श्री महालक्ष्मी माता शक्तिपीठ के प्राणप्रतिष्ठा महोत्सव का उत्साहपूर्वक शुभारंभ

जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेेशरानंद सरस्वती महाराज द्वारा मंदिर का उद्घाटन व मंडप प्रवेश

    07-Jul-2024
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मंदिर का उद्घाटन एवं मंडप प्रवेश जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेेशरानंद सरस्वती महाराज द्वारा किया गया.

  
कार्ला, 6 जुलाई (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)
 
  लोनावला के नजदीक कार्ला में ‌‘अग्रवाल ग्लोबल फाउंडेशन‌’ के अंतर्गत ‌‘महाराजा अग्रसेन पैलेस‌’ के प्रांगण में नवनिर्मित ‌‘श्री महालक्ष्मी माता शक्तिपीठ मंदिर‌’ में मूर्तियों की प्राणप्रतिष्ठा निमित्त शनिवार 6 जुलाई को अग्रवाल महिलाओं द्वारा कलश यात्रा निकाली गई. लाल, गुलाबी, पीले वस्त्रों में सुशोभित हो भारी संख्या में घुवालेवाला परिवार एवं अग्रवाल समाज की महिलाएं, पुरुष, युवतियां, बच्चे, बुजुर्ग माथे पर कलश लेकर पैलेस के परिसर में बने श्री महालक्ष्मी मंदिर में पहुंचे. कलश यात्रा में सभी अग्रवाल बंधुओं में भक्ति का जोश देखते ही बन रहा था.
 
 
 
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इस कलश यात्रा में मुंबई से आमंत्रित किए गए भजन गायक एवं कथा व्यास पंडित राजेश मिश्र ने ‌‘यात्रा मंगलयात्रा, यात्रा कलशयात्रा, प्राणप्रतिष्ठा महोत्सव शुभ ये काम है, श्री महालक्ष्मी माता शक्तिपीठ धाम है‌’ इस भजन के माध्यम से सभी अग्रबंधुओं को भक्ति में लीन कर दिया.
 
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 राजेंद्र सागरमल घुवालेवाला, उनकी पत्नी कुसुम एवं बेटे गौरव और बहू राखी
को प्राप्त हुआ स्वामी अविमुक्तेेशरानंद सरस्वती महाराज के चरण पूजन का सौभाग्य.
 
कलश यात्रा के बाद सभी अग्रबंधु मंदिर प्रांगण में पहुंचे जहां मंदिर का उद्घाटन एवं मंडप प्रवेश जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेेशरानंद सरस्वती महाराज द्वारा किया गया. इसके बाद वहां पंडितों के वैदिक मंत्रोउच्चारण के बीच जलभरी और गणेश पूजन किया गया और 108 कलश स्थापित किए गए एवं उनकी पूजा अर्चना की गई. श्री महालक्ष्मी माता शक्तिपीठ मंदिर मुख्य दानदाता राजेंद्र घुवालेवाला और उनके परिवार द्वारा निर्मित है. 7 दिवसीय इस मूर्ति प्राणप्रतिष्ठा समारोह में सर्वप्रथम पूजा अर्चना, शुद्धिकरण एवं मांगिलक कार्यक्रम 11 जुलाई तक किये जाएंगे और फिर 12 जुलाई को मंदिर में मूर्तियों की स्थापना की जायेगी.
 
 
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श्री महालक्ष्मी माता शक्तिपीठ के प्राणप्रतिष्ठा महोत्सव में उत्साही नजर आया घुवालेवाला परिवार, हाथ जोड़
भगवान की पूजन अर्चना में लीन दिखे सभी अग्रबंधु.
   
गुरुवार 11 जुलाई तक मंदिर प्रांगण में नित्य पूजा, वास्तु पूजन, कुंड पूजन, गृह हवन जलाधिवास, सायंकालीन पूजन-आरती, गंधाधिवास, शान्तिक पौष्टिक हवन, मूर्तिपति लोकपाल आवाहन, प्राण सुत्त पाठ, फलाधिवास, तत्वन्यास, स्नपन विधि-81 कलश, यज्ञ, शैय्याधिवास किये जाएंगे और शुक्रवार 12 जुलाई को मुख्य समारोह होगा जिसमें श्री महालक्ष्मी मंदिर में मूर्तियों की प्राणप्रतिष्ठा अहमदाबाद से ज्योतिषाचार्य डॉ. राजेंद्रप्रसाद शुक्ल द्वारा की जायेगी.
 
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लाल, गुलाबी, पीले वस्त्रों में सुशोभित हो एवं कलश को माथे पर लेकर उत्साही दिखीं महिलाएं.
    
इस कार्यक्रम के निमंत्रक राजेंद्र घुवालेवाला (मंदिर डोनर), अशोक गोयल (चेयरमैन), जयकुमार गुप्ता (प्रेसीडेंट), हर्षवर्धन अग्रवाल (एग्जीक्यूटिव प्रेसीडेंट), विनोद मित्तल (प्रोजेक्ट चेयरमैन) द्वारा एवं अग्रवाल ग्लोबल फाउंडेशन, समस्त ट्रस्टीगण एवं समस्त घुवालेवाला परिवार हैं.
 
 
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बाएं से व्यासपीठ पर जगदगुरू से आशीर्वाद लेते हुए राखी एवं गौरव घुवालेवाला.
    
