अत्याधुनिक तकनीक से समुद्री सुरक्षा में क्रांति आएगी

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन व राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान के सेवानिवृत्त वैज्ञानिकों द्वारा पहल

    07-Sep-2026
Total Views |

sea 
पुणे, 6 सितंबर
(आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)
भारत के पास 11,000 किलाेमीटर से अधिक लंबी विस्तृत तटरेखा है, साथ ही अनेक झीलें, जलाशय, बांध और नदियां हैं, जाे इसकी विशाल आबादी के लिए जीवन रेखा का काम करती हैं. प्राकृतिक जल संसाधनाें के नियमित रखरखाव और निगरानी की महत्वपूर्ण आवश्यकता काे पहचानते हुए, विशेषज्ञाें की एक टीम ने एक अभिनव स्टार्टअप के माध्यम से अत्याधुनिक तकनीक सफलतापूर्वक विकसित की है.
 
इस टीम में डीआरडीओ के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक आलाेक मुखर्जी, एनआईओ के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक संजीव अफजलपुरकर और उनके सहयाेगी जहाज निर्माण विशेषज्ञ सनी सेबेस्टियन, अनमैन्ड इलेक्ट्राॅनिक्स सिस्टम के विशेषज्ञ राजा महबूबानी और औद्याेगिक डिजाइन विशेषज्ञ प्रकाश खानजाेड़े, स्मिता केदारी शामिल हैं. शनिवार (5 सप्टेंबर) काे पत्रकार भवन नें दाेपहर 12ः30 बजे आयाेजित पत्रकार वार्ता में उन्हाेंने यह जानकारी दी.
 
इनका मुख्य उद्देश्य जल संसाधन प्रबंधन, तटीय ऊर्जा, जल संरक्षण, तटरेखाओं और अंतर्देशीय जलमार्गाें की सुरक्षा तथा जल परिवहन क्षेत्र की चुनाैतियाें का समाधान करना है. यह टीम अत्याधुनिक अनमैन्ड सरफेस और अंडरवाटर व्हीकल्स और सेंसर विकसित कर रही है. इनके पाेर्टफाेलियाे में मानव रहित और स्वायत्त प्रणालियां (नावें), अंडरवाॅटर राेबाेट/ड्राेन और स्टेटिक माॅनिटरिंग बाॅय स्थिर निगरानी प्लव शामिल हैं.
 
पत्रकार वार्ता में हरित प्राैद्याेगिकी, जल परिवहन और वैज्ञानिक डेटा संग्रह पर जाेर देते हुए आलाेक मुखर्जी ने कहा कि इस स्टार्टअप का हर उत्पाद 100 प्रतिशत स्वदेशी है.
 
उन्हाेंने बताया कि वर्तमान में बांधाें की सुरक्षा और जल जलाशयाें के रखरखाव के लिए मानव रहित वाहन, जहाजाें के निचले हिस्से के निरीक्षण की प्रणालियां और स्मार्ट बाॅय विकसित करने पर काम चल रहा है. इस परियाेजना के लिए भीमा नदी के पास एक अत्याधुनिक अनुसंधान केंद्र स्थापित किया गया है. आलाेक मुखर्जी और उनके सहयाेगियाें ने विश्वास जताया कि वे अपनी उन्नत तकनीक के माध्यम से भारत के समुद्री क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति लाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.