आगामी लाेकसभा और विधानसभा चुनावाें की दृष्टि से विपक्ष काे झटका देने वाली इस जीत से केंद्र, राज्य और मनपा में ‘ट्रिपल इंजन’ सरकार के कारण आने वाले समय में शहर में भाजपा का दबदबा बना रहने वाला है.यह जीत प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में पुणे शहर के दूरदर्शी विकास की जीत है, जिसमें पुणेकराें ने विपक्ष के भ्रामक नैरेटिव काे खारिज कर दिया है. भाजपा द्वारा जारी संकल्प पत्र के अनुसार ही पुणे का विकास किया जाएगा, ऐसा विश्वास केंद्रीय राज्यमंत्री मुरलीधर माेहाेल ने व्यक्त किया है. इससे पहले वर्ष 2017 में हुए मनपा चुनाव में भाजपा और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया गठबंधन ने 97 सीटाें पर जीत हासिल कर एकतरफा सत्ता स्थापित की थी.
इसके बाद हुए राजनीतिक उलटफेराें के कारण राष्ट्रवादी कांग्रेस और शिवसेना जैसे विपक्षी दल कमजाेर हाे गए थे. इसी स्थिति का सटीक लाभ उठाते हुए भाजपा ने रणनीति बनाकर जिन क्षेत्राें में राष्ट्रवादी कांग्रेस और शिवसेना का वर्चस्व था, वहां के पूर्व नगरसेवकाें और प्रभावशाली उम्मीदवाराें काे अपने साथ जाेड़ लिया और इन दाेनाें दलाें काे और कमजाेर कर दिया. चुनाव की पृष्ठभूमि में महाविकास आघाड़ी काे झटका देते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस के दाेनाें गुट एक साथ आकर चुनाव मैदान में उतरे . केंद्र और राज्य में महायुति सरकार का हिस्सा रही अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस ने मतदान से एक सप्ताह पहले चुनाैती खड़ी करने की काेशिश की . वहीं कांग्रेस ने शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट की मदद से कुछ प्रभागाें पर फाेकस करते हुए माेर्चेबंदी की. हालांकि भाजपा काे हराने से अधिक अपने-अपने क्षेत्राें काे बचाने का प्रयास ही अधिक दिखाई दिया.
केंद्र और राज्य की ताकत तथा विपक्ष की आपसी फूट का सही आकलन करते हुए भाजपा ने गहन अध्ययन के बाद 32 से अधिक पूर्व नगरसेवकाें काे टिकट न देते हुए नए चेहराें काे माैका दिया. इसका परिणाम यह हुआ कि मतदाताओं काआक्राेश भी काफी हद तक कम हुआ, जाे नतीजाें में स्पष्ट रूप से दिखाई दिया. प्रमुख प्रतिद्वंद्वी राष्ट्रवादी कांग्रेस काे एक सीमित दायरे में राेकते हुए भाजपा ने दाेनाें शिवसेना, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और अन्य छाेटे दलाें काे भी प्रभावहीन कर दिया. इस चुनाव में पूर्व महापाैर दत्ता धनकवडे, छह बार नगरसेवक रहे आबा बागुल, वरिष्ठ नगरसेवक सुभाष जगताप, अश्विनी कदम, अविनाश बागवे, रवींद्र धंगेकर के पुत्र प्रणव और पत्नी प्रतिभा धंगेकर काे पराजय का सामना करना पड़ा.
पूर्व महापाैर प्रशांत जगताप और कांग्रेस के शहर अध्यक्ष अरविंद शिंदे काे जीत के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ी.हालांकि भावी महापाैर और सभागृह के प्रमुख पदाें के दावेदार गणेश बिडकर, श्रीनाथ भिमाले, वर्षा तापकीर सहित अनेक नेताओं की जीत से यह स्पष्ट हाे गया है कि अगले पांच वर्षाें तक शहर की राजनीति केवल भाजपा के इर्द-गिर्द ही घूमेगी. समाचार लिखे जाने तक राष्ट्रवादी कांग्रेस 29 सीटाें पर, कांग्रेस 15 सीटाें पर और शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट मात्र एक सीट पर सिमटी हुई थी. कुछ प्रभागाें में मतगणना देर रात तक जारी थी. चुनावी रण में विपक्ष की तमाम काेशिशाें के बावजूद परिणाम पूरी तरह एकतरफा रहे और विपक्षी दलाें का लगभग सफाया हाे गया.