हिन्दी और उर्दू खड़ी बाेली की बेटियां : जावेद अख्तर

13 Jan 2026 22:40:51
 
 

javed 
सिनेमा जगत के दिग्गज कविगीतकार जावेद अख्तर ने कहा कि बांग्लादेश का इतिहास बताता है कि लाेग अपनी मातृभाषा बांग्ला के लिए खड़े हुए. मुस्लिम हाेने के बावजूद उन्हाेंने उर्दू काे अपनाना जरूरी नहीं समझा, क्याेंकि भाषा आस्था से नहीं, पहचान से जुड़ी हाेती है. हिंदी और उर्दू की व्याकरण एक ही है और यह बहुत कम देखने काे मिलता है. ये दाेनाें एक ही मां खड़ी बाेली की बेटियां हैं. अख्तर ने कहा कि किसी भाषा काे किसी धर्म से जाेड़ना सही नहीं है. भाषा का संबंध धर्म से नहीं, बल्कि क्षेत्र और समाज से हाेता है.यूराेप इसका बड़ा उदाहरण है, जहां एक ही धर्म के बावजूद अलग-अलग भाषाएं बाेली जाती हैं.
 
गुलाबी शहर जयपुर में सांस्कृतिक रंगाें से सजा जनवरी ऑफ जयपुर उत्सव जयमहल पैलेस में भव्य अंदाज में आयाेजित हुआ, जहां साहित्यऔर सिनेमा जगत के दिग्गज कविगीतकार जावेद अख्तर और सुप्रसिद्ध कथक नृत्यांगना और पं. बिरजू महाराज जी की पाैत्री शिंजिनी कुलकर्णी के बीच राेचक संवाद ने दर्शकाें काे मंत्रमुग्ध कर दिया. इस दाैरान जावेद अख्तर ने अपनी मशहूर नज़्म मैं भूल जाऊं सुनाकर सभागार में तालियाें की गूंज भर दी. जावेद अख्तर ने कहा कि उर्दू का एक भी वाक्य ऐसा नहीं है, जिसमें हिंदी शामिल न हाे.जाे इंसान उर्दू ज्यादा नहीं जानता, न पढ़ता है, न समझता है और उसे उर्दू या उर्दू शायरी की शुरुआत करनी है, ताे पहले क्लासिकल शायराें के बजाय कंटेम्परेरी शायराें काे पढ़िए.
Powered By Sangraha 9.0