भक्ति एवं सनातनी कार्य के लिए हमेशा तत्पर रहेंगे : गौरव राजेंद्र घुवालेवाला
 
 
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राजेंद्र सागरमल घुवालेवाला के बेटे गौरव राजेंद्र घुवालेवाला ने कहा कि 5 साल से भी पहले से इस मंदिर के निर्माण का कार्य चल रहा है, मेरे पिताजी राजेंद्र सागरमाल इस मंदिर के मुख्य दानदाता हैं. मेरे पिताजी ने पहले 3 मंदिरों का भव्य निर्माण कराया है, यह चौथा मंदिर है. हम मुकुंदगढ़ के रहने वाले हैं, मेरे पिताजी ने वहां 25 साल पुराने मंदिर को नवनिर्मित किया, इसके बाद वहां दुर्गा माता और पंचमुखी हनुमान मंदिर की स्थापना के साथ-साथ हमारी ब्रिजल सती दादी का मंदिर बनाया. अब यह मंदिर भी बन चुका है. हमें हमारा सपना साकार सा लग रहा है. भक्ति एवं सनातनी कार्य के लिए हम हमेशा तत्पर थे, तत्पर हैं तथा तत्पर रहेंगे और हमसे जो बन पड़ेगा हम वह दान करेंगे. इस सात दिवसीय महोत्सव में हमारा पूरा परिवार आया है जिसमें मेरे पिताजी, मेरी माताजी-कुसुम, मेरी पत्नी- राखी, मेरे दोनों बेटियां- युतिका और मायरा, मेरी बहन मेघा देवड़ा, मेरे जीजाजी- अंकुर देवड़ा एवं उनकी बेटी राधा देवड़ा हैं. इसके साथ इस सात दिवसीय कार्यक्रम में मुंबई, पुणे सहित कई शहरों से 4000 से ज्यादा अग्रबंधुओं की आने की संभावनाएं हैं
  
मंदिर भक्ति के साथ-साथ शांति का भी मार्ग होगा : डालचंद गुप्ता
 
 
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अग्रवाल ग्लोबल फाउंडेशन के ट्रस्टी डालचंद गुप्ता ने कहा कि महालक्ष्मी मंदिर हमारी कल्पनाओं से भी बेहतर बना है जो समस्त हिंदुओं के लिए भक्ति के साथ-साथ शांति का भी मार्ग सिद्ध होगा. 5 साल से श्रमिक मंदिर के निर्माण कार्य में लगे हुए थे और आज सभी की मेहनत रंग लाई और इस भव्य-दिव्य मंदिर का निर्माण हो गया. घुवालेवाला परिवार का इस मंदिर निर्माण में सबसे बड़ा योगदान है और इसके लिए हम सभी उनके शुक्रगुजार हैं.
 
हरेक व्यवस्था उच्च : पंडित राजेश मिश्र
 
 
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मुंबई से आमंत्रित भजन गायक, कथा वाचक पंडित राजेश मिश्र ने कहा कि 7 दिनों तक सभी कार्यक्रमों का सूत्रसंचालन मेरे द्वारा किया जाएगा. यहां की हरेक व्यवस्था उच्च है. सभी बुनियादी आवश्यकताएं पैलेस में उपलब्ध हैं. इसके साथ 9 जुलाई को माता की चौकीं कार्यक्रम का आयोजन किया गया है जिसमें बेहद आंनद आने वाला है.
 
 
5000 स्क्वेअर फीट में बनाया गया है मंदिर : सुभाष भोईटे
 
 
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मंदिर के आर्किटेक्ट मुंबई से आए सुभाष भोईटे ने बताया कि कोरोना से पहले से इस मंदिर का कार्य शुरू है. महाराजा अग्रसेन पैलेस में मंदिर 5000 स्क्वेअर फीट में बना है. मंदिर में भक्तों को सभी गर्भगृह के मंदिरों की परिक्रमा करने के लिए मार्ग बनाया गया है, यह महालक्ष्मी का मंदिर है इसलिए मंदिर की परिक्रमा करते समय भक्तों को विष्णुजी के दस अवतारों के दर्शन प्राप्त होंगे. मंदिर के भीतर हर दीवार पर उन्हें ॐ के छाप देखने को मिलेंगे. साथ ही मंदिर के भीतर के खंभों पर भक्तों को अमृत कलश, कमल की बेल, महालक्ष्मी वाहन गजराज और सरस्वती वाहन हंस की नक्काशी देखने को मिलेंगी. साथ ही मंदिर में प्रवेश करते ही भक्तों को गुम्बद की भीतरी दीवारों पर महालक्ष्मी माता की नक्काशियों के दिव्य दर्शन प्राप्त होंगे. मंदिर के भीतर 5 मंदिर हैं इसलिए मंदिर के ऊपर भक्तों को पांच गुम्बद देखने को मिलेंगे जिसमें प्रत्येक गुम्बद के शिखरों पर पीतल के डंडों पर सोनेरी परत लगाकर भगवा झंडे और कलश देखने को मिलेंगे. गुम्मद के भीतर से सूर्य की किरण सीधे मां लक्ष्मी के चरणों पर आएंगी. पूरा मंदिर मकराना मार्बल, वियतनाम मार्बल, आरसीसी सीमेंट, अंबाजी मार्बल और लाल संगमरमर से तैयार किया गया है. इसके साथ बाहरी दीवारों पर राजस्थान से गुलाबी और लाल रंग के सैंड स्टोन की रचनात्मकता देखने को मिलेगी जैसे आयोध्या के रामलला के मंदिर में की गई हैं.