लद्दाख, कारगिल सिर्फ सीमाएं नहीं, भारत की आत्मा हैं : कविंदर गुप्ता

15 Jan 2026 14:43:07
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कात्रज, 14 जनवरी (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)

 लद्दाख और कारगिल केवल भारत की सीमाएं नहीं हैं, बल्कि भारत की आत्मा हैं. लद्दाख में रहने वाला व्यक्ति अकेला नहीं होता, बल्कि पूरे भारत का प्रतिबिंब उसमें समाया होता है. इसलिए भारत और लद्दाख-कारगिल का संबंध सदैव अटूट रहा है, ऐसा प्रतिपादन लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने किया. सरहद, पुणे की ओर से लद्दाख फेस्टिवल का आयोजन किया गया था. इसके अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली विभूतियों को कारगिल गौरव नेशनल अवॉर्ड 2025 उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता के हाथों प्रदान किया गया. इस अवसर पर मंच पर पुणे के विभागीय आयुक्त चंद्रकांत पुलकुंडवार, लद्दाख की प्रथम महिला बिंदु गुप्ता, सरहद के संस्थापक अध्यक्ष संजय नहार, सौ. सुषमा नहार, अर्हम इंस्टीट्यूट के संचालक शैलेश पगारिया, संवाद फाउंडेशन के संजीव शहा सहित अनेक गणमान्य उपस्थित थे. इस समारोह में कॉसमॉस बैंक के अध्यक्ष डॉ. प्रल्हाद कोकरे, मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) शशिकांत पित्रे, केसरी टूर्स की संचालिका झेलम चौबल, वरिष्ठ पत्रकार राजीव साबडे, वरिष्ठ वास्तुविद दिलीप काले, सामाजिक कार्यकर्ता राज देशमुख, निर्भय भारत फाउंडेशन के संचालक तरुण उत्पल तथा राज्य सरकार के मुख्यमंत्री वैद्यकीय कक्ष प्रमुख मंगेश चिवटे को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया. कविंदर गुप्ता का विशेष रूप से पुणेरी पगड़ी, शाल और छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा भेंट कर सम्मान किया गया. कविंदर गुप्ता ने आगे कहा कि लद्दाख भावनात्मक रूप से भारत से अभिन्न रूप से जुड़ा हुआ है. भौगोलिक दृष्टि से सर्दियों के कारण यह क्षेत्र कुछ समय के लिए अलग-थलग हो जाता है, फिर भी भारत और लद्दाख का रिश्ता अटूट है. लद्दाख के सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास के अनेक कार्य चल रहे हैं और शिक्षा, खेल सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति हो रही है. इसमें सरहद जैसी संस्थाओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है. उपराज्यपाल बनने के बाद मैं सबसे पहले कारगिल जाकर वहां के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने गया था और उनके बलिदान को नमन किया. क्योंकि राष्ट्र की रक्षा केवल युद्ध के मोर्चे पर ही नहीं होती, बल्कि नागरिकों की सहभागिता और सहयोग से भी होती है. बिना किसी स्वार्थ के इन नागरिकों ने कारगिल युद्ध के दौरान हमारी सेना को बड़ी सहायता दी. प्रस्तावना करते हुए संजय नहार ने सरहद की यात्रा का अवलोकन प्रस्तुत किया. उन्होंने कहा कि सरहद ने पिछले कई वर्षों से सीमावर्ती क्षेत्रों में सराहनीय कार्य किया है और यह कार्य भविष्य में भी निरंतर जारी रहेगा. शीघ्र ही पुणे में लद्दाख भवन और कारगिल भवन का निर्माण किया जाएगा. पुणे में मिनी कश्मीर विकसित करने का प्रयोग भी आरंभ किया गया है. काश्मीर की युवती शमीमा अख्तर द्वारा प्रस्तुत ङ्गमाझे माहेर पंढरीफ और ‌‘वंदे मातरम' गीतों को श्रोताओं ने उत्स्फूर्त सराहना दी. इस अवसर पर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की संस्कृति को दर्शाने वाले नृत्यों की प्रस्तुति भी की गई. पुरस्कार प्राप्त गणमान्य व्यक्तियों ने अपने प्रतिनिधिक विचार व्यक्त किए. सरहद के ट्रस्टी शैलेश वाडेकर ने आभार व्यक्त किया.  
 
आतंकवाद मानवता का शत्रु : चंद्रकांत पुलकुंडवार

चंद्रकांत पुलकुंडवार ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे क्षेत्र देश का गौरव हैं. देश के प्रत्येक नागरिक को इन पर गर्व है. सरहद के माध्यम से इन क्षेत्रों में वर्षों से जो निरंतर कार्य किया जा रहा है, वह अद्वितीय है. आतंकवाद मानवता का शत्रु है. विस्तारवाद का खतरा आने वाले समय में बढ़ सकता है, इसलिए देश के नागरिकों का एकजुट होकर खड़ा होना आवश्यक है. हम एक हैं, इस भावना को मजबूत करने के लिए कश्मीर और लद्दाख में निरंतर जाना चाहिए.  
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