गर्भावस्था अपने साथ कई चुनाैतियां लेकर आती है, जिसमें प्रसवपूर्व और प्रसवाेत्तर (प्रसवबाद) अवसाद शामिल है.
महिलाओं काे अ्नसर बच्चे के जन्म से पहले और बाद में लगातार उदासी, नींद न आना और अपराध बाेध, निराशा या बेकार हाेनी की भावना का अनुभव हाेता है, आज सबसे अधिक अवसाद ग्रस्त लाेगाें में कामकाजी माताएं हैं, जिन्हें अपने बच्चाें के लिए अपने जीवन के सबसे अधिक उत्पादक वर्ष बलिदान करने पड़ते हैं. अ्नसर अपनी नाैकरी और करियर काे दांव पर लगाना पड़ता है. काम पर कभी वापस न लाैट पाने का डर और बढ़ता वित्तीय दबाव कई नयी मांओं पर भारी पड़ता है.
विश्व स्वास्थ्य संगठ्न के अनुसार लगभग 10 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं और 13 प्रतिशत प्रसवाेत्तर महिलाएं मानसिक विकार से ग्रस्त हैं. मुख्य रूप से अवसाद से विकासशील देशाें में स्थिति और भी चिंताजनक है, जहां गर्भावस्था के दाैरान 15.6 प्रतिशत और प्रसव के बाद 19.8 प्रतिशत महिलाएं अवसादग्रस्त हाे जाती हैं.