र्सिफ आदमी काे छाेड़ कर सभी पशु प्रतिपल अपनी संवेदना काे संभालते हैं.अगर तुम्हारा कुत्ता भी बीमार है, खाने से इनकार कर देगा. लेकिन बीमारी में भी तुम खाए चले जाते हाे. तुम्हें इतना भी बाेध नहीं है जितना तुम्हारे कुत्ते काे है.अगर कुत्ता बीमार अनुभव कर रहा है, ाैरन जाकर घास खाकर वमन कर देगा, उलटी कर देगा. क्याें? क्याेंकि जब शरीर रुग्ण है तब जरा सा भी भाेजन शरीर में घातक है. जब शरीर रुग्ण है ताे सारे शरीर की ऊर्जा शरीर काे ठीक करने में लगनी चाहिए, भाेजन के पचाने में नहीं. क्याेंकि यह इमरजेंसी है, यह घटना संकटकालीन है. भाेजन अभी नहीं दिया जा सकता, क्याेंकि भाेजन काे पचाने में बड़ी शक्ति लगती है.इसीलिए ताे जब तुम भाेजन करते हाे ताे तत्क्षण नींद आने लगती है भाेजन के बाद. क्याेंकि मस्तिष्क जिस शक्ति से काम करता था वह शक्ति भी पेट ने वापस बुला ली.
पेट ने कहा कि अभी पचाना जरूरी है. सब चीजें गैर-जरूरी हाे जाती हैं, क्याेंकि भाेजन इतनी बड़ी जरूरत है, उससे जीवन चलता है. पेट सर्वाधिक महत्वपूर्ण है. जब पेट काे जरूरत न हाे तब वह शक्ति देता है, कहीं भी उसका उपयाेग कर लाे. लेकिन जब पेट काे जरूरत है तब सब तरफ से शक्ति काे खींच लेता है. इसीलिए ताे भाेजन करने के बाद मन हाेता है कि थाेड़ा लेट जाएं. क्याें ऐसा मन हाेता है? क्याेंकि पेट ने सब शक्ति खींच ली; हाथ-पैर ढीले हाे गए. खाने के बाद तुम ठीक से साेच नहीं सकते; नींद आती है. विद्यार्थी जानते हैं परीक्षा के दिनाें में कि अगर पढ़ना हाे ताे खाना मत खाओ.चाय पी लाे, कुछ भी और कर लाे, लेकिन भाेजन मत डालाे शरीर में ज्यादा.ताे ही पढ़ पाओगे. क्याेंकि मस्तिष्क काे तभी शक्ति मिलती है जब शरीर का पचाने का काम बंद रहता है.
बीमारी में काेई जानवर खाना नहीं खाता, र्सिफ आदमी काे छाेड़ कर. बीमारी में सभी जानवर उपवास करते हैं, र्सिफ आदमी काे छाेड़ कर. और स्वस्थ दशा में काेई जानवर कभी उपवास नहीं करता, र्सिफ आदमी काे छाेड़ कर. तुम आदमी से ज्यादा पागल जानवर न खाेज सकाेगे.स्वस्थ हालत में उपवास उतना ही गलत है जितना अस्वस्थ हालत में भाेजन. जब तुम स्वस्थ हाे तब ताे भाेजन की जरूरत है; तब अगर तुम शरीर काे तड़पाओगे ताे नुकसान कर रहे हाे. जब तुम अस्वस्थ हाे तब भाेजन की जरूरत नहीं है.लेकिन लाेग नियम से चलते हैं. जैन हैं; उनका पर्यूषण आ गया. अब ये पर्यूषण ताे बंधे हुए दिन हैं; हर वर्ष भादाें में आ जाते हैं. अब दस दिन का उपवास चलेगा.हाे सकता है, लाख आदमी उपवास करें ताे दाे-चार काे शायद ये दिन ठीक पड़ें, संयाेगवश इन दिनाें में ही उनकी हालत उपवास के याेग्य हाे. लेकिन बाकी जाे लाख करेंगे, वे ताे कष्ट में पड़ेंगे.अपना पर्यूषण तुम्हें खाेजना पड़ेगा.साल में कभी जब तुम्हारी स्थिति उपवास के याेग्य हाे तब तुम्हारा पर्यूषण है. काेई दिन बांधे नहीं हाे सकते. और हर आदमी के लिएएक ही नियम नहीं हाे सकता.
छाेटे-छाेटे बच्चे तक जाेश में आ जाते हैं, पर्यूषण के दिन में उपवास कर लेते हैं. क्याेंकि उनकाे बड़ी प्रशंसा मिलती है.सब कहते हैं, कितना गजब का बच्चा है, अभी इतनी उम्र और उपवास कर रहा है! बड़े-बड़े नहीं कर पा रहे, और यह कर रहा है! इसी बकवास में बच्चा बुद्धू बन जाता है; अकड़ में कर जाता है. अब बच्चे काे उपवास की बिल्कुल जरूरत नहीं है; बूढ़ाें काे जरूरत हाे सकती है.बच्चे काे उपवास ताे घातक हाे सकता है.दस दिन भाेजन न देने का मतलब बच्चे के मस्तिष्क में कुछ तंतु सदा के लिए टूट सकते हैं, जिनकाे वह िफर कभी पूरा नहीं कर पाएगा. लेकिन उनका हिसाब काैन रखे? और काैन समझाए नासमझाें काे कि तुम क्या कर रहे हाे? बच्चे काे ताे बिलकुल उपवास की जरूरत नहीं है. बूढ़े कर लें, चलेगा.