स्वास्थ्य, आर्थिक सुरक्षा, ईमानदारी से जीवन सफल होता है

11 Jan 2026 15:10:11
 

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पुणे, 10 दिसंबर (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)
जीवन में सफलता केवल एक क्षेत्र में उपलब्धि से नहीं मापी जा सकती, बल्कि स्वास्थ्य, आर्थिक सुरक्षा, पेशेवर ईमानदारी और सामाजिक उत्तरदायित्व. इन सभी के संतुलन से ही एक सार्थक और स्थिर जीवन का निर्माण होता है. समाज के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत अनुभवी पेशेवरों ने अपने-अपने अनुभवों के माध्यम से यह साझा किया है कि वे किस प्रकार निरंतर परिश्रम, नैतिक मूल्यों, सीखने की ललक और मानवीय संवेदना से न केवल व्यक्तिगत उन्नति संभव है, बल्कि समाज को भी सकारात्मक दिशा दी जा सकती है. ऐसे ही पेशवर लोगों से दै.‌‘आज का आनंद' के लिए प्रो. रेणु अग्रवाल ने बातचीत की. प्रस्तुत हैं उनकी बातचीत के प्रमुख अंशप्रो. रेणु अग्रवाल (मो. 8830670849)
 स्वास्थ्य, आर्थिक सुरक्षा, ईमानदारी से जीवन सफल होता है
वित्तीय स्वास्थ्य सुरक्षित भविष्य की आधारशिला स्वास्थ्य जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति है. यह बात हम सभी जानते हैं. लेकिन स्वास्थ्य के बाद यदि कोई तत्व जीवन में स्थिरता, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता प्रदान करता है, तो वह है धन. एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में मेरा अनुभव बताता है कि लोग शारीरिक स्वास्थ्य पर तो ध्यान देते हैं, परंतु वित्तीय योजना को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं, जो दीर्घकाल में गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है. मैं समाज को यह संदेश देना चाहता हूँ कि धन का सही प्रबंधन केवल कमाने से नहीं, बल्कि समझदारी से खर्च करने, बचाने और निवेश करने से होता है. यदि हम अपनी मासिक आय का एक निश्चित हिस्सा योजनाबद्ध ढंग से बचाएं और सही स्थान पर निवेश करें, तो न केवल भविष्य सुरक्षित होता है बल्कि मानसिक तनाव भी कम होता है. जिस प्रकार स्वस्थ शरीर के बिना जीवन अधूरा है, उसी प्रकार सही वित्तीय योजना के बिना सुरक्षित भविष्य संभव नहीं. अतः आज ही अपनी आय और खर्चों का मूल्यांकन करें तथा एक स्मार्ट निवेश योजना बनाएं. क्योंकि स्वास्थ्य के बाद वास्तविक सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और सम्मान वित्तीय स्वतंत्रता से ही प्राप्त होता है.
- सी.ए. आदित्य चरखा, छत्रपति संभाजीनगर
 


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नर्सिंग सेवा, संवेदना और विज्ञान का संगम
मैंने जालना मिशन हॉस्पिटल, स्कूल ऑफ नर्सिंग से शिक्षा प्राप्त की और वर्तमान में एक अस्पताल में नर्सिंग ऑफिसर के रूप में कार्यरत हूँ. यदि डॉक्टर अस्पताल का मस्तिष्क हैं, तो नर्स उसका हृदय होती है. मस्तिष्क विफल हो जाए तो हृदय कुछ समय कार्य कर सकता है, लेकिन हृदय रुक जाए तो संपूर्ण प्रणाली ठप हो जाती है. मैं समाज को यह संदेश देना चाहता हूँ कि नर्सिंग केवल सेवा नहीं, बल्कि करुणा, विज्ञान और विशेषज्ञता का उच्च-स्तरीय पेशा है. नर्सें जीवन-रक्षक, शिक्षक और स्वास्थ्य प्रणाली की रीढ़ होती हैं. समाज को चाहिए कि वह नर्सिंग पेशे की क्षमता, गरिमा और स्वायत्तता को पहचाने. यह पेशा न केवल मरीजों को जीवनदान देता है, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की गुणवत्ता को भी सुदृढ़ बनाता है .इसे सही अर्थों में कला और विज्ञान का संगम कहा जा सकता है.
- सचिन लाजरस अस्वले, जालना
 

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परिश्रम, धैर्य और सौहार्दपूर्ण व्यवहार वकीली पेशे का मूल-मंत्र होता है
मेरी आयु 45 वर्ष है. वर्ष 2004 में लॉ की डिग्री प्राप्त करने के बाद मैंने अनेक सुप्रसिद्ध वकीलों के साथ प्रैक्टिस प्रारंभ की. हमारे परिवार में वकालत का कोई पूर्व इतिहास नहीं था, किंतु नियमित अभ्यास और कड़ी मेहनत से मैंने इस क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई. अन्य व्यवसायों की तरह वकीली पेशे में भी अनेक चुनौतियाँ आती हैं, परंतु सामाजिक संबंधों और मित्रों के सहयोग से हर समस्या का समाधान संभव हो जाता है. जो विद्यार्थी इस क्षेत्र में आना चाहते हैं, उन्हें मेरा यही संदेश है कि अवसर अनेक हैं. आवश्यकता केवल परिश्रम, धैर्य और सौहार्दपूर्ण व्यवहार की है. आज तकनीक का युग है, परंतु हमें पूरी तरह तकनीक पर निर्भर नहीं रहना चाहिए. हमारी संस्कृति और परंपराएँ हमारी अमूल्य विरासत हैं. साथ ही, राष्ट्रप्रेम और संविधान के प्रति सम्मान प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है. हमारा संविधान वेिश के सर्वोत्तम संविधानों में से एक है. इसका सम्मान करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है.
- रविकिरण गुलाबराव घोड़े, नक्षत्रवाड़ी, तहसील-चिखली, जिला-बुलढाणा
 

