भांडारकर इंस्टीट्यूट का कार्य तारीफ के काबिल

10 Jan 2026 14:19:17

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पुणे, 9 जनवरी (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)

पुरातत्त्व (आर्कियोलॉजी) और प्राचीन दस्तावेजों के महत्व को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार से भांडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट की स्वायत्तता (ऑटोनॉमी) बनाए रखते हुए अधिक से अधिक सहयोग और वित्तीय सहायता सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा. यह जानकारी राज्यसभा सांसद एवं शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल मामलों की संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने दी. इस समिति के सदस्य सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने भांडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट का दौरा किया. इस प्रतिनिधिमंडल में राज्यसभा सदस्य सिकंदर कुमार, भीम सिंह, घनश्याम तिवारी, सुनेत्रा पवार और स्वाति मालीवाल के साथ-साथ लोकसभा सदस्य दर्शन सिंह चौधरी, जितेंद्र कुमार दोहरे और हेमांग जोशी उपस्थित थे. सभी सदस्यों का स्वागत इंस्टीट्यूट की नियामक मंडल के अध्यक्ष अभय फिरोदिया, सर्वसाधारण सभा के अध्यक्ष सदानंद फड़के, कार्यकारी मंडल के अध्यक्ष भूपाल पटवर्धन, ट्रस्टी प्रदीप रावत, प्रो. सुधीर वैशंपायन, प्रदीप आपटे, मनोज एरंडे, श्रीनिवास कुलकर्णी, मंदार जोग आदि ने किया. भांडारकर इंस्टीट्यूट के कार्यों की प्रशंसा करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि एक सदी से भी अधिक समय से कार्यरत इस संस्थान में कभी भी सरकारी हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए और इसकी स्वायत्तता बनी रहनी चाहिए्‌‍. संस्थान ने दुर्लभ प्राचीन दस्तावेजों और पांडुलिपियों का संरक्षण किया है, जिनका उपयोग पूरी दुनिया कर सकती है. इतिहास को सही और सत्य रूप में प्रस्तुत करने के लिए संस्थान को और अधिक कार्य करने की आवश्यकता है, जिसके लिए केंद्र सरकार पर्याप्त कोष उपलब्ध कराएगी. संस्थान के संस्थापक डॉ. भांडारकर तथा भारतरत्न पं. वा. काणे का कार्य अद्वितीय है. इस अवसर पर इंस्टीट्यूट की ओर से सभी सदस्यों का विशेष रूप से सम्मान किया गया. प्रतिनिधिमंडल ने इंस्टीट्यूट में संरक्षित दुर्लभ पांडुलिपियों, इंस्टीट्यूट के प्रकाशनों, पुस्तकालय, भारतविद्याएक डिजिटल प्लेटफॉर्मतथा ओपन ऑडिटोरियम (एम्फीथिएटर) का निरीक्षण किया. इंस्टीट्यूट के रजिस्ट्रार डॉ. श्रीनंद बापट ने कार्यक्रम का सूत्रसंचालन किया और अंत में धन्यवाद ज्ञापन किया.  
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