खड़की छावनी (कैन्टोंमेंट) बोर्ड के चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर रॉबिन बलेजा
खड़की कैन्टोंमेंट बोर्ड ने पिछले 1 साल में अपने राजस्व स्त्रोतों को बढ़ाया है, जिससे वर्तमान में बोर्ड खुद के बुनियादी खर्च उठाने में सक्षम है. लेकिन खड़की बोर्ड को हर नागरिक निकाय की तरह जीएसटी का हिस्सा मिलना चाहिए, ताकि विकास कार्यों में और देरी न हो, ऐसी जानकारी खड़की छावनी (कैन्टोंमेंट) बोर्ड के चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर रॉबिन बलेजा द्वारा दै. ‘आज का आनंद' के पत्रकार प्रसाद पाठक व रिद्धि शाह से विशेष साक्षात्कार में साझा की गई. पेश है पाठकों के लिए उनसे की गई चर्चा के कुछ मुख्य अंश...
सवाल : आप कहां से हैं? आपकी पारिवारिक पृष्ठभूमि क्या है?
रॉबिन बलेजा : मैं मध्यप्रदेश के सागर जिले से हूं. मैं एक व्यापारिक परिवार से हूं. मेरे पिताजी एक व्यवसायी थे. 2015 तक मैंने अपने पिताजी के साथ उनके व्यवसाय में उनका हाथ बंटाया और 2015 में पिताजी के निधन के बाद मैं जॉब करने लगा. कुछ समय तक मैंने इंदौर के टाइम्स ऑफ इंडिया के टाइम्स बिजनेस सॉल्यूशन लिमिटेड के इलेक्ट्रॉनिक डिवीजन में नौकरी की थी. उसके बाद मैंने सिविल सर्विसेज की तैयारी की और परीक्षा में उत्तीर्ण होने के बाद डिफेंस सर्विसेज में आ गया.
सवाल : पुणे में आए हुए आपको कितने साल हो गए? आप खड़की कैन्टोंमेंट बोर्ड के सीईओ के रूप में कब से कार्यरत हैं?
रॉबिन बलेजा : मैं खड़की कैन्टोंमेंट बोर्ड के सीईओ के पद पर 1 मई 2022 को कार्यरत हुआ था तो तब से लेकर अब तक मुझे पुणे में आकर डेढ़ साल हो गए हैं.
सवाल : खड़की कैन्टोंमेंट बोर्ड के सीईओ के रूप में नियुक्त होने से पहले आप किन पदों पर कार्यरत थे?
रॉबिन बलेजा : सर्वप्रथम मेरी पोस्टिंग तमिलनाडु में वेलिंगटन कैन्टोंमेंट बोर्ड के सीईओ के पद पर हुई थी. उसके बाद मेरी पोस्टिंग मेरे ही गृहनगर सागर में सागर कैन्टोंमेंट बोर्ड के सीईओ के तौर पर हुई थी. फिर मेरी पोस्टिंग इंदौर के महू में हुई थी, जहां मैंने महू कैन्टोंमेंट बोर्ड के सीईओ के पद पर कार्य किया था. महू के बाद मेरी तैनाती ग्वालियर के मुरार में हुई थी, वहां भी मैंने मुरार कैन्टोंमेंट बोर्ड के सीईओ के रूप में कार्य किया था. इसके बाद मेरी पोस्टिंग कोलकाता में रक्षा संपदा अधिकारी के तौर पर हुई थी और फिलहाल मेरी पोस्टिंग पुणे के खड़की कैन्टोंमेंट बोर्ड में सीईओ के तौर पर हुई. मुझे इस फील्ड में करीब 10 साल का अनुभव है.
सवाल : क्या बोर्ड द्वारा अतिक्रमण किए गए क्षेत्रों का सर्वेक्षण किया गया है? बोर्ड की सीमा में की गई अतिक्रमण की कार्रवाई के बारे में जानकारी दीजिए?
