पुणे, 7 सितंबर (आ.प्र.) पेशवाकालीन सरदार मुजुमदार गणेशोत्सव भाद्रपद शुद्ध प्रतिपदा से ऋषि पंचमी (12 से 15 सितंबर) तक पारंपरिक तरीके से मनाया जाएगा. ब्रह्मवृंदों की मौजूदगी में वल्लभेष गणपति को मयूरासन पर स्थापित किया जाएगा. गणेशोत्सव के दौरान हर शाम कीर्तनकारों द्वारा श्री गणेश के सामने कीर्तन सेवा अर्पित की जाएगी. 1714 में शुरू हुए सरदार मुजुमदार गणेशोत्सव का यह 312वां साल है. भाद्रपद शुद्ध प्रतिपदा शनिवार, 12 सितंबर की सुबह ब्रह्मवृंदों की मौजूदगी में वल्लभेष गणपति की मूर्ति की विधिवत पूजा की जाएगी. श्री की मूर्ति पंचधातु से निर्मित है और उनकी दस भुजाएं हैं. साथ ही, श्री के गोद में वल्लभा बैठी हैं. ब्रह्मणस्पति सूक्त, लघुरुद्र, अथर्वशीर्ष का पाठ किया जाएगा. उत्सव के दौरान, हर शाम 5 से 7 बजे के बीच श्री के सामने कीर्तन सेवा होगी. शनिवार को श्रेयस बुवा बड़वे का कीर्तन होगा. भाद्रपद शुद्ध द्वितीया, रविवार, 13 सितंबर को शाम को श्रेयस बुवा बड़वे का कीर्तन होगा. इस साल भाद्रपद शुद्ध तृतीया और चतुर्थी एक ही दिन हैं. इसलिए, सोमवार, 14 सितंबर को शाम को सुहास बुवा देशपांडे का कीर्तन होगा. मंगलवार, 15 सितंबर को ऋषि पंचमी के दिन शाम को तीर्थ प्रसाद के कीर्तन के साथ उत्सव का समापन होगा. वासुदेव बुवा बुरसे शाम 5 से 7 बजे तक कीर्तन करेंगे. साथ ही, गणेशोत्सव का समापन रात 8 से 10 बजे तक सुहासबुवा देशपांडे के कीर्तन के साथ होगा. गणेशोत्सव दौरान डॉ. प्रमोद गायकवाड़ हर सुबह 9 बजे शहनाई वादन करेंगे. तबले पर योगेश देशपांडे और हार्मो नियम पर साहिल पुंडलिक संगत देंगे. अनुपमा मुजुमदार ने बताया कि वल्लभेष गणपति के सामने तीन सौ से भी ज्यादा वर्षों से कीर्तन सेवा अर्पित की जा रही है.