पिंपरी-चिंचवड मनपा आयुक्त के कामकाज पर आलोचनाओं की बारिश

AajKaAanad    22-May-2020
Total Views |

हर्डीकर_1  H x  
 
राष्ट्रवादी और शिवसेना के सदस्यों ने लगाए गंभीर आरोप : कहा- श्रवण हडिकर कोरोना से मुकाबला करने में असफल
 
प्रशासन पर निगरानी के अभाव, मेडिकल नॉलेज की कमी, अधिकारियों में कलह के कारण पिंपरी-चिंचवड मनपा आयुक्त श्रवण हडिकर को कोरोना से मुकाबला करने में नाको चने चबाने पड रहे हैं.. शहर में कोरोना के मामले तेजी से बढ रहे हैं.. अब तक २४२ लोगों को कोरोना हो चुका है. झोपड्पट्टी क्षेत्र में कोरोना के तेजी से फैलने से प्रशासन की नींद उड गई है. लेकिन मनपा आयुक्त ने केवल सत्ताधारी भाजपा पदाधिकारियों के हितों की रक्षा करने में जुटे रहने, बडे काङ्र्मों के के टेंडर को पीछे लेने और सीधी पद्धति से खरीदी पर चुप्पी साध ली है. यह आरोप राष्ट्रवादी कांग्रेस और शिवसेना के सदस्यों ने लगाया है.
 
मनपा आयुक्त श्रवण हडिकर के तीन वर्ष का काङ्र्मकाल पूरा होने पर उनके ट्रांसफर की जोरदार चर्चाएं शुरू हो गईं है. ऐसी खबर है कि कोरोना संकट से निपटने में उनके हाथ आई असफलता के कारण राज्य सरकार उनसे नाराज है. पिंपरी-चिंचवड शहर में कोरोना का प्रकोप जारी है. इस स्थिति से निपटना मनपा आयुक्त श्रवण हडिकर के लिए चुनौती भरा रहा, लेकिन इसमें वह असफल रहे. प्रशासन पर निगरानी के अभाव, मेडिकल नॉलेज की कमी, अधिकारियों में कलह के कारण पिंपरी-चिंचवड मनपा आयुक्त श्रवण हडिकर कोरोना से मुकाबला करने में पस्त हो गए हैं.. उनका अधिकतर समय भाजपा के पदाधिकारियों के हितों के बचाव में ही निकलता है. इस वजह से उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड रहा है.
 
दो दिन पहले आनंदनगर में ३० से अधिक कोरोना संक्रमित मरीज मिले थे. इस वजह से इस परिसर को मनपा ने सील कर दिया है. इस क्षेत्र को कंटेन्मेंट μजोन के रूप में घोषित किया गया है. इस क्षेत्र की सभी दुकानें प्रशासन द्वारा बंद करा दी गई. लेकिन परिसर को सील करने से पहले कोई उपाय नहीं किए जाने से नागरिकों के सामने भूखे रहने की नौबत आ गई. इस वजह से बुधवार को सैकडों नागरिक सडक पर निकल आए थे. इसमें बडी संख्या में महिलाएं शामिल थीं. इस स्थिति पर काबू पाने के लिए मनपा आयुक्त को खुद आनंदनगर जाकर परिसर के नागरिकों से बातचीत करनी पडी. नागरिकों ने आयुक्त के सामने ही प्रशासन का निषेध किया.
 
सीधी खरीदी को लेकर आयुक्त रडार पर
 
पिंपरी-चिंचवड मनपा के सत्ताधारियों ने पिछले दो महीने से मनपा प्रशासन और स्टॉक डिपाटमेंट के जरिये लूट मचा रखी है. लेकिन इस पर मनपा प्रशासन की कोई नजर नहीं है. कोरोना की वजह से फिलहाल बजट का केवल ३३ फीसदी ही रकम खर्च करने का आदेश होने के बावजूद खुलेआम करोडों रुपए की खरीदी जारी है. लेकिन मनपा आयुक्त इस पर कुछ बोलने को तैयार नहीं है. इसलिए मनपा आयुक्त विरोधियों के निशाने पर आ गए हैं..
 
आयुक्त लागू करेंगे क्या?
 
स्वास्थ्य, चिकित्सा और कोविड को छोडकर नया टेंडर, बकाया देनदारी, काङ्र्म के आदेश पर सरकार ने रोक लगा रखी है. इसके बावजूद स्थायी समिति ने अत्यावश्यक काङ्र्मों के अलावा काङ्र्मों को मंजूरी देने का चलन शुरू कर दिया है. स्थायी समिति की मंजूरी के बाद मनपा आयुक्त इन विषयों पर अमल करेंगे क्या? या सरकार के आदेश का पालन करेंगे? इस पर सबकी नजरें टिकी हैं..