिकाकर्ताओं ने कहा कि माैजूदा छपी हुई पैकेजिंग का इस्तेमाल जारी रखा जा सकता है, अगर उत्पाद के ग्राहकाें तक पहुंचने से पहले तय साइज़, फाॅर्मैट और जगह पर वाॅर्निंग वाला स्टिकर लगा दिया जाए. जवाब में कहा गया, काेई भी छपी हुई सामग्री बर्बाद नहीं हाेगी.