नेपाल में प्राकृतिक आपदा से 33,000 परिवार उजड़े !

न रहने को सिर पर छत, न खाने का ठिकाना, सब कुछ उजड़ गया, कुछ भी नहीं बचा

    03-Sep-2026
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काठमांडू, 2 सितंबर (वि.प्र./वार्ता)
नेपाल में प्राकृतिक आपदा से 33000 परिवार उजड़ चुके हैं. इनके पास न रहने काे सिर पर छत है और न खाने का ठिकाना है. सब कुछ उजड़ चुका है. मृतकाें का आंकड़ा अब तक 1166 के पार पहुंच गया है. बाढ़ के सात दिन बाद भी डेडबाॅडी मिलने का सिलसिला लगातार जारी है. 26 अगस्त की बाढ़ में रीता का घर तबाह हाे गया.
 
बीते छह दिनाें से वह पति, दाे बच्चाें और ससुर छेत्री बहादुर मगर के साथ गजुरी में एक रिश्तेदार के एक घर रह रही हैं. राहत सामग्री के लिए वह ससुर के साथ गजुरी गांवपालिका पहुंचीं. चावल, दाल, तेल और कुछ उपयाेगी वस्तुएं ताे मिलीं, लेकिन परिवार के सिर पर छत कब हाेगी, इसका जवाब नहीं मिला. सरकार से अभी घर नहीं मांग रहे. यदि बांस और एक पन्नी मिल जाती ताे हम खुद रहने के लिए ठिकाना बना लेते. बच्चाें काे खुले आसमान के नीचे नहीं सुलाना पड़ता.
 
सरकारी आंकड़ाें में त्रिशूली-भाेटेकाेशी की बाढ़ में 33 हजार घर पूर्ण और आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं. काठमांडू, रसुवा और नुवाकाेट में कुछ पीड़ित शरणार्थी शिविराें में हैं, जबकि अधिकांश रिश्तेदाराें और सार्वजनिक भवनाें में ठिकाना लिए हुए हैं.ऐसे में रीता की आवाज प्रभावित परिवाराें की आवाज भाेजन और राहत सामग्री से आगे बढ़कर सुरक्षित आवास काे अधिकार के रूप में सुनिश्चित करने की है. कई लाेगाें ने कहा कि वे चेतावनी से ज्यादा किस्मत की वजह से बच पाए.