कोरोना इम्पैक्ट : अनिश्चितता बढने से हर साल बनी रहेगी सोने की मांग

AajKaAanad    22-May-2020
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Gold demands in corona_1&
 
रिपोर्ट- WGC ने चार काल्पनिक परिस्थितियों में सोने पर संभावित रिटर्न का अनुमान व्यक्त किया
 
महामारी के दौर में इस साल अब तक साढे चार माह में सोने ने दिया २०% तक का रिटर्न
 
कोरोना संकट के चलते जोखिम और अनिश्चतता के बढने और निवेश के अन्य माध्यमों में रिटर्न घटने से इस साल सोने की निवेश मांग बनी रह सकती है. इससे गोल्ड इन्वेस्टमेंट के रिटन पर उपभोक्ता मांग घटने के नकारात्मक असर की भरपाई हो सकती है. वल्ड गोल्ड काउंसिल (डब्ल्यूजीसी) ने अपनी एक रिपोर्ट में यह अनुमान जताया है. इसमें डब्ल्यूजे ने कहा है कि सोने का रुख आगे कैसा रहता है यह विश्व अर्थव्यवस्था में रिकवरी की रफ्तार, वित्तीय प्रोत्साहन और मॉनीटरी नीति के उपायों पर निर्भर करेगा.
 
रिपोर्ट में ऑ्नसफोड इकोनॉम्निस द्वारा उपलब्ध कराए गई चार काल्पनिक परिस्थियों में सोने में निवेश पर पांच साल में मिलने वाले संभावित रिटर्न का अनुमान है. इन चार काल्पनिक परिस्थितियों में तंज रिकवरी, अमेरिकी कॉरपोरेट संकट, उभरते बाजारों में गिरावट और कहरी मंदी शामिल हैं. गोल्ड एक ऐसी एसेट क्लास है जिसे महंगाई और करेंसी के मूल्य में कमजोरी से बचाव (हेज) के लिए निवेश का सुरक्षित माध्यम माना जाता है. कोरोना संकट से होने वाले आर्थिक नुकसान से निपटने के लिए विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों ने आर्थिक पैकेज का ऐलान किया है. इससे सोने की किमतों में तेजी देखने को मिली है.
 
अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह अब तक १९.३०% बढी है. ३१ दिसंबर को सोना १,४६० डॉलर प्रति आउंस के सीतर पर था. शुक्रवार को इसकी कीमत १,७४१.७५ प्रति आउंस चल रही थी. इसकी तर्ज पर घरेलू सराफा बाजारों में भी तेजी का रुख देखने को मिला है. भारतीय बाजार में सोने ने इस साल में अब तक १९.९५%रिटर्न दिया है.
 
१) तेज तस्करी
इस परिदृश्य में इस साल की पहली छमाही में ग्लोबल इकोनॉमी में रिकवरी बेहद कमजोर रहेगी. लेकिन दूसरी छमाही में तेजी से सुधार होगा. केंद्रीय ब।लशपीं;को को २०२४ तक वास्तविक ब्याज पर को शून्य के आसपास बनाए रखना होगा. ऐसे में सोने में निवेश में इस साल ४०% तक रिटर्न मिल सकता है. २०२० से २०२२ के चि रिटर्न घटेगा, लेकिन पॉजिटिव्व रहेगा. अगले दो साल में रिटर्न निगेटिव हो सकता है.
 
२) अमेरिकी कॉरपोरेट संकट
कोरोना संकट की वजह से अमेरिकी कंपनियों का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है. अस साल में अमेरिकी शशेयर बाजार ४५% तक गिर चुके हैं. यह ग्लोबल स्लोडाउन की एक प्रमुख वजह है. डब्ल्यूजेसी का मानना है कि इस परिदृश्य में २०२० में सोने पर संभावित रिटर्न ५१% से अधिक रहेगा. इसके बाद चार साल में सोने में नविश पर रिटर्न निगेटिव रहने का अंदेशा है.
 
३) गहरी मंदी
यदि कोरोनावायरस महामारी की वजह से दुनियाभर में डीप रिसेशन के हालात बनने पर डब्ल्यूजेसी मानना है कि कोरोना पॅकोप का ग्लोबल इकोनॉमी पर नकारात्मक असर शुरुआती अनुमान से अधिक गहरा होगा. ऐसे में २०२० में सोने का प्रदर्शन मजबूत रह सकता है यह रुझान २०२१ और २०२२ में भी देखने को मिलेगा. हालांकि इस दौरान रिटर्न घटने का रुझान रहेगा. २०२० में निवेश पर ७८% तक रिटर्न मिल सकता है. उभरते बाजारों मे गिरावटब्राजील, रुस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रिका जैसे उभरते बाजारों की इकोनॉमी में गिरावट आती है तो डब्ल्यूजेसी का मानना है कि कोरोना संकट की अनिश्तितता से वर्ष २०२० और २०२१ में सोने पर संभावित रिटर्न अन्य किसी भी परिदृश्य की तुलना में अधिक रहेगा. अस साल सबसे अधिक ६८% तक रिटर्न पॉजिटिव रहेगा. लेकिन २०२३ और २०२४ में निगेटिव रिटर्न देखने को मिल सकता है