रावेत, 4 सितंबर (आ.प्र.)
एआई जैसी उन्नत तकनीक के पास सीमित विचार होते हैं, लेकिन यदि हम अपनी बुद्धि और कौशल पर विश्वास रखकर काम करें, तो वह ‘आउट ऑफ द बॉक्स’ यानी इनोवेटिव साबित हो सकता है. हमारे दिमाग में जो विचार आ सकते हैं, वे एआई के लिए संभव नहीं हैं. खुद पर विश्वास रखें, कल के इंजीनियर ही वास्तव में राष्ट्र निर्माण के असली शिल्पकार हैं. यह बात कोल्हापुर की डी.वाई. पाटिल एजुकेशन सोसायटी के अनुसंधान निदेशक डॉ. प्रमोद पाटिल ने कही. वे पिंपरी चिंचवड़ एजुकेशन ट्रस्ट (पीसीईटी) के रावेत स्थित पिंपरी चिंचवड़ कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड रिसर्च (पीसीओईआर) द्वारा आईईईई महाराष्ट्र सेक्शन के सहयोग से आयोजित एशियन कॉन्फ्रेंस ऑन इनोवेशन इन इमर्जिंग टेक्नोलॉजी ( एएसआईएसीओएनएफ)- 2026 के 6वें एशियाई सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे. इस अवसर पर मुंबई की एटलस स्किलटेक यूनिवर्सिटी के डॉ. शशिकांत पाटिल, सिम्बायोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के निदेशक डॉ. केतन कोटेचा, पीसीसीओईआर के निदेशक व प्राचार्य डॉ. हरीश तिवारी, उद्यमी जयेश जगताप, महाराष्ट्र सेक्शन के वाइस चेयरमैन डॉ. सौरभ सोनी, डॉ. प्रमोद भिड़े, इंडिया काउंसिल के वाइस चेयरमैन डॉ. चाणक्य झा, समन्वयक डॉ. राहुल मापारी, पीसीसीओईआर के ई एंड टीसी विभागाध्यक्ष डॉ. किरण नाप्ते, डॉ. विजय लक्ष्मी कुंभार आदि उपस्थित थे. इस दौरान सम्मेलन के सॉवेनिर का विमोचन भी किया गया. डॉ. प्रमोद पाटिल ने कहा, आज एआई का उपयोग केवल 5% हो रहा है और 95% क्षेत्र अभी भी प्रतीक्षा में हैं. इसके लिए सही दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए. केवल ऊर्जा का उत्पादन करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि वह कैसे निर्मित होती है, यह महत्वपूर्ण है. एआई मौसम का अनुमान और सस्टेनेबिलिटी का गणित पेश कर रहा है. उन्होंने कहा, जहरीली गैसों जैसे हानिकारक आविष्कार नहीं होने चाहिए. खतरे की पूर्व सूचना देने वाले उपकरण महत्वपूर्ण हैं. इसके लिए केवल एआई पर निर्भर रहना काफी नहीं है. हमारे फोन में 80 प्रकार के खनिज होते हैं. ई-कचरा, री-साइकिलिंग और अप-साइकिलिंग के लिए प्रयास आवश्यक हैं. एआई द्वारा तैयार किए गए 70% प्रोजेक्ट खारिज हो जाते हैं, इसलिए पहले खुद काम करना महत्वपूर्ण है.