नई दिल्ली, 3 सितंबर (वि.प्र.)
जाे ब्राेशर में दिखाओ वैसा ही फ्लैट बनाकर दाे. यह सख्त टिप्पणी सुप्रीम काेर्ट ने किया. देशभर के बिल्डराें काे चेतावनी देते हुए अदालत ने आदेश देते हुए कहा- ग्राहकाें के साथ अन्याय किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं है. किए गए वादाें पर अमल करना ही हाेगा. उन्हाेंने कहा केवल मार्केटिंग कर ग्राहकाें काे लुभाने का रवैया ठीक नहीं है. पेश किए प्लान काे हू-ब-हू बनाकर देना आवश्यक हाेगा और उसी के अनुरूप ही प्राेजेक्ट का निर्माण और डिलीवरी सुनिश्चित करनी हाेगी.
अदालत ने यह तल्ख टिप्पणी गुरुग्राम स्थित ‘डीएलएफ हाेम डेवलपर्स’ के ‘द प्राइमस’ आवासीय प्राेजेक्ट में जारी गंभीर अनियमितताओं पर सुनवाई के दाैरान की. मूल प्राेजेक्ट प्लान में 24 मीटर चाैड़ी जिस सड़क का भराेसा दिया गया था, वह जमीनी स्तर पर बड़े हिस्से से पूरी तरह गायब पाई गई. सुप्रीम काेर्ट ने बिल्डराें द्वारा नक्शाें और सुविधाओं में किए जाने वाले इस तरह के मनमाने बदलावाें पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे खरीदाराें के भराेसे के साथ खिलवाड़ करार दिया. जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर.
महादेवन की बेंच ने कहा कि यह बदलाव ‘मामूली नहीं, बल्कि काफी बड़ा’ था और चेतावनी दी कि अगर अगली सुनवाई तक प्राेजेक्ट काे ब्राेशर के मुताबिक नहीं किया गया, ताे वह उचित आदेश जारी करने की दिशा में आगे बढ़ेगा.
एक रिपाेर्ट के मुताबिक, सुप्रीम काेर्ट ने सड़क के लिए जरूरी जमीन के मामले काे संभालने और रेजिडेंट्स वेलफेयर एसाेसिएशन के चुनाव में आ रही रुकावटाें काे दूर करने के लिए असरदार कदम न उठाने पर हरियाणा सरकार और उसके अधिकारियाें पर नाराज़गी भी जाहिर की. इस हफ्ते की शुरुआत में जारी किया गया नया आदेश, सेंट्रल ब्यूराे ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) की स्टेटस रिपाेर्ट के बाद आया है. सुप्रीम काेर्ट ने सीबीआई काे 24-मीटर चाैड़ी सड़क और नियमाें के पालन व कथित गड़बड़ियाें से जुड़ी अन्य शिकायताें की शुरुआती जांच करने का निर्देश दिया था. बेंच ने कहा कि नक्शाें, तस्वीराें और अन्य सामग्री पर आधारित सीबीआई की रिपाेर्ट से काेई शक नहीं रह जाता है कि सड़क वैसी नहीं बनी है जैसा कि ओरिजिनल प्लान और ब्राेशर में दिखाया गया था.