रॉबिन बलेजा : बोर्ड अतिक्रमण क्षेत्रों का सर्वेक्षण भी करता है एवं उन पर निगरानी भी रखता है. इसके लिए हमारा एक मॉनिटरिंग मैकेनिज्म है. हमारा एन्क्रोचमेंट स्क्वॉड है जो इन पर नजर रखता है. दूसरा स्टेशन हेडक्वॉटर्स की तरफ से हर जगह का अधिकारी नियुक्त किया गया है, जो नियमित रूप से इन पर ध्यान रखता है और अगर क्षेत्र पर अतिक्रमण होता है तो वह हमें रिपोर्ट करता है. तीसरा हमारा स्वच्छता विभाग है, जिसके कर्मचारी प्रतिदिन फील्ड पर जाते हैं और अगर कोई भी अवैध कंस्ट्रक्शन साइट देखते हैैं तो हमें रिपोर्ट करते हैं. फिर हम जांच करते हैं और कार्रवाई करते हैं और कार्रवाई के तहत हम उन्हें पीपी (पब्लिक प्रीमाईसेज) अधिनियम का नोटिस देते हैं.
सवाल : खड़की बोर्ड की जनसंख्या कितनी है? और अन्य दो बोर्डों के मुकाबले यहां की स्थिति कैसे भिन्न है?
रॉबिन बलेजा : 2011 की जनगणना के अनुसार, खड़की कैन्टोंमेंट बोर्ड की आबादी 71 हजार है और पुणे कैन्टोंमेंट बोर्ड की भी लगभग इतनी ही आबादी है. देहूरोड कैन्टोंमेंट बोर्ड का क्षेत्र तुलनात्मक रूप से छोटा है, वहीं पुणे बोर्ड का दायरा बहुत बड़ा है. वहां कॉमर्शियल प्रतिष्ठान ज्यादा हैं. खड़की कैन्टोंमेंट बोर्ड में गोला-बारूद फैक्ट्री जैसे सैन्य प्रतिष्ठान है. खड़की बाजार यहां के मुख्य आकर्षण का केंद्र है. इसलिए यहां सब्जियां, कपड़े, पारंपरिक सामान से लेकर तरह-तरह के सामान खरीदे और बेचे जाते हैं. इसके साथ खड़की कैन्टोंमेंट बोर्ड को पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ मनपा को जोड़ने वाले मुख्य केंद्र के रूप में मान्यता प्राप्त है.
सवाल : सर्वे ऑफ लैंड यूज की रिपोर्ट पर बोर्ड द्वारा क्या कार्रवाई की गई है?
रॉबिन बलेजा : पहले फेज के अंतर्गत 2018 में हमने सर्वप्रथम सर्वेक्षण किया था जो एटीएस (इलेक्ट्रॉनिक टोटल स्टेशन) मशीन से किया था. वहीं पिछले साल 2022 में आधुनिक तरीके से सर्वे क्षण किया, जिसके अंतर्गत ड्रोन सर्वेक्षण किया गया था. सर्वेक्षण के अंतर्गत हमने पूरे कैन्टोंमेंट एरिया की ड्रोन से मैपिंग करवाई है और कहां-कहां पर कंस्ट्रक्शन हो रहा है, रोड का क्षेत्रफल क्या है, वहां का एरिया वेरिएशन कैसा है, जन-सुविधाओं के क्षेत्रफल आदि का पता लगाया था. ड्रोन सर्वे क्षण एक आधुनिक तकनीक है, जो हमारे लिए मददगार साबित हुई है, क्योंकि इस तकनीक से हमको बिल्कुल सही क्षेत्रफल और लैंड यूज का बराबर डेटा प्राप्त हुआ है. वहीं सर्वेक्षण की जो प्रक्रिया है, वह एक लगातार प्रक्रिया है, इसीलिए हम हमेशा अपने रिकॉर्ड को मेंटेन करने के लिए समय-समय पर सर्वेक्षण करते हैं और रिपोर्ट को अपडेट रखते हैं.
सवाल : खड़की बाजार में पुरानी पानी की टंकी सहित अन्य सुविधाओं के बारे में क्या जानकारी देंगे?
