मुफ्त कानूनी मदद का दर्जा अच्छा होना चाहिए

15 Jan 2026 14:26:05
  
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पुणे, 14 जनवरी (आ. प्र.)

जरूरतमंदों को दी जाने वाली मुफ्त कानूनी मदद का दर्जा अच्छा होना चाहिए. यह विचार सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ती अतुल शरचंद्र चांदुरकर ने व्यक्त किए. लॉ कॉलेज के एक प्रोग्राम में वे बोल रहे थे. आईएलएस लॉ कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल और इंडियन लॉ सोसाइटी के पूर्व सेक्रेटरी, प्रो. डॉ. सत्यरंजन पुरुषोत्तम साठे की याद में, रिमेम्बरिंग एस.पी.साठे प्रोग्राम का आयोजन किया गया था. यह प्रोग्राम का 20वां साल है और इस साल के प्रोग्राम में, 10 जनवरी को क्लिनिकल लीगल एजुकेशन एंड एक्सेस टू जस्टिस इन इंडिया: स्ट्रेंथनिंग लीगल एड सेंटर्स थ्रू कम्युनिटी एंगेजमेंट एंड लीगल रिफॉर्म टॉपिक पर एक नेशनल लेवल का सेमिनार ऑर्गनाइज किया गया था. सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ती अतुल शरचंद्र चांदुरकर और साउथ अफ्रीका के सुप्रीम कोर्ट ऑफ अपील के न्यायमूर्ती डॉ. अविनाश गोविंदजी कार्यक्रम में प्रमुख अतिथी के रूप में उपस्थित थे. इस साल, यह कार्यक्रम एक इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन स्विसएड के साथ मिलकर आयोजित किया गया था. न्यायमूर्ती अतुल शरचंद्र चांदुरकर ने जशरतमंदों को मुफ्त कानूनी मदद का दर्जा अच्छा होना चाहिए इस पर अपने संबोधन में जोर दिया. न्यायमूर्ती डॉ. अविनाश गोविंदजी ने कहा कि मुफ्त कानूनी मदद देना न सिर्फ कानूनी हिस्सा है, बल्कि कॉन्स्टिट्यूशनल अधिकारों और कॉन्स्टिट्यूशनल प्रोसेस का भी एक जशरी हिस्सा है. डॉ. सुवर्णा निलख ने आईएलएस लॉ कॉलेज के फ्री लीगल एडवाइस सेंटर के पांच दशकों के सफर और अचीवमेंट्स के बारे में जानकारी दी. इस मौके पर इस सेंटर के काम को रिव्यू करने वाली एक डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई. डॉ. वर्षा खंडागले ने ‌‘निर्धार समानतेचा' प्रोग्राम पेश किय. प्रिंसिपल डॉ. दीपा पातुरकर ने आए हुए लोगों का स्वागत किया.  
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