पुणे, 2 जून (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)
कमीशन का खेल अब उधारी वसूली करने तक भी पहुंच गया है. अब लोग उधार दी हुई राशि वसूल करने के लिए वसूली एजेंट को 8 से 15% तक कमीशन देते हैं. उधार दी हुई राशि कानूनी हो या गैरकानूनी, पहले जिसने लोन लिया है, उसे वकील मार्फत नोटिस भेजी जाती है. निश्चित अवधि में राशि नहीं लौटाने पर कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा. गिरफ्तारी भी हो सकती है. फिर सजा होगी. इसका नोटिस में बाकायदा उल्लेख होता है. साथ ही लोन या उधार राशि लेने वाले व्यक्ति के घर कुछ गुंडे टाइप लोग वसूली टीम के रूप में भेजे जाते हैं. जो दिनभर लोन लेने वाले व्यक्ति के घर बैठे रहते हैं. इस वसूली पथक में सरकारी विभाग के लोग भी होते हैं. वसूली करने वाले लोग साम, दाम, दंड, भेद का इस्तेमाल करते हैं और दबाव लाते हैं. जब यह एहसास हो जाता है कि उधार दी हुई या लोन दी हुई राशि वापिस मिलने की संभावना नहीं तब फंसी राशि वसूल करने के लिए रिकवरी एजेंट कंपनी की मदद ली जाती है. इस कंपनी को फंसी राशि में से 8 से 15% राशि कमीशन के रूप में दी जाती है.
यह काम नॉन-बैंकिंग कंपनियां, मालमत्ता पुनर्रचना (एआरसी) कंपनियां, लाइसेंसधारक साहूकार, निजी साहूकार, अथवा पहचान वाले व्यक्ति के माध्यम से काम करती हैं. इसका उद्देश्य पुलिस, कोर्ट आदि के झंझट का सामना करना न पड़े, यह होता है. जब यह एहसास हो जाता है कि उधार राशि डूबनेवाली है. इसमें से कुछ तो राशि वापस मिलेगी इस आशा से वसूली एजेंट कंपनी की सहायता ली जाती है. इसके लिए एक निश्चित राशि कमीशन रूप में दी जाती है. रिजर्व बैंक के नियम : फंसी राशि वसूली हेतु भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा कुछ नियम बनाये गये हैं. जिसके अनुसार कर्जदार को सुबह 8 बजे के पहले और शाम 7 बजे के बाद वसूली हेतु फोन नहीं करना चाहिए. लोन या उधारी वसूली के लिए दी हुई सूचनाओं का पालन करें. वसूली एजेंट, कर्जदार को नाजायज नहीं सतायेंगे. वसूली हेतु नाजायज सताने वाले वसूली एजेंट को कंपनी द्वारा रोका जाना चाहिए. लेकिन अक्सर इन नियमों का पालन नहीं किया जाता है.