रॉबिन बलेजा : खड़की बाजार स्थित पुरानी पानी की टंकी को पूरी तरह हटा दिया गया है, क्योंकि हाल ही में मनपा द्वारा नेहरू उद्यान में पानी की नई टंकी का निर्माण कर दिया गया है और सर्वे नंबर 89ए-बी पर जो पुरानी पानी की टंकी हटाई गई है, उसकी जगह रक्षा मंत्रालय द्वारा यह निर्देश आया है कि उस जगह पर पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के अंतर्गत कॉमर्शियल मार्केट के तौर पर निर्माण किया जाए. इसलिए इस संदर्भ में हमने एक सलाहकार को भी नियुक्त कर लिया है और सलाहकार से हमें अभी प्रारंभिक रिपोर्ट भी मिल चुकी है, जिसे बोर्ड मीटिंग में अप्रूवल मिल चुका है. अब हम उस रिपोर्ट की डीपीआर बनाकर उसका टेंडर डॉक्युमेंट निकालेंगे. वहीं इस प्रस्ताव के मुताबिक कॉमर्शियल मार्केट को एक बिल्डिंग के अंदर स्थापित किया जाएगा, जिसमें चार मंजिलें होंगी और मंजिलों के हिसाब से यहां पर पार्किंग सुविधा, व्यावसायिक दुकान, शोरूम और एक हेल्थ केयर सेंटर भी होगा.
सवाल : सीएसआर फंड से डॉ. आंबेडकर हॉस्पिटल को अब तक कितनी वित्तीय सहायता प्राप्त हुई है?
रॉबिन बलेजा : कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी यानी सीएसआर फंड से डॉ. आंबेडकर हॉस्पिटल को पिछले साल 1 करोड़ रुपए की मदद मिली है, जिससे हॉस्पिटल में एक ऑक्सीजन प्लांट विकसित कर दिया गया है. वहां एक जनरेटर भी लगा दिया गया है. निजी कंपनियों के माध्यम से मिले सीएसआर फंड से हॉस्पिटल को बहुत फायदा हुआ है. हॉस्पिटल में वर्तमान में 73 कर्मचारी स्थायी नियुक्त हैं, लेकिन स्टाफ की यह संख्या पर्याप्त नहीं है. वर्तमान में हॉस्पिटल में स्टाफ की भारी कमी है और अधिक स्टाफ की जरूरत है. फिलहाल अस्पताल में 11 डॉक्टर्स और 8 नर्से कार्यरत हैं. लेकिन 6 डॉक्टरों के पद अभी भी खाली हैं, जिसके लिए स्थायी नियुक्ति की जरूरत है. वहीं बोर्ड सभी से अपील करता है कि वह सीएसआर फंड में अपना सहयोग प्रदान करे ताकि हॉस्पिटल को जनता के लिए और सुविधाजनक बनाया जा सके और कार्डियक सेंटर, ऑन्कोलॉजी सेंटर, मैटरनिटी वार्ड, बाल चिकित्सा केंद्र जैसी आधुनिक सुविधाएं दी जा सकें. बोर्ड द्वारा हॉस्पिटल को पीपीपी मॉडल के अंतर्गत भी विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है.
सवाल : खड़की कैन्टोंमेंट बोर्ड में कर्मचारियों की कितनी संख्या है और भर्ती प्रक्रिया कब से शुरू होगी?
रॉबिन बलेजा : खड़की कैन्टोंमेंट बोर्ड के अंतर्गत 980 पद हैैं, लेकिन अभी वर्तमान में खड़की कैन्टोंमेंट में मात्र 400 लोग ही कार्यरत हैैं, इसलिए हमें स्थायी रूप से कर्मचारियों की आवश्यकता है, ताकि बोर्ड और अच्छे तरीके से काम कर सके. इसी मुहिम में हमने पिछले साल भर्ती प्रक्रिया शुरू भी की थी, लेकिन उसके तुरंत बाद केंद्र सरकार के निर्देश के अनुसार भर्ती प्रक्रिया को स्थगित कर दिया गया था. अब अगले निर्देशों के अनुसार ही हम भर्ती प्रक्रिया शुरू करेंगे. हमने कांट्रैक्ट बेसिस पर 522 सफाई कर्मचारियों को नियुक्त किया है, जो अभी आर्मी क्षेत्रों में कार्यरत हैं इसके बाद हमने 300 कर्मचारी पदों पर- सुरक्षा गार्डों और टीचर्स को नियुक्त किया है और इन टीचर्स की नियुक्ति बोर्ड के कर्नल-भगत स्कूल में की गई है.
सवाल : कर्मचारियों की मंथली सैलरी पर बोर्ड का कितना खर्च होता है, और बोर्ड इसका कैसे खर्च उठाता है?
