सुप्रीम काेर्ट ने अपनी एक सुनवाई के दाैरान कहा कि शादी का पवित्र बंधन दहेज के कारण साैदा बन गया.विवाह के 4 महीने बाद पत्नी के हत्यारे की जमानत रद्द करते हुए जज ने कहा. दहेज हत्या घिनाैने अपराधाें में से एक, ऐसे अपराध सभ्य समाज पर कलंक, लाेगाें के लालच के कारण विवाह की पवित्रता खत्म हाे रही! शादी के 4 महीने बाद पति की हरकत काे देखते हुए सुप्रीम काेर्ट ने कहा कि विवाह एक पवित्र और महान संस्था है जाे आपसी विश्वास और सम्मान पर आधारित है, लेकिन दहेज की बुराई के कारण यह पवित्र बंधन दुर्भाग्य से एक व्यावसायिक लेन-देन बनकर रह गया है.काेर्ट ने पति की जमानत की अर्जी काे भी खारिज कर दिया.न्यायमूर्ति बी.वी.नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर.महादेवन की पीठ ने कहा कि दहेज हत्या केवल एक व्यक्ति के विरुद्ध नहीं बल्कि समग्र समाज के विरुद्ध अपराध है.बेंच ने कहा, यह न्यायालय इस तथ्य काेनजरअंदाज नहीं कर सकता कि विवाह, अपने वास्तविक स्वरूप में, आपसी विश्वास, साहचर्य और सम्मान पर आधारित एक पवित्र और महान संस्था है.
हालांकि, हाल के दिनाें में, यह पवित्र बंधन दुर्भाग्य से एक मात्र व्यावसायिक लेन-देन बनकर रह गया है. दहेज की बुराई काे (भले ही) अक्सर उपहार या स्वैच्छिक भेंट के रूप में छिपाने की काेशिश की जाती है, लेकिन वास्तव में यह सामाजिक प्रतिष्ठा प्रदर्शित करने और भाैतिक लालच काे शांत करने का एक साधन बन गई है.बेंच ने कहा, दहेज हत्या की घटना इस सामाजिक कुप्रथा की सबसे घृणित अभिव्यक्तियाें में से एक है, जहां एक युवती का जीवन उसके ससुराल में ही समाप्त कर दिया जाता है और वह भी उसकी किसी गलती के कारण नहीं, बल्कि केवल दूसराें के अतृप्त लालच काे संतुष्ट करने के लिए.अदालत ने कहा कि इस तरह के जघन्य अपराध मानवीय गरिमा की जड़ पर प्रहार करते हैं और अनुच्छेद 14 और 21 के तहत समानता और सम्मानजनक जीवन की संवैधानिक गारंटी का उल्लंघन करते ह