पुणे, 6 सितंबर (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) भारत के पास 11,000 किलोमीटर से अधिक लंबी विस्तृत तटरेखा है, साथ ही अनेक झीलें, जलाशय, बांध और नदियां हैं, जो इसकी विशाल आबादी के लिए जीवन रेखा का काम करती हैं. प्राकृतिक जल संसाधनों के नियमित रखरखाव और निगरानी की महत्वपूर्ण आवश्यकता को पहचानते हुए, विशेषज्ञों की एक टीम ने एक अभिनव स्टार्टअप के माध्यम से अत्याधुनिक तकनीक सफलतापूर्वक विकसित की है. इस टीम में डीआरडीओ के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक आलोक मुखर्जी, एनआईओ के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक संजीव अफजलपुरकर और उनके सहयोगी जहाज निर्माण विशेषज्ञ सनी सेबेस्टियन, अनमैन्ड इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम के विशेषज्ञ राजा महबूबानी और औद्योगिक डिजाइन विशेषज्ञ प्रकाश खानजोड़े, स्मिता केदारी शामिल हैं. शनिवार (5 सप्टेंबर) को पत्रकार भवन नें दोपहर 1230ः बजे आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने यह जानकारी दी. इनका मुख्य उद्देश्य जल संसाधन प्रबंधन, तटीय ऊर्जा, जल संरक्षण, तटरेखाओं और अंतर्देशीय जलमार्गों की सुरक्षा तथा जल परिवहन क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान करना है. यह टीम अत्याधुनिक अनमैन्ड सरफेस और अंडरवाटर व्हीकल्स और सेंसर विकसित कर रही है. इनके पोर्टफोलियो में मानव रहित और स्वायत्त प्रणालियां (नावें), अंडरवॉटर रोबोट/ड्रोन और स्टेटिक मॉनिटरिंग बॉय स्थिर निगरानी प्लव शामिल हैं. पत्रकार वार्ता में हरित प्रौद्योगिकी, जल परिवहन और वैज्ञानिक डेटा संग्रह पर जोर देते हुए आलोक मुखर्जी ने कहा कि इस स्टार्टअप का हर उत्पाद 100 प्रतिशत स्वदेशी है. उन्होंने बताया कि वर्तमान में बांधों की सुरक्षा और जल जलाशयों के रखरखाव के लिए मानव रहित वाहन, जहाजों के निचले हिस्से के निरीक्षण की प्रणालियां और स्मार्ट बॉय विकसित करने पर काम चल रहा है. इस परियोजना के लिए भीमा नदी के पास एक अत्याधुनिक अनुसंधान केंद्र स्थापित किया गया है. आलोक मुखर्जी और उनके सहयोगियों ने वेिशास जताया कि वे अपनी उन्नत तकनीक के माध्यम से भारत के समुद्री क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति लाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.