रॉबिन बलेजा : जो हमारे कांट्रैक्चुअल कर्मचारी हैं, स्थायी रूप से नियुक्त कर्मचारी हैं, स्थायी रूप से नियुक्त कुछ डॉक्टर्स हैं, पेंशनर्स हैं, इनको सैलरी देना वह भी बिना किसी रूकावट के, यह बोर्ड की जिम्मेदारी है और इन सभी कर्मचारियों पर मंथली सैलरी का खर्च लगभग 7 करोड़ के आसपास रहता है. वर्तमान में खड़की कैन्टोंमेंट बोर्ड एक आत्मनिर्भर बोर्ड है, जिसने राजस्व के स्रोत बढ़ाकर खुद को आत्मनिर्भर बनाया है. हालांकि देशभर के हर कैन्टोंमेंट बोर्ड को सर्विस चार्ज दिया जाता है, जिसके अंतर्गत हमें हर साल 12 से 14 करोड रुपए का सर्विस चार्ज मिलता है. इस तरह बोर्ड अपने कर्मचारियों के वेतन का खर्चा उठाने में सक्षम है. वहीं राजस्व के अन्य स्रोतों में हमारे क्षेत्र में एम्युनिशन फैक्ट्री होने से भी हमें इसका फायदा मिलता है. हमें हर साल गोला-बारूद फैक्ट्री से 46 करोड़ रुपए का सर्विस चार्ज प्राप्त होता है और इसी राजस्व स्रोत की बदौलत बोर्ड इस बार खुद का बजट पेश करने में सफल रहा.
सवाल : बोर्ड के स्वामित्व वाली ऐतिहासिक इमारतों के रखरखाव की लागत का इंतजाम कैसे किया जाता है?
रॉबिन बलेजा : खड़की कैन्टोंमेंट बोर्ड की सीमा के भीतर कई ऐतिहासिक इमारतें शामिल हैं, जिसमें ज्यादातर चर्च हैं. इन ऐतिहासिक इमारतों एवं चर्च का रखरखाव अधिकतर मंडलों द्वारा किया जाता है, क्योंकि यह बोर्ड की सीमा एवं सार्वजनिक सेवाओं के अंतर्गत आते हैं, इसलिए बोर्ड इन संरचनाओं के आसपास के क्षेत्र एवं परिसरों में अधिकतर सड़क की सफाई और व्यवस्थित जल प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करता है.
सवाल : सभी आठों वार्डों के विकास कार्यों में देरी होने के क्या कारण हैं?
रॉबिन बलेजा : पिछले साल तक खड़की कैन्टोंमेंट बोर्ड के पास राजस्व के स्रोत में कमी होने के कारण विकास कार्यों में देरी हो रही थी, लेकिन इस साल से बोर्ड ने अपने राजस्व स्रोतों को बढ़ाया है इसलिए अब हम इन आठों वार्डों के विकास कार्यों पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं. फिर चाहे वह सिविल वर्क हो, पार्क एवं उद्यानों का मेंटेनेंस हो या सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट हो
सवाल : बोर्ड के कुल कितने स्कूल हैं और सीएसआर फंड से स्कूलों के विकास के लिए बोर्ड को कितना फंड मिला है?
रॉबिन बलेजा : खड़की कैन्टोंमेंट बोर्ड के अंतर्गत कुल 8 स्कूल हैं, जिनमें करीब 4 हजार बच्चे पढ़ते हैं. इन स्कूलों में न सिर्फ खड़की के बच्चे आते हैं, बल्कि आसपास के सभी क्षेत्रों से भी कई बच्चे यहां पढ़ने आते हैं. हमारे कर्नल भगत स्कूल में बच्चों की संख्या सबसे अधिक है, क्योंकि उसको 2011 से हिंदी मीडियम से अंग्रेजी मीडियम में बदल दिया गया है और इस स्कूल में अभी 1700 बच्चे पढ़ते हैं. इसके अलावा वहां हमेशा 200 से 300 बच्चे एडमिशन हेतु वेटिंग लिस्ट पर रहते हैं. लेकिन हम जल्दी इस स्कूल का विकास कार्य करेंगे और इसका क्षेत्रफल बढ़ाएंगे क्योंकि हम नहीं चाहते बच्चे वेटिंग लिस्ट पर रहेें. इसके अलावा हम इस स्कूल का कक्षा दायरा बढ़ाकर इसमें 11वीं और 12वीं कक्षा को भी शामिल कर देंगे. साथ ही इस स्कूल में एक नई बिल्डिंग और नए रूमों का भी निर्माण करेंगे. इसके लिए हमें बोर्ड से मंजूरी भी मिल चुकी है. इसके अलावा हमें जो 5 लाख रुपए स्कूल के सीएसआर फंड के रूप में मिले थे, उसको हमने बच्चों को यूनिफॉर्म एवं किताबें देने में इस्तेमाल किया है.
