अनुराधा नक्षत्र के शुभ मुहूर्त पर गौरी का आवाहन करें

30 Aug 2025 14:52:19
 
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पुणे, 29 अगस्त (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)

गणेशोत्सव में गणपति बाप्पा के साथ गौरी का आगमन होता है. गौरी के स्वागत के लिए महिलाएं तैयारी में लगी हैं गौरी के सुंदर, आकर्षक मुखौंटों सहित सजावटी सामग्रियों और विभिन्न प्रकार के आभूषणों से बाजार सज गया है. गौरी के स्वागत के लिए घर-घर में उत्साह और उल्लास का माहौल दिखाई दे रहा है. रविवार (31 अगस्त) को गौरी का (महालक्ष्मी) अनुराधा नक्षत्र के शुभ मुहूर्त पर आह्वान करें. महात्मा फुले मंडई, तुलसीबाग, बोहरी आली समेत शहर के कई जगहों पर गौरी के आकर्षक मुखौटों वाले स्टॉल और दुकानें लग गई है. पीतल धातु और शाडू मिट्टी से बने आकर्षक मुखौटे महिलाओं का ध्यान खींच रहे हैं. गौरी के स्वागत के लिए घरों को सजाने की तैयारियां शुरू हैं. कई परिवार अपने रीति-रिवाजों और परंपराओं के अनुसार गौरी की स्थापना करते हैं. आभूषण की दुकानों में भी गौरी के लिए कई तरह के आभूषण जैसे कुड़ी, ठुशी, मोहनमाल, मंगलसूत्र, मोतियों का हार, नथ, बुगड़ी, चूड़ियां आ गई हैं. आकर्षक शाडू मुखौटें भी हैं. गौरी के लिए आकर्षक डिजाइन की साड़ियां भी आई हैं. कुछ नागरिक परंपरा के अनुसार नौवारी साड़ियां भी खरीदते हैं. मुखौटे सहित सजावटी सामग्री और आभूषण का पूरा सेट भी बिक्री के लिए उपलब्ध है. गौरी के प्लास्टर ऑफ पेरिस के मुखौटे की कीमत डेढ़ हजार रुपये है तो शाडू मुखौटो की किंमत 2,500 रुपये से 5,000 रुपये तक है. गृहिणी स्वाति गिजरे ने बताया, हमारे यहां परंपरा के अनुसार गौरी की स्थापना होती है. हम शाडू के मुखौटे स्थापित करते हैं. हम हर साल देवी के लिए एक नई साड़ी खरीदते हैं. गृहिणी श्रेया पिंगले ने बताया कि हर साल गौरी उत्साह के साथ आती हैं. परंपरा के अनुसार, विभिन्न प्रकार की सब्जियों का प्रसाद दिखाया जाता है.
 
गौरी के स्वागत का मुहूर्त सुबह से शाम 5:27 बजे तक
गौरी आहवान रविवार (31 अगस्त) को अनुराधा नक्षत्र में हो रहा है. अनुराधा नक्षत्र रविवार सुबह से शाम 5:27 बजे तक है. इसलिए इसी समय गौरी आह्वान करना चाहिए. सोमवार (1 सितंबर) गौरी पूजन और भोजन का दिन है. इस दिन रीति-रिवाज और परंपरा के अनुसार गौरी को विभिन्न सब्जियों का भोजन अर्पित करने की प्रथा है.मंगलवार (2 सितंबर) को मूल नक्षत्र में गौरी का विसर्जन करें. मूल नक्षत्र सुबह से रात 9:57 बजे तक है, इसलिए गौरी का विसर्जन इसी समय करना चाहिए. यह जानकारी पंचांगकर्ता मोहन दाते ने दी. दाते ने बताया कि महाराष्ट्र में गौरी पूजन को महालक्ष्मी पूजन भी कहा जाता है. गौरी पूजन के अवसर पर, कुछ लोग एक कटोरे में 5 या 7 कंकड़ लेकर उनकी पूजा करते हैं. साथ ही, कुछ लोग तांबे पर मुखवटा रखकर उनकी पूजा करते हैं. अनाज के ढेर पर भी मुखौटे रखकर पूजा करने की प्रथा है. गौरी को भरजरी साडियां पहनाई जाती है, आभूषणों से सुसज्जित किया जाता है और उनकी पूजा की जाती है. गौरी का उत्सव तीन दिनों तक मनाने का भी रिवाज कई जगहों पर है, अर्थात्‌‍ सप्तमी, अष्टमी और नवमी को यह उत्सव मनाया जाता है. - पंचांगकर्ता मोहन दाते
 
 
 
 
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