कल्पतरू सोसायटी में 30 शिक्षक-शिक्षिकाओं का सम्मान

शिक्षकों के सम्मान में वरिष्ठ नागरिकों ने पुस्तकें भेंट कर पेश की मिसाल

    07-Sep-2026
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पिंपले गुरव, 6 सितंबर
(आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)
राॅयल गाेल्डन ग्रुप कल्पतरू साेसायटी की ओर से शिक्षक दिवस के अवसर पर इस आवासीय साेसायटी के 30 शिक्षक-शिक्षिकाओं का पुस्तक भेंट देकर उचित सम्मान किया गया. इस कार्यक्रम में प्रमुख अतिथि के रूप में पूर्व नगरसेवक एवं शिक्षा मंडल के पूर्व सभापति अभिमन्यु दहितुले तथा स्वागताध्यक्ष के रूप में प्राे. डाॅ. अशाेककुमार पगारिया उपस्थित थे.
 
इस अवसर पर मंच पर राॅयल गाेल्डन ग्रुप के प्रमुख विश्वासराव दहिवलेकर और शाहू गायकवाड तथा अन्य सदस्य उपस्थित थे.
इस अवसर पर बाेलते हुए अभिमन्यु दहितुले ने कहा कि समाज में शिक्षकाें के प्रति प्राचीन काल से ही निश्चित रूप से सम्मान रहा है. शिक्षक संस्कारी पीढ़ी का निर्माण करते हैं और विद्यार्थियाें में अच्छे संस्कार विकसित करते हैं. इसी कारण शिक्षकाें के बच्चे सामान्यतः गलत रास्ते पर नहीं जाते और शिक्षक अपने विद्यार्थियाें काे भी निश्चित रूप से संस्कारी बनाने के लिए हमेशा प्रयासरत रहते हैं.
 
शिक्षकाें के प्रति अपना सम्मान व्यक्त करने के लिए हर वर्ष शिक्षक दिवस मनाया जाता है और शिक्षकाें का सम्मान किया जाता है, यह बहुत अच्छी बात है. कल्पतरू के राॅयल गाेल्डन ग्रुप वरिष्ठ नागरिक संघ ने इस कार्यक्रम का आयाेजन कर एक आदर्श स्थापित किया है.
 
इस अवसर पर स्वागताध्यक्ष डाॅ. अशाेककुमार पगारिया ने कहा कि शिक्षक दिवस भारत के द्वितीय राष्ट्रपति डाॅ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस यानी 5 सितंबर काे वर्ष 1962 से उनकी इच्छा के अनुसार मनाया जा रहा है. शिक्षक हमेशा सकारात्मक विचार रखते हुए विद्यार्थियाें में अच्छे संस्कार विकसित करते हैं. गाेल्डन ग्रुप के इस वरिष्ठ नागरिक संघ के सेवानिवृत्त सदस्याें ने सेवा भावना से प्रेरित हाेकर इस प्रकार के कार्यक्रम का आयाेजन किया, इसके लिए उन सभी काे धन्यवाद देना चाहिए. जिन शिक्षक और शिक्षिकाओं का सम्मान किया गया, उनकी ओर से श्रीमती तगारे मैडम ने अपनी कृतज्ञता की भावनाएं व्यक्त कीं.
 
कार्यक्रम के सफल आयाेजन के लिए डाॅ. रवींद्र नलावड़े, गिरीश इंगले, विनाेद खापरे, प्रमाेद महाजन, केशव तगारे, भिकाजी हांडे, शेषराव जाेगदंड, माेहन जगताप, गाेटीराम इंगुलकर आदि ने पहल की. विश्वासराव दहिवलेकर ने प्रस्तावना और संचालन किया, जबकि शाहू गायकवाड़ ने आभार व्यक्त किया.