सवाल : भविष्य में क्या बोर्ड की पुणे मनपा में विलय की कोई योजना है और खड़की कैन्टोंमेंट बोर्ड नाम पर जो प्रस्ताव दिया गया था उसे अभी मंजूरी मिली या नहीं?
रॉबिन बलेजा : मैं इस संदर्भ में कोई भी जानकारी नहीं दे सकता, क्योंकि यह निर्णय केंद्र सरकार द्वारा लिया जाता है और फिलहाल इस संदर्भ में सरकार ने किसी भी कमेटी का गठन नहीं किया है और भविष्य में इस पर जो भी फैसला लिया जाएगा वह केंद्र सरकार द्वारा ही लिया जाएगा. बात करें खड़की कैन्टोंमेंट बोर्ड नाम की, तो सारे कैन्टोंमेंट बोर्ड कैन्टोंमेंट अधिनियम के अनुसार ही रजिस्टर होते हैं और जो एक बार उसमें नाम दर्ज हो जाता है, उसको हम अपने स्तर पर बदल नहीं सकते, क्योंकि इसका निर्णय लेने का अधिकार केंद्र सरकार के पास होता है. सिर्फ केंद्र सरकार द्वारा ही किसी भी कैन्टोंमेंट का नाम बदला जा सकता है. जैसे हाल ही में फैजाबाद कैन्टोंमेंट बोर्ड का नाम बदलकर केंद्र सरकार द्वारा अयोध्या कैन्टोंमेंट बोर्ड रख दिया गया है. मैंने भी खड़की कैन्टोंमेंट बोर्ड के नाम के संदर्भ में केंद्र सरकार को एक प्रस्ताव भेजा है, जिसके अंतर्गत मैंने उनसे ‘किरकी' शब्द को हटाकर उसे ‘खड़की' शब्द में बदलने का आग्रह किया है, क्योंकि खड़की ही हमारा हिंदुस्तानी नाम है. फिलहाल केंद्र सरकार का इस पर कोई निर्णय अभी तक नहीं आया है.
सवाल : सीमाओं के भीतर पुराने मकानों के पुनर्विकास के लिए भविष्य में बोर्ड की क्या योजनाएं हैं?
रॉबिन बलेजा : सर्वप्रथम जो भी हमारे यहां पर मकान बनते हैं, वह बिल्डिंग अधिनियम के तहत बनते हैं. वहीं पुणे कैन्टोंमेंट बोर्ड की तरह खड़की कैन्टोंमेंट बोर्ड में भी मकान मालिकों और किरायेदारों के बीच विवाद के मामले सामने आते हैं. लेकिन हम इस विवाद पर ध्यान न देते हुए मकान के पूर्ण विकास पर ध्यान केंद्रित करते हैं और उन्हें बुनियादी मरम्मत की अनुमति देते हैं. सीमाओं के भीतर बोर्ड द्वारा 50 ऐसे मकानों की पहचान की गई है, जो बेहद खतरनाक एवं गिरने जैसी स्थिति में हैं. इसीलिए बोर्ड द्वारा उन्हें तुरंत मरम्मत का नोटिस जारी किया गया है.
सवाल : बोर्ड सीमा के अंतर्गत स्कूलों, पार्कों, सांस्कृतिक भवनों से संबंधित समस्याओं पर क्या समाधान निकाले जा रहे हैं?
