152 साल पुराना देशद्राेह कानून सुप्रीम काेर्ट द्वारा रद्द

    12-May-2022
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अब धारा 124-अ के तहत जेलाें में बंद 13 हजार लाेगाें काे बड़ी राहत मिलेगी

SC
सुप्रीम काेर्ट ने बुधवार काे कड़ा फैसला सुनाते हुए 152 साल पुराने देशद्राेह कानून काे रद्द कर दिया है. इससे, अब धारा 124-अ के तहत जेलाें में बंद 13 हजार लाेगाें काे बड़ी राहत मिलेगी. इस कानून के तहत काेई भी नया केस दर्ज नहीं किया जा सकेगा. पहले से दर्ज मामलाें में कार्रवाई पर भी सर्वाेच्च न्यायालय ने राेक लगाई.इस धारा के तहत जेलाें में बंद आराेपी अब जमानत पा सकेंगे.
विस्तार से प्राप्त खबराें के अनुसार, देश में अंग्रेजाें के जमाने से चले आ रहे देशद्राेह कानून काे लेकर सुप्रीम काेर्ट ने बेहद सख्त फैसला दिया है. काेर्ट ने आदेश दिया है कि जब तक IPC की धारा 124-अ की री-एग्जामिन प्राेसेस पूरी नहीं हाे जाती, तब तक इसके तहत काेई मामला दर्ज नहीं हाेगा. काेर्ट ने पहले से दर्ज मामलाें में भी कार्रवाई पर राेक लगा दी है. वहीं, इस धारा में जेल में बंद आराेपी भी जमानत के लिए अपील कर सकते हैं.
 
केंद्र सरकार ने बुधवार काे राजद्राेह कानून (IPC की धारा 124-अ) पर सुप्रीम काेर्ट में जवाब दायर किया. इसके बाद काेर्ट ने केंद्र काे इस कानून के प्रावधानाें पर फिर से विचार करने की अनुमति दे दी. इसके पहले सरकार की ओर से साॅलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि IPC की धारा 124-अ पर राेक न लगाई जाए.हालांकि, उन्हाेंने यह प्रस्ताव दिया है कि भविष्य में इस कानून के तहत FIR पुलिस अधीक्षक की जांच और सहमति के बाद ही दर्ज की जाए.केंद्र ने कहा कि जहां तक लंबित मामलाें का सवाल है, संबंधित अदालताें काे आराेपियाें की जमानत पर शीघ्रता से विचार करने का निर्देश दिया जा सकता है.
 
गाैरतलब है कि देशद्राेह के मामलाें में धारा 124-अ से जुड़ी 10 से ज्यादा याचिकाओं काे सुप्रीम काेर्ट में चुनाैती दी गई है. केंद्र ने कहा कि, संज्ञेय अपराध काे दर्ज हाेने से नहीं राेका जा सकता है. कानून के प्रभाव पर राेक लगाना सही नहीं हाे सकता, इसलिए जांच के लिए एक जिम्मेदार अधिकारी हाेना चाहिए. मामला तभी दर्ज हाे, जब वह कानून के तहत तय मानकाें के अनुरूप हाे. SG तुषार मेहता ने कहा कि देशद्राेह के लंबित मामलाें की गंभीरता का पता नहीं है. इनमें शायद आतंकी या मनी लाॅन्ड्रिंग का एंगल है.
वे काेर्ट में विचाराधीन हैं, और हमें उनके फैसलाें का इंतजार करना चाहिए. केंद्र ने यह दलील भी दी कि काेर्ट की संविधान पीठ द्वारा बरकरार रखे गए देशद्राेह के प्रावधानाें पर राेक लगाने के लिए आदेश देना सही तरीका नहीं हाे सकता है.