कोल्हापुर, 28 जुलाई (वि.प्र.) - देश में कई ऐसे मंदिर हैं जिनसे कई चौंकाने वाले रहस्य छिपे हुए हैं। ऐसे ही एक राज महाराष्ट्र के कोल्हापुर में स्थित 1800 साल पुराने महालक्ष्मी मंदिर के बारे में ऐसा माना जाता जाता है। जिसे अभी तक विज्ञान भी चैलेंज नहीं कर पाया है। दरसअल इस मंदिर की चारों दिशाओं में एक-एक दरवाजा मौजूद है .
और कहा जाता है कि इस मंदिर में कितने खंभे हैं इसे आज तक कोई नहीं गिन पाया है। लोगों का मानना है कि इस मंदिर में खजाना छिपा है। 3 साल पहले जब इसे खोला गया तो मंदिर से कई साल पुराने सोने, चांदी और हीरों आभूषण मिले जिसकी बाजार में कीमत अरबों रुपए में हैं। इतिहासकारों के मुताबिक, कोल्हापुर के महालक्ष्मी मंदिर में कोंकण के राजाओं, चालुक्य राजाओं, आदिल शाह, शिवाजी और उनकी मां जीजाबाई तक ने चढ़ावा चढ़ाया है। जब मंदिर के खजाने की गिनती शुरू की गई तो इसकी पूरी कीमत का पता लगाने के लिए करीब 10 दिन का समय लग गया। मंदिर के इस खजाने का बीमा भी कराया गया है। बता दें कि इस बीमा के कीमत का खुलासा मंदिर ट्रस्ट ने नहीं किया है।
इससे पहले मंदिर के खजाने को साल 1962 में खोला गया था। इस मंदिर के बाहर मौजूद एक शिलालेख और इतिहासकारों के मुताबिक ये मंदिर 1800 साल पुराना है। लोगों की मान्यता है कि शालि वाहन घराने के राजा कर्णदेव ने इसका निर्माण करवाया था। बाद में जब ये मंदिर प्रसिद्द हो गया तो इसके आंगन में करीब 35 और छोटे-छोटे मंदिरों का निर्माण कराया गया।
करीब 25 हजार वर्गफुट से भी अधिक में फैला यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में शुमार है। इस मंदिर में आदि गुरु शंकराचार्य ने देवी महालक्ष्मी की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा की थी। इस मंदिर के नक्काशियों वाले खंभे भी बहुत प्रसिद्द हैं।
बता दें कि कोल्हापुर के इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि देवी सती के तीनों आँखें यहीं गिरे थे। इस मंदिर को मां भगवती का निवास माना जाता है। मंदिर के बारे में लोगों का कहना है कि इस मंदिर को ऐसा बनाया गया है कि साल के एक खास समय सूर्य की किरणें मुख्य मंदिर में मौजूद देवी की मूर्ति पर सीधे पड़ती हैं। ऐसा मान्यता है कि तिरुपति यानी भगवान विष्णु से रूठकर उनकी पत्नी महालक्ष्मी कोल्हापुर आई थी।