रॉबिन बलेजा : वर्तमान में मुंबई पुणे का सारा यातायात खड़की कैन्टोंमेंट बोर्ड की तरफ डायवर्ट कर दिया गया है. खड़की बाजार की सड़क ज्यादा चौड़ी नहीं है और डायवर्जन के बाद यहां भारी जाम होने से यहां का मार्केट डाउन हो गया है, क्योंकि यहां मुख्य समस्या पार्किंग, भारी यातायात भीड़ को लेकर आ जाती है. इसके लिए हमने पुणे मनपा और आर्मी विभाग के साथ मिलकर एक नई योजना बनाई है कि आंबेडकर रोड से लेकर होलकर ब्रिज तक की सड़क पर चौड़ीकरण का कार्य किया जाए, ताकि यातायात एवं पार्किंग की समस्या पर समाधान पाया जा सके. इसके अलावा हमारे द्वारा कुछ प्लॉट्स की पहचान की गई है जिसमें 108 चौपाटी एरिया शामिल है जो करीब 23 हजार स्क्वेयर फीट का प्लॉट है तो उसे पार्किंग क्षेत्र में परिवर्तन करने का फैसला लिया गया है ताकि जो लोग खड़की में शॉपिंग के लिए आते हैं, उन्हें पार्किंग की दिक्कतों का सामना न करना पड़े. खड़की के अंतर्गत दो सांस्कृतिक भवनों का मैनेजमेंट किया जाता है जिसमें श्री राम मंगल कार्यालय एवं साप्रस में स्थित मैरिज हॉल शामिल हैं. जो साप्रस में हमारा मैरिज हॉल है उसकी स्थिति वर्तमान में अच्छी है, इसलिए हम उसको जनता की सुविधा के लिए प्रदान करते हैं. वही श्री राम मंगल कार्यालय की स्थिति अच्छी नहीं है, क्योंकि वह बहुत पुराना है इसलिए हम उसको पीपीपी मॉडल के तहत दोबारा आधुनिक सुविधाओं के साथ निर्माण करेंगे. वही हम छुट्टियों के दौरान स्कूल के गार्डन को भी शुभ कार्य के लिए दे देते हैं. इसके साथ हम कर्नल भगत स्कूल में एक नई बिल्डिंग के साथ कुछ क्लासरूम का निर्माण कर रहे हैं और उसमें 11वीं और 12वीं कक्षा को भी जोड़ रहे हैं.
सवाल : बोर्ड के आम चुनाव कब तक होने की संभावना है? क्या बोर्ड ने चुनाव को मद्देनजर रखते हुए अपनी प्रशासनिक तैयारी पूरी कर ली है?
रॉबिन बलेजा : बोर्ड के आम चुनाव कब होंगे, इसका निर्णय केंद्र सरकार द्वारा लिया जाता है. इसीलिए मुझे इसकी कोई जानकारी अभी नहीं है, लेकिन इस साल के मार्च में केंद्र सरकार द्वारा चुनाव की जो घोषणा की गई थी, फिलहाल उसे रद्द कर दिया गया है. बोर्ड द्वारा मतदाताओं की सूची को तैयार कर दिया गया है और अपडेट भी कर दिया गया है.
सवाल : बोर्ड के फायर ब्रिगेड के विस्तार की बाबत पूरी जानकारी दीजिए?
रॉबिन बलेजा : वर्तमान में हमारे पास मात्र एक ही फायर व्हीकल है और एक ही अग्निशमन केंद्र है जो हमारे कैन्टोंमेंट बोर्ड की दीवार से ही जुड़ा हुआ है. वहीं फायर ब्रिगेड के लिए हमें इस बात की जरूरत है कि वह जिस भी रोड से निकले, वह रोड चौड़ी और केंद्र पर हो, ताकि उसे तुरंत पहुंचने मेें कोई समस्या न आए, इसलिए कैन्टोंमेंट बोर्ड द्वारा फायर ब्रिगेड स्टेशन के लिए बोर्ड के पास की खाली जगह चुनी गई. ताकि आसानी से घटनास्थल पर जाया जा सके. फिलहाल हमारा अभी कोई दूसरा अग्निशमन केंद्र बनाने का विचार बिल्कुल नहीं है. यदि बात करें अग्निशमन के अंदर कर्मचारियों की, तो हमारे पास इस केंद्र में अपर्याप्त कर्मचारी हैं हमें और अधिक कर्मियों की सख्त जरूरत है. वर्तमान में 12 फायरमैन हम लोगों ने कांट्रैक्ट बेसिस पर नियुक्त किए हैं और ड्राइवर मिलाकर इसमें 18 स्टॉफ है, जिनमें से 13 कर्मचारी कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर है. इसके अलावा इस केंद्र में जो मुझे आवश्यकता महसूस हुई, वह एक फायर ब्रिगेड सुपरिंटेंडेंट की है, क्योंकि फायर ब्रिगेड सुपरिंटेंडेंट एक प्रशिक्षित व्यक्ति होता है जो भली-भांति जानता है कि केंद्र को कैसे सही ढंग से चलाया जा सके और कैसे सही समय पर लोगों तक मदद पहुंचाई जा सके, इसीलिए मैंने बोर्ड की तरफ से यह प्रस्ताव भी जारी कर दिया है.
