पुणे, 7 सितंबर (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) बी.जे. गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (बीजेएमसी) के 11 प्रोफेसरों को बारामती स्थित पुण्यलोक अहिल्यादेवी होलकर शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय में अस्थायी रूप से प्रतिनियुक्त किया गया है. इस फैसले से ससून अस्पताल में चिकित्सा शिक्षा और मरीजों की सेवा प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है. बारामती में स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रमों के लिए आवश्यक प्रोफेसरों की कमी है. इन रिक्तियों को भरने के लिए चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान एवं आयुष विभाग ने इन प्रोफेसरों की प्रतिनियुक्ति के आदेश जारी किए हैं. ये प्रोफेसर वहां तीन महीने तक या नियमित प्रोफेसरों की नियुक्ति होने तक सेवा देंगे. वरिष्ठ प्रोफेसरों की प्रतिनियुक्ति : इस प्रतिनियुक्ति में कई महत्वपूर्ण विभागों के वरिष्ठ प्रोफेसर शामिल हैं. इनमें जनरल मेडिसिन विभाग के डॉ. हरिदास प्रसाद और डॉ. सोनाली सावली, प्रसूति एवं स्त्रीरोग विभाग की डॉ. संगीता गवली, एनाटॉमी (शरीर रचना विज्ञान) विभाग के डॉ. योगेश गणोरेकर और डॉ. सोनाली कानवड़े, बायोकेमिस्ट्री विभाग के डॉ. सोमनाथ सालगर, फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के डॉ. हरीश ततिरा, मनोचिकित्सा विभाग की डॉ. निकिता धोरात, रेडियोलॉजी विभाग के डॉ. प्रवीण लामघाडे तथा त्वचा एवं यौन रोग विभाग के डॉ. शेखर प्रधान और डॉ. वसुधा बेलगांवकर शामिल हैं. ससून अस्पताल की सेवाओं पर पड़ेगा असर? : इनमें से कई प्रोफेसर केवल स्नातक और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को पढ़ाने का काम नहीं करते, बल्कि ससून अस्पताल में क्लिनिकल प्रशिक्षण और मरीजों की सेवा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी), आंतरिक रोगी विभाग (आईपीडी), गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) और शल्य चिकित्सा प्रक्रियाओं के दौरान प्रत्यक्ष अनुभव के लिए विद्यार्थी इन वरिष्ठ प्रोफेसरों पर निर्भर रहते हैं. ऐसे में इन प्रोफेसरों की प्रतिनियुक्ति से ससून अस्पताल की चिकित्सा सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका है. ससून अस्पताल में पुणे शहर, जिले और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए आते हैं. ऐसे में बचे हुए प्रोफेसरों और चिकित्सा कर्मचारियों पर पड़ने वाले अतिरिक्त कार्यभार को लेकर भी चिंता जताई जा रही है. निजी स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च वहन नहीं कर पाने वाले मरीजों के लिए ससून अस्पताल इलाज का एक प्रमुख केंद्र है.
मेडिकल कॉलेज के कई विभागों में पद पहले से ही रिक्त बी.जे. मेडिकल कॉलेज के कई विभागों में प्रोफेसरों के पद पहले से ही रिक्त हैं. कार्यरत प्रोफेसरों को अस्थायी रूप से अन्य स्थान पर भेजे जाने से संबंधित विभागों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है और भविष्य में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में सीटों की संख्या पर भी असर पड़ने की आशंका है. प्रशासन का कहना है कि बारामती में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम प्रोफेसरों की कमी के कारण बाधित न हों, इसलिए यह प्रतिनियुक्ति आवश्यक है. हालांकि, इस फैसले से कुछ प्रोफेसरों में नाराजगी पैदा होने की खबर है. बी.जे. मेडिकल कॉलेज एवं ससून के अभ्यर्थियों की शिक्षा और मरीजों के इलाज, दोनों पर पड़ सकता है. बढ़ती मरीजों की संख्या से निपटने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों और प्रोफेसरों की आवश्यकता सहित कॉलेज और अस्पताल की स्थिति के बारे में वरिष्ठ अधिकारियों को पहले ही जानकारी दी जा चुकी है. डॉ. पवार ने कहा कि विद्यार्थियों की शिक्षा व मरीजों का इलाज हमेशा प्राथमिकता रही है. हमें उम्मीद है कि वरिष्ठ अधिकारी इन सभी पहलुओं पर सकारात्मक रूप से विचार करेंगे.