कोथरुड, 13 जनवरी (आ. प्र.) स्वामी विवेकानंद ने 1893 में वर्ल्ड रिलिजन कॉन्फ्रेंस में भविष्यवाणी की थी कि विज्ञान और अध्यात्म के समन्वय से ही दुनिया में खुशी, संतोष और शांति आएगी. 21वीं सदी में, मेरी भारत माता ज्ञान का मंदिर और वेिश गुरु बनकर उभरेगी, ऐसा विचार एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के संस्थापक अध्यक्ष प्रो. डॉ. वेिशनाथ दा. कराड ने व्यक्त किए. स्वामी विवेकानंद की 164वीं जयंती समारोह में वे बोल रहे थे. एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी में बड़े उत्साह के साथ आयोजित इस कार्यक्रम में एमआईटी डब्ल्यूपीयू के कार्याध्यक्ष डॉ. राहुल वेिशनाथ कराड, कुलपति डॉ. आर. एम. चिटणीस, डॉ. संजय उपाध्ये, डॉ. मिलिंद पात्रे, डॉ. हितेश जोशी और डॉ. भार्गव बिराडी मौजूद थे. वेिश शांति के लिए योगदान देने वाले स्टूडेंट्स कृष्णा पाटिल, दक्षा उपासनी, निधि पानवाला, धैर्य अग्रवाल, भारवि चौधरी, रुद्राक्ष सुतार, अदिति खुराना, श्रेयस जोशी, हर्ष मुथा और अथर्व लोखंडे को स्टूडेंट पीस एंबेसडर से कार्यक्रम में सम्मानित किया गया. डॉ. आर. एम. चिटणीस ने कहा, देश के युवाओं को स्वामी के विचारों से प्रेरित करने के लिए यह दिन बहुत महत्वपूर्ण है. चूंकि युवाओं की जिम्मेदारी है, इसलिए उन्हें स्वामीजी के दिखाए रास्ते पर चलना चाहिए. डॉ. संजय उपाध्ये, डॉ. मिलिंद पात्रे ने भी विचार व्यक्त किए. कार्यक्रम का संचालन छात्र वैभवी मैड और शौर्य शर्मा ने किया. डॉ. भार्गव बिराडी ने आभार व्यक्त किया.