जमीन से हजाराें फुट नीचे बसा दुनिया का अनाेखा गांव, जहां छिपे हैं कई गहरे राज़

    09-Sep-2020
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गांव-देहात की अपनी खूबसूरती हाेती है. हालांकि देहाती जिंदगी, शहरी रहनसहन के मुकाबले में नहीं टिकती क्याेंकि वहां शहराें जैसी सुख सुविधाएं नहीं हाेतीं. इसीलिए लाेग गांव छाेड़ शहराें की ओर भागते हैं. लेकिन आज हम आपकाे दुनिया के सबसे ताकतवर मुल्क अमेरिका के ऐसे गांव की सैर पर ले चलेंगे, जाे जमीन की सतह से तीन हजार फुट नीचे आबाद है.
 
अमेरिका की मशहूर ग्रैंड कैनियन काे देखने के लिए दुनिया भर से करीब 55 लाख लाेग एरिजाेना जाते हैं. मगर इसी में से एक गहरी घाटी हवासू कैनियन के पास ‘सुपाई’ नाम का एक बहुत पुराना गांव बसा है. यहां की कुल आबादी 208 है. यह गांव जमीन की सतह पर नहीं बल्कि ग्रैंड कैनियन के भीतर करीब तीन हजार μफुट की गहराई पर बसा है. पूरे अमेरिका में यह इकलाैता ऐसा गांव है, जहां आज भी खताें काे लाने और ले जाने में लंबा वक्त लगता है. मिर्जा गालिब के दाैर की तरह यहां आज भी लाेगाें के खत खच्चर पर लाद कर गांव तक लाए और ले जाए जाते हैं. खत ले जाने के लिए खच्चर गाड़ी का इस्तेमाल कब शुरू हुआ, यकीनी ताैर पर कहना मुश्किल है. खच्चर गाड़ी पर यूनाइटेड स्टेट पाेस्टल सर्विस की माेहर रहती है.
 
गांव में रहने वाली जनजाति का नामकरण गांव की खूबसूरती की बुनियाद पर हुआ है. हवासुपाई का अर्थ है नीले और हरे पानी वाले लाेग. यहां के लाेग गांव के पानी काे पवित्र मानते हैं. मान्यता है कि यहां निकलने वाले फिराेजी पानी से ही इस जनजाति का जन्म हुआ है. गांव तक पहुंचने के लिए खारदार झाड़ियाें के बीच से, भूल-भुलैया जैसी खाइयाें से हाेकर गुजरना पड़ता है. ऐसे ऊबड़-खाबड़ रास्ते से गुजरते हुए यह अहसास भी नहीं हाेता कि आगे स्वर्ग जैसी जगह का दीदार हाेने वाला है. सामने ही आपकाे एक बड़ा-सा बाेर्ड नजर आएगा जिस पर लिखा हाेगा ’सुपाई में आपका स्वागत है’.
 
गांव पूरी तरह ट्रैफिक के शाेर से आजाद है. खच्चर और घाेड़े गांव की गलियाें और पगडंडियाें पर नजर आ जाएंगे. इस गांव में भले ही शहराें जैसी सुविधाएं नहीं हैं, लेकिन एक तसल्लीबख्श जिंदगी गुजारने वाली तमाम सहुलियतें हैं. यहां पाेस्ट ऑफिस है, कैफे हैं, दाे चर्च हैं, लाॅज हैं, प्राइमरी स्कूल हैं, किराने की दुकानें हैं. यहां के लाेग आज भी हवासुपाई भाषा बाेलते हैं, सेम की फली और मकई की खेती करते हैं. राेजगार के लिए लच्छेदार टाेकरियां बुनते हैं और शहराें में बेचते हैं. टाेकरियां बनाना यहां का पारंपरिक व्यवसाय है.
 
गांव से शहर काे जाेड़ने का काम खच्चर गाड़ियाें से हाेता है. गांववालाें की जरूरत का सामान इन खच्चर गाड़ियाें पर लाद कर यहां लाया जाता है. कई सदियाें से लाेग इस अजीबाे-गरीब गांव काे देखने आते रहे हैं. बीसवीं सदी तक इस गांव के लाेगाें ने बाहरी लाेगाें के आने पर राेक लगा रखी थी, लेकिन आमदनी बढ़ाने के लिए उन्हाेंने करीब साै साल पहले अपने गांव के दरवाजे बाहरी दुनिया के लिए खाेल दिए.