श्रीहरिकाेटा, 4 सितंबर (वि.प्र./वार्ता)
36 हजार किमी से तस्वीरें लेने वाला पहला भारतीय सेटेलाइट गुरुवार देर रात लांच हाे गया. अंतरिक्ष के क्षेत्र में इसराे ने एक नया इतिहास रचकर एक बार फिर दुनिया काे अपनी ताकत दिखायी है. यह उपग्रह पाकिस्तान चीन की बाॅर्डर पर स्थित गतिविधियाें की सारी जानकारी भी देगा. यहां तक कि बारीक से बारीक घटनाओं पर नजर रखेगा. इसके अलावा यह सेटेलाइट प्राकृतिक आपदा की भी समय रहते जानकारी मिल देगा.
सफलतापूर्वक कक्ष में स्थापित हाेने के बाद पीएम माेदी ने इस सफलता काे गर्व का क्षण बताया. उनके अलावा विपक्ष के मल्लिकार्जुन खड़गे सहित देश के नेताओं ने भी इसराें का अभिनंदन किया. विस्तार से प्राप्त खबराें के अनुसार इसे श्रीहरिकाेटा से ॠडङत-ऋ17 राॅकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेजा गया. एजड-05 करीब 36 हजार किलाेमीटर की ऊंचाई पर जियाेसिंक्राेनस ऑर्बिट में रहकर तस्वीरें लेगा. ऐसा करने वाला भारत का यह पहला सैटेलाइट है.
इससे पहले भारत के सभी इमेजिंग सैटेलाइट निचली कक्षा में थे.एजड-05 भारत और आसपास के बड़े इलाकाें की लगातार तस्वीरें भेज सकेगा. इससे पाकिस्तान-चीन सीमा समेत संवेदनशील और रणनीतिक इलाकाें पर नजर रखने में मदद मिलेगी. सैटेलाइट का इस्तेमाल बाढ़, चक्रवात और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी के लिए भी किया जाएगा. इससे आपदा की स्थिति का जल्दी पता लगाने और समय पर चेतावनी देने में मदद मिलेगी. इसराे प्रमुख वी. नारायणन ने बताया कि संगठन का इस साल छह और मिशन लाॅन्च करने का लक्ष्य है. करीब आठ महीने बाद इसराे का यह पहला लाॅन्च है. इससे पहले जनवरी 2026 और मार्च 2025 में उसके दाे मिशन सफल नहीं हाे पाए थे. ॠडङतऋ17 भारत के जियाेसिंक्राेनस सैटेलाइट लाॅन्च व्हीकल कार्यक्रम की 19वीं उड़ान थी. एजड-05 काे श्रीहरिकाेटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के सेकेंड पैड से लाॅन्च किया. एजड-05 लाॅन्च के करीब 18 मिनट बाद सब-जियाेसिंक्राेनस ट्रांसफर ऑर्बिट में पहुंचा दिया गया.
इसके बाद सैटेलाइट काे 36000ज्ञा पर माैजूद अपनी अंतिम कक्षा तक पहुंचना है. जियाेसिंक्राेनस ऑर्बिट पृथ्वी से करीब 35,786 किमी ऊपर की कक्षा है. इसमें सैटेलाइट पृथ्वी का एक चक्कर करीब 24 घंटे में पूरा करता है.