इस्काॅन में जन्माष्टमी पर गोपाल कृष्ण जयघोष की धूम

लगभग तीन लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए राधा-कृष्ण के दर्शन ः धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन

    05-Sep-2026
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कोंढवा, 4 सितंबर (आ.प्र.)

श्री गोपाल कृष्ण भगवान की जय.. हरे राम हरे कृष्णा.. राधे कृष्ण गोपाल कृष्ण.. के जयघोष के साथ कात्रज-कोंढवा रोड और कैम्प स्थित इस्कॉन मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव बड़े ही उत्साह और हर्षो ल्लास के साथ मनाया गया. इस अवसर पर राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल, विधायक भीमराव तापकीर, योगेश टिलेकर, अभिनेता राहुल सोलापुरकर सहित अनेक नगरसेवकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भगवान के दर्शन किए. आयोजकों ने बताया कि लगभग तीन लाख श्रद्धालुओं ने राधा-कृष्ण के दर्शन किए, वहीं 10 हजार श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक किया. मंदिर में आने वाले सभी भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया. संस्थापक आचार्य श्री प्रभुपाद द्वारा स्थापित अंतरराष्ट्रीय श्रीकृष्ण भावनामृत संघ (इस्कॉन) के मंदिर में रत्नजड़ित वस्त्रों और आभूषणों से सजी राधा-कृष्ण की मनमोहक छवि के दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी. भक्तों ने फूलों से सजाए गए झूले में बालकृष्ण को झुलाकर धूमधाम से जन्माष्टमी का त्योहार मनाया. इस अवसर पर मंदिर के अध्यक्ष राधेश्याम प्रभु, रेवतीपति प्रभु और जयदेव प्रभु सहित वरिष्ठ भक्तों के साथसाथ विभिन्न क्षेत्रों के कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे. हरे-कृष्ण महामंत्र के जयघोष के बीच मंदिर के भक्तों द्वारा भगवान का महाअभिषेक किया गया. प्रवक्ता जनार्दन चितोडे ने बताया कि इसके बाद भगवान को 251 थालियों में 56 प्रकार का भोग (नैवेद्य) लगाया गया और ठीक रात 12 बजे आरती की गई. उपाध्यक्ष संजय भोसले ने जन्माष्टमी महोत्सव के बारे में जानकारी दी. विशेष अतिथि कक्ष की ओर से संपर्क प्रमुख अनंतगोप प्रभु और प्रसाद कारखानीस ने मेहमानों का स्वागत किया. सांस्कृतिक महोत्सव का समापन मंदिर में आयोजित ‌‘कृष्णसमर्पण‌’ सांस्कृतिक महोत्सव संपन्न हुआ. महोत्सव में 700 कलाकारों ने शास्त्रीय नृत्य, गायन, नाट्य और वादन प्रस्तुत कर अपनी कला भगवान को समर्पित की. मंदिर के तीनों गर्भगृहों में श्रीश्री राधा-वृंदावन चंद्र, जगन्नाथ-बलदेव-सुभद्रा और गौर-निताई के मूर्तियों को राजस्थानी शैली के आकर्षक वस्त्रों तथा आभूषणों से सजाया गया.  
 
स्वयंसेवकों ने दीं सेवाएं

उत्सव के लिए लगभग पांच लाख भक्तों को प्रसाद बांटने की व्यवस्था की गई थी. प्रसाद तैयार करने और बांटने के लिए करीब 300 स्वयंसेवक भक्त लगे हुए थे, जबकि भीड़ का प्रबंधन और अन्य विभिन्न सेवाओं के लिए लगभग 1,000 स्वयंसेवकों ने अपनी सेवाएं दीं.