2000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर देना होगा अतिरिक्त चार्ज

    29-Sep-2026
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नई दिल्ली, 28 सितंबर (वि.प्र.)
सुप्रीम काेर्ट ने साेमवार काे केंद्र सरकार के उस फैसले पर राेक लगाने से इनकार कर दिया, जिसके तहत 15 अक्टूबर से 2,000 से ज़्यादा के कुछ खास यूपीआई ‘पर्सनटू-मर्चेंट’ ट्रांजैक्शन पर एमडीआर लगाया जाना है. हालांकि, सुप्रीम काेर्ट ने 2,000 से ज्यादाा के यूपीआई पेमेंट पर एमडीआर लगाने काे चुनाैती देने वाली याचिका पर केंद्र और अन्य से जवाब भी मांगा है.
 
केंद्र ने सुप्रीम काेर्ट काे बताया कि गेटवे का इस्तेमाल करने वाले 96 प्रतिशत लाेग इससे छूट के दायरे में आते हैं. सुप्रीम काेर्ट ने कहा कि यह मामला कानूनी से ज्यादा तकनीकी है. भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जाॅयमाल्य बागची और जस्टिस वी माेहना की पीठ ने केंद्र सरकार, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया समेत सभी पक्षाें काे चार हफ्ते के भीतर अपना जवाब (काउंटर एफिडेविट) दाखिल करने का निर्देश दिया. सुप्रीम काेर्ट ने उस रिट याचिका पर ये नाेटिस जारी किया है जिसमें केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा 14 और 15 सितंबर काे जारी उन गजट नाेटिफिकेशन्स काे रद्द करने की मांग की गई है, जिनमें 2,000 रुपये से ज्यादा के कमर्शियल यूपीआई ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगाने की घाेषणा की गई थी.
 
सीजेआई सूर्यकांत की बेंच के सामने बहस में सरकार की ओर से एडिशनल साॅलिसीटर जनरल वेंकटरमन पेश हुए्. याचिकाकर्ता के वकील जब से यूपीआई आया है, काले धन के लेन-देन में कमी आई है. यह अभी लागू हाेना बाकी है. 15 अक्टूबर पहला माइलस्टाेन है.