सवाल : खड़की कैन्टोंमेंट बोर्ड द्वारा जीएसटी में हिस्सेदारी पाने के लिए क्या प्रयास किए गए हैं और किन प्रयासों की योजना जारी है? जीएसटी या अन्य सीमित रेवेन्यू स्रोतों की वजह से बोर्ड के कौन-कौन से विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं?
रॉबिन बलेजा : राज्य के सारे कैन्टोंमेंट बोर्ड में जीएसटी मुद्दा एक अहम मुद्दा है, क्योंकि अभी तक हमें जीएसटी कंपनसेशन नहीं मिला है. जीएसटी कलेक्शन हमारे रीजन से होता है लेकिन सरकार द्वारा हमें जीएसटी कंपनसेशन नहीं दिया गया है जबकि म्युनिसिपल कॉरपोरेशन को जीएसटी का बकाया हिस्सा राज्य सरकार द्वारा दिया जा रहा है. इसके अलावा जो हमें एक बड़ी रकम इससे मिलनी चाहिए वह हर साल हमें नहीं मिल पा रही है. इससे हमारे कई विकास कार्य रुके हुए हैं. अगर हमें सरकार से जीएसटी का हिस्सा मिलेगा तो जितनी भी विकास कार्यों में देरी हो रही है, सर्वप्रथम उनपर ध्यान केंद्रित किया जाएगा इसलिए जीएसटी का हिस्सा मिलना बोर्ड के लिए अति आवश्यक है. इसके लिए हमने यह मांग राज्य सरकार को भी भेजी है कि खड़की कैन्टोंमेंट बोर्ड के अधिनियम एक्ट- 10 के मुताबिक खड़की कैन्टोंमेंट एक नागरिक निकाय है जैसे मनपा और पिंपरी-चिंचवड मनपा है, इसलिए कैन्टोंमेंट बोर्ड भी जीएसटी का हिस्सा पाने में भागीदारी रखता है. यह मुद्दा हमने राज्य सरकार के फाइनेंस डिपार्टमेंट में भी भेजा था हमारे अन्य बोड्र्स के अधिकारी इस संदर्भ में राज्य के चीफ सेक्रेटरी से भी मिल चुके हैं और जीएसटी कंपनसेशन में हिस्सेदारी पाने की कोशिशों में लगातार लगे हुए हैं.
सवाल : बोर्ड के कामकाज को और अधिक प्रभावी बनाने की दृष्टि से किन बातों पर अधिक जोर देने की जरूरत आपको महसूस होती है?
रॉबिन बलेजा : वैसे तो कैन्टोंमेंट बोर्ड में और अधिक विकास कार्यों की जरूरत है, इसलिए जो विकास कार्य हमने प्राथमिकता के रूप में चुने हैं उसमें जो ट्रेंचिंग ग्राउंड है उसमें हम काफी सालों से कचरा डंप करते आए हैं और जो एनजीटी के नियम अनुसार गैरकानूनी है. इसलिए हमें एवं हर म्युनिसिपल कॉरपोरेशन को इसको साइंटिफिक तरीके से डिस्पोज करना होगा. उस ग्राउंड पर हमने बायोरेमेडीएशन का प्रोजेक्ट शुरू किया है. ताकि जो जमीन पर पूरा 2 लाख टन कचरा पड़ा हुआ है, उसको प्रोसेसिंग करके उस जमीन को पूरा खाली कर दिया जाए, ताकि वह जमीन और ज्यादा प्रदूषित न हो और वहां आसपास के रहने वाले नागरिकों को इससे कोई समस्या ना उत्पन्न हो. दूसरा हमारे लिए अहम मुद्दा है कि राज्य सरकार से जीएसटी कंपनसेशन जल्द से जल्द मिले, ताकि हमारे विकास कार्यों में और अधिक देरी न हो क्योंकि सारे विकास कार्य तभी हो पाते हैं जब आपके पास एक मजबूत फाइनेंस हो. बिना फाइनेंस के कोई भी विकास कार्य नहीं हो सकता.