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स्वस्थ शरीर और शांत मन के बिना जीवन में सफलता नहीं
मैं 58 वर्ष की हूं, मेरे पति सेवानिवृत्त आर्मी अधिकारी हैं. मेरा बेटा भारतीय सेना में डॉक्टर है और बेटी बैंक में कार्यरत है. मेरा परिवार ही मेरी प्रेरणा और शक्ति है. मैं एक वेलनेस कोच होने के साथसाथ गृहिणी भी हूँ. मेरा उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि स्वस्थ शरीर और शांत मन के बिना जीवन की कोई भी सफलता पूर्ण नहीं हो सकती. इस पेशे में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि लोग स्वास्थ्य को गंभीरता से नहीं लेते. अपने जीवन के अनुभवों के माध्यम से मैं यह बताने का प्रयास करती हूँ कि स्वास्थ्य के बिना हर उपलब्धि अधूरी रह जाती है. विशेषकर छात्रों और महिलाओं के लिए मेरा संदेश हैशिक्षा आवश्यक है, लेकिन स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है. स्वयं को शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से सशक्त बनाइए. एक स्वस्थ और खुश महिला ही परिवार को संस्कार देती है और समाज को दिशा प्रदान करती है.
-आभा सिंह, वेलनेस कोच
 
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मुकदमे में धैर्य तथा दृढ़ता और भावनात्मक संतुलन अत्यंत आवश्यक

युवा पीढ़ी को वकील बनना चाहिए या नहींयह उनके व्यक्तिगत लक्ष्यों, रुचियों और जीवन की प्राथमिकताओं पर निर्भर करता है. वकालत एक बौद्धिक रूप से समृद्ध और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाला पेशा है, जो निरंतर सीखने का अवसर प्रदान करता है. हालाँकि, इस क्षेत्र में प्रारंभिक वर्षों में वित्तीय अस्थिरता, लंबे कार्य घंटे और मानसिक तनाव जैसी चुनौतियाँ भी होती हैं, विशेषकर पहली पीढ़ी के वकीलों के लिए. मुकदमेबाजी में धैर्य, दृढ़ता और भावनात्मक संतुलन अत्यंत आवश्यक है.इस पेशे को अपनाने से पहले प्रत्येक विद्यार्थी को आत्ममंथन करना चाहिएक्या आप लगातार सीखने के लिए तैयार हैं? क्या आप त्वरित आय के बजाय अनुभव को प्राथमिकता दे सकते हैं? और क्या आप नैतिकता के साथ समाज की सेवा करना चाहते हैं? यदि उत्तर हाँ है, तो वकालत एक सम्मानजनक और सार्थक करियर बन सकती है.
-एडवोकेट जाकी शेख, डिस्ट्रिक्ट एवं हाईकोर्ट वकील
 

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चिकित्सा सेवा : समर्पण, संयम और निरंतर सीख का क्षेत्र
मैं एमबीबीएस, डीजीओ (स्त्रीरोग विशेषज्ञ) हूँ और वर्ष 2013 से चिकित्सा क्षेत्र में कार्यरत हूँ. मेरा मुख्य उद्देश्य महिलाओं को उनके स्वास्थ्य के प्रति सही और महत्वपूर्ण जानकारी देना तथा उन्हें स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाना है. इस क्षेत्र में अनेक समस्याएँ आती हैं, किंतु परिवार और कार्य-जीवन संतुलन से कठिनाइयों को पार किया जा सकता है. जो विद्यार्थी डॉक्टर बनना चाहते हैं, उन्हें मेरी सलाह हैजीवन भर सीखने के लिए तैयार रहें और कभी भी हौसला कम न होने दें. स्वस्थ जीवन के लिए चीनी, पैक्ड फूड, मैदा, कोल्ड ड्रिंक और सभी प्रकार के व्यसनों से दूरी बनाए रखें. महिलाओं को अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि पूरे परिवार की सेहत उनके हाथों में होती है. केवल बीमारी का इलाज न करें, मरीज को समझें और उनका मनोबल बढ़ाएँ. चिकित्सा क्षेत्र निरंतर बदल रहा हैसीखते रहना, धैर्य रखना और अपने उद्देश्य को याद रखना ही इस यात्रा की कुंजी है.
- डॉ. अपर्णा ज्ञानेेशर थोटे, छत्रपति संभाजीनग

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