दिल्ली में नेताओं की एक जांच होनी ही चाहिए कि इनमें कितने लोग मर गए हैं. और कितने लोग जिंदा हैं? जो मर गए हैं, उनको विदा किया जाए. सम्मान सहित! कुर्सी की गर्मी जिंदा रख सकती है.
मैंने सुना है ऐसा कि फोर्ड के एक प्रदर्शनगृह में एक आदमी ने एक कार पसंद की. मैनेजर उस कार में उसे बिठाकर पास की पहाडी का चक्कर लगवाने ले गया कि दिखा दे. कोई दस मील जाकर कार अचानक पहाडी पर रुक गई. संभावित खरीददार ने पूछा, नई गाडी और ठेठ पहाड पर रुक जाए, यह क्या मामला है? अच्छा हुआ कि तुमने चलाकर मुझे दिखा दी; अन्यथा मैं फंसता. मैनेजर ने कहा, चिंता न करो, कोई गाडी में खराबी नहीं है. असल में मैं पेट्रोल डालना भूल गया. तो उस आदमी ने पूछा कि बिना पेट्रोल के दस मील कैसे चली आई? मैनेजर ने कहा, इसमें कोई खूबी नहीं है, दस मील तो फोर्ड के नाम से ही गाडी चल जाती है. दस पांच मील का तो कोई हिसाब ही नहीं, फोर्ड का नाम काफी है!
दिल्ली में गौर से अगर जांचपडताल की जाए, अगर पोस्टमोर्टेम किया जाए, तो बहुत से नेता पाए जाएंगे कि मर चुके हैं, काफी दिन पहले मर चुके हैं, मगर कुर्सी की गरमी थर्मामीटरों को धोखा दे रही है! कुर्सी की धकधक और तुम समझ रहे हो उनके हृदय धडक रहे हैं!
एक लडकी अपनी मां से कह रही थी कि मां, मैं जिस युवक के प्रेम में हूं, उसका प्रेम बहुत होना चाहिए. क्योंकि जब भी वह मुझे गले लगता है, मैं सुन सकती हूं उसके हृदय की धकधक, धकधक, धकधक! उसकी मां ने कहा कि तू जरा ठहर! तेरे पिताजी भी मुझे धोखा देते रहे दो साल तक. उसने कहा, क्या मतलब? उसने कहा कि एक बडीसी जेबघडी रख कर छाती के पास धकधक, धकधक, धकधक मैं यही समझती थी कि वह प्रेम चल रहा है. वह केवल जेबघडी थी.
दिल्ली में नेताओं की एक जांच होनी ही चाहिए एक जांच कमीशन! शाह कमीशन तो काम नहीं आया, बादशाह कमीशन बैठना चाहिए! पहले तो यही जांच होनी चाहिए, इनमें कितने लोग मर गए हैं और कितने लोग जिंदा हैं? जो मर गए हैं, उनको विदा किया जाए. सम्मान सहित! कुर्सी की गर्मी जिलाए रख सकती है. और ध्यान रखना, कुर्सी की गर्मी होती है. बडी गर्मी होती है. पैसे की गर्मी होती है. मुल्ला नसरुद्दीन और उसका बेटा दोनों एक नाले को पार कर रहे थे, मुल्ला ने तो छलांग मारी और नाले के उस पार निकल गया! बूढा! अब बूढा छलांग मारे और बेटा पीछे रह जाए तो जरा जंचे न, भद्द हो, तो बेटे ने भी छलांग मारी. भद्द होकर रही! बुरी भद्द हुई! इससे तो बेहतर था कि नाले में उतर कर पार कर जाता आसानी से! बीच नाले में गिरा, चारों खाने चित्त! पानी में डुबकी मार गया. बाहर निकला और पिता से पूछा कि आपका राज क्या है? आप बूढे हो गए, नाला छलांग लगा गए, मैं जवान आदमी हूं, मैं बीच में गिर गया. मुल्ला हंसा. उसने कहा, इसका राज है, बेटा! जिंदगी मैंने कुछ ऐसे ही नहीं गंवाई धूप में बाल नहीं पकाए हैं! जेब खनखाई. उसमें नगद रुपए थे. बेटे ने कहा, मैं कुछ समझा नहीं; जेब खनखनाना, नगद रुपए, इससे क्या मतलब? मुल्ला ने कहा, मैं कभी जेब में बिना नगद रुपए लिए चलता ही नहीं. इसमें गर्मी बनी रहती है. उसी गर्मी से छलांग लगाई. तेरी जेब में क्या है? खाली जेब. गर्मी चाहिए!
तुमने देखा है, नेता जब पदों पर होते हैं तो कैसे युवा मालूम होने लगते हैं? जैसे अभीअभी इस्त्री किए हुए कपडे! और फिर जब पद चले जाते हैं तब उनकी हालत देखो. कैसे कुटेपिटे! इस्त्री वगैरह सब खो जाती है. लोग चटकमटक को जिंदगी समझ रहे हैं! यह जिंदगी का सिर्फ धोखा है. कुर्सी की गर्मी कोई जीवन का उत्ताप नहीं है.