मनपा क्षेत्रीय कार्यालय की सीमा में होंगे दो बाल सार्वजनिक स्थल

अनुपयोगी जगहों का पुनर्विकास कर बच्चों और अभिभावकों के लिए सुविधाएं जुटाने पर जोर

    03-Sep-2026
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पुणे, 2 सितंबर (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)

छोटे बच्चों के विकास को ध्यान में रखते हुए पुणे मनपा ने शहर के प्रत्येक क्षेत्रीय कार्यालय की सीमा में दो बाल अनुकूल सार्वजनिक स्थल विकसित करने की योजना बनाई है. कम उपयोग में आने वाली अथवा अनुपयोगी जगहों का पुनर्विकास कर उन्हें बच्चों के साथ अभिभावकों और देखभालकर्ताओं के लिए अधिक सुरक्षित और सुलभ बनाया जाएगा. वर्ष 2026 तक इन स्थलों को विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है. अतिरिक्त मनपा आयुक्त पवनीत कौर ने रविवार को यशदा में आयोजित प्रारंभिक बाल विकास कार्यशाला में यह जानकारी दी. ‌‘अर्बन-95‌’ पहल के तहत पुणे को ‌‘लाइटहाउस सिटी‌’ के रूप में मिले अनुभवों का इस अवसर पर प्रस्तुतिकरण किया गया. प्रस्तावित बाल अनुकूल स्थलों पर शिशु सदन, देखभालकर्ताओं के लिए परस्पर संवाद एवं सहायता समूह तथा बच्चों के खेल और सीखने के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी. बच्चों को केंद्र में रखकर नियोजन प्रक्रिया में बदलाव, कर्मचारियों को प्रशिक्षण तथा विभिन्न संस्थाओं के साथ साझेदारी करने पर भी ध्यान दिया जाएगा. वर्ष 2018 से मनपा ने बाल अनुकूल सार्वजनिक स्थलों के विकास पर 5.50 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं. उद्यान, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, प्रसूतिगृह, आंगनवाड़ी और सड़कों का उपयोग बाल विकास के लिए किया जा रहा है. येरवड़ा स्थित लुंबिनी उद्यान का समय रात 7 से 9 बजे तक बढ़ाने के साथ प्रकाश व्यवस्था और सीसीटीवी लगाने के बाद यहां आने वाले लोगों की संख्या में 30 प्रतिशत वृद्धि हुई. कमला नेहरू अस्पताल में टीकाकरण के लिए प्रतीक्षा करने वाले बच्चों के लिए ‌‘प्रारंभिक उत्तेजना केंद्र‌’ शुरू किया गया है. इसी प्रकार की सुविधा पार्वती पेठ स्थित राजमाता जिजाऊ नर्सिंग होम में भी शुरू की गई है. ‌‘पुणे किड्स फेस्टिवल‌’ में ढाई लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया. इनमें एक लाख से अधिक बच्चे तथा 1.38 लाख देखभालकर्ता शामिल थे. प्रस्तुतिकरण के अनुसार बाल केंद्रित स्थलों पर बच्चों और देखभालकर्ताओं के समय में 60 प्रतिशत, जबकि उद्यान, खुले स्थान, आंगनवाड़ी, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और प्रसूतिगृहों में आने वालों की संख्या में 45 प्रतिशत वृद्धि हुई. इन सुविधाओं तक पैदल पहुंचने वाले देखभालकर्ताओं की संख्या में भी 68 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की. मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्रीकर परदेशी ने कहा कि बच्चे के जन्म से दो वर्ष की आयु तक के पहले 1,000 दिन अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं. इस अवधि में किए गए प्रयासों का बच्चे के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य की कार्यक्षमता पर सीधा प्रभाव पड़ता है. बाल विकास के लिए स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, आदिवासी विकास, नगर विकास तथा जल एवं स्वच्छता विभागों के बीच समन्वय आवश्यक है.