भारत को समझने उसकी सांस्कृतिक विरासत जानना जरुरी

भांडारकर प्राच्यविद्या संशोधन मंदिर संस्था द्वारा आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा

    22-Sep-2022
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पुणे, 21 सितंबर (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)
 
भारतीय संस्कृति में विभिन्नता है. अगर हमें भारत को समझना है तो भारत की प्राचीन संस्कृति, इतिहास, वैदिक परंपरा, संगीत, आयुर्वेद इन क्षेत्रों की एकजुटता को समझ लेना जरूरी है, यह राय केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने व्यक्त की. भांडारकर प्राच्यविद्या संशोधन मंदिर संस्था की ओर से बुधवार (21 सितंबर) को दोपहर साढ़े चार बजे नवलमय फिरोदिया सभागृह में आयोजित कार्यक्रम में निर्मला सीतारमण बोल रही थीं. केंद्रीय वितमंत्री के हाथों भारत विद्या ऑनलाइन शैक्षिक पोर्टल का अनावरण किया गया. इस मौके पर राज्य के उच्च व तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल, संस्था के मैनेजिंग बोर्ड के अध्यक्ष एड. सदानंद फडके, कार्याध्यक्ष भूपाल पटवर्धन, कोषाध्यक्ष संजय पवार, ट्रस्टी व पूर्व सांसद प्रदीप रावत मंच पर उपस्थित थे. संस्था की ओर से भागवत पुराण की प्राचीन हस्तलिखित कॉपी देकर केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण का सम्मान किया गया. इसके साथ ही भारत विद्या पोर्टल बनाने में योगदान देने वाले डॉ. गौरी मोघे, चिन्मय भंडारी व अन्य युवा सहयोगियों को निर्मला सीतारामण के हाथों सम्मानित किया गया.
निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत की प्राचीन संस्कृति की नींव धर्म है. धर्म ही भारत की छवि है. केंद्र सरकार ने भी अब राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भारतीय दर्शन शास्त्र को मुख्य रूप से शामिल किया है. पुणे और भांडारकर प्राच्यविद्या मंदिर संस्था के प्रति मेरा विशेष आदर है. क्योंकि पुणे में बौद्धिक संपत्ति को विशेष प्राथमिकता दी जाती है. आधुनिक युग की 21वीं सदी में भांडारकर प्राच्यविद्या संशोधन मंदिर संस्था भारतीय संस्कृति का जतन करने का महत्वपूर्ण काम कर रही है. विशेष रूप से महाभारत पर चिकित्सात्मक शोध को लेकर विशेष गर्व है. वर्तमान युग डिजिटल मीडिया का है, यह कहते हए युवा शोधकर्ताओं द्वारा भारत विद्या पोर्टल के लिए किए गए काम को सीतारमण ने शुभकामनाएं दीं.
सीतारमण ने कहा कि भारतीय संस्कृति अनमोल संपत्ति है. इसीलि भारतीय इंजीनियर्स भी संस्कृत भाषा सीखने को प्राथमिकता दे रहे हैं, यह विशेष उल्लेखनीय बात है. मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि ऐतिहासिक विषयों में रिसर्च कर लोगों के सामने तत्कालीन ऐतिहासिक वास्तव सामने लाने कार्य भांडारकर संस्था कर रही है. 2000 वर्षों पहले लिखा इतिहास सच्चा था या झूठा था इसकी अब रिसर्च से सत्य सामने आने में मदद होगी.
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार महाराष्ट्र सरकार 2 नए करार करेगी. भांडारकर संस्था द्वारा भी पुणे यूनिवर्सिटी से जुड़े कुछ ऑनलाइन कोर्सेस शुरू करने पर छात्रों के क्रेडिट पॉइंट्स बढ़ेंगे. दिसंबर तक पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग के पाठ्यक्रम मराठी में शुरू करने को लेकर राज्य सरकार ने कदम उठाए हैं. कार्यक्रम में भूपाल पटवर्धन ने संस्था के काम की जानकारी दी. पूर्व सांसद प्रदीप रावत ने अपनी राय व्यक्त की. एड. सदानंद फडके ने आभार व्यक्त किया.