महाराष्ट्र की राजनीति के ‌‘मैन ऑफ द मैच' देवेंद्र फडणवीस

17 Jan 2026 14:51:25

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पुणे, 16 जनवरी (स्वप्निल बापट द्वारा)

राज्य की राजनीति में वर्तमान में केवल एक ही नाम केंद्र बिंदु बना हुआ है और वह है मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस. 2024 के विधानसभा चुनावों में मिली प्रचंड जीत के बाद, फडणवीस ने अपने नेतृत्व का जादू 29 महानगर पालिकाओं और उससे पहले हुए नगर परिषद चुनावों में भी बरकरार रखा है. स्थानीय निकायों के इन परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य के कोने-कोने की जनता ने फडणवीस के ‌‘विकास विजन' पर एक बार फिर अपनी मुहर लगा दी है. इसके अलावा, राज्य की सत्ता के आंकड़ों पर नजर डालें तो यह निर्विवाद रूप से कहा जा सकता है कि देवेंद्र फडणवीस ही इस पूरी चुनावी जंग के मैन ऑफ द मैच साबित हुए हैं.
 
अप्रैल-मई 2024 में हुए लोकसभा चुनावों में मिली हार के महज चार महीने बाद विधानसभा चुनाव हुए. उस चुनाव में महायुति को मिली अभूतपूर्व सफलता कोई संयोग नहीं थी, बल्कि यह बाद में स्पष्ट हो गया कि यह फडणवीस के सूक्ष्म नियोजन का ही परिणाम था. अब लगभग एक साल बाद, 29 महापालिकाओं के चुनाव संपन्न हुए हैं. इनमें भाजपा ने मुंबई, पुणे, पिंपरीचिंचव ड, नागपुर और नासिक जैसे प्रमुख शहरों में जो सफलता हासिल की है, वह उनकी बढ़ती लोकप्रियता का प्रमाण है. मुंबई मनपा (इचउ) में दशकों पुरानी सत्ता को उखाड़ फेंकने की दिशा में भाजपा द्वारा उठाया गया यह कदम ऐतिहासिक साबित हुआ है. इससे पहले हुए नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों में भी भाजपा ने 117 से अधिक नगराध्यक्ष चुनकर लाए थे, जिससे यह सिद्ध हो गया कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में भाजपा की जड़ें काफी गहरी हो चुकी हैं. पहले के नगर परिषद और अब के मनपा चुनावों में मतदाताओं ने न केवल भाजपा को पसंद किया, बल्कि इससे यह भी दिखाई देता है कि फडणवीस को ‌‘शहरी और ग्रामीण' दोनों स्तरों पर एक सर्वमान्य नेता के रूप में स्वीकार किया गया है. देवेंद्र फडणवीस न केवल एक कुशल प्रशासक हैं, बल्कि वे एक बेहतरीन रणनीतिकार भी हैं. चुनाव के दौरान राज्य भर में हुई उनकी जनसभाओं में उठाए गए मुद्दों ने सीधे मतदाताओं के दिलों को छुआ है. विपक्षी दलों की आलोचनाओं का जवाब देते समय भी वे ‌‘आंकड़े और विकास'जैसे अपने दो अमोघ, लाजवाब और रामबाण हथियारों का इस्तेमाल करते हैं. उनके द्वारा प्रस्तुत किया गया ‌‘विजन- 2047' का खाका राज्य के भविष्य की प्रगति की दिशा तय करने वाला साबित हुआ है, जिसने मतदाताओं को बड़े पैमाने पर आकर्षित किया है. जाति-पाति की राजनीति के बजाय ‌‘सर्वसमावेशक विकास' का उनका संकल्प ही उनकी असली ताकत बनकर उभरा है. राजनीति में ‌‘नेता की वेिशसनीयता' सबसे महत्वपूर्ण होती है और फडणवीस ने अपनी कार्यशैली से यह वेिशसनीयता अर्जित की है. उनकी सभाओं में उमड़ने वाली भीड़ और कार्यकर्ताओं का उत्साह उनके नेतृत्व पर अटूट वेिशास का प्रतीक है. आम जनता और कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद, उनकी समस्याओं को समझना और उन्हें सुलझाने पर जोर देने के साथ-साथ प्रशासन पर उनकी मजबूत पकड़ ने फडणवीस को जनता के बीच ‌‘हमारा नेता' के रूप में स्थापित किया है. निश्चित रूप से, इसका पूरा श्रेय उनकी अध्ययनशील प्रवृत्ति और दिनरात कड़ी मेहनत करने की तैयारी को जाता है. राज्य के विकास का दृष्टिकोण और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी पार्टी और कार्यकर्ताओं को संबल देने तथा उन्हें साथ लेकर चलने की क्षमता के कारण ही भाजपा आज राज्य में सर्वोच्च स्थान पर है. मनपा और नगर परिषद चुनावों की यह सफलता संकेत दे रही है कि आने वाले समय में राज्य की राजनीति पर भाजपा की पकड़ और भी मजबूत होगी. कुल मिलाकर, इन परिणामों से यह स्पष्ट है कि फडणवीस ने न केवल चुनाव जीते हैं, बल्कि लोगों के दिलों पर भी अपनी पकड़ मजबूत की है.  
देवेंद्र फडणवीस की सफलता का रहस्य विकासोन्मुख राजनीति

देवेंद्र फडणवीस की सफलता का सबसे महत्वपूर्ण रहस्य उनकी विकासोन्मुख राजनीति है. उन्होंने केवल घोषणाएं ही नहीं कीं, बल्कि उन्हें पूरा करने के लिए उनके द्वारा किया गया अथक परिश्रम भी इसका प्रमाण है. बुनियादी ढांचे- समृद्धि महामार्ग, मुंबई मेट्रो का जाल, वाढवण बंदरगाह, कोस्टल रोड, जलयुक्त शिवार और अटल सेतु जैसी परियोजनाएं महाराष्ट्र के कायाकल्प के प्रमाण बन रहे हैं. इन कार्यों को जनता के सामने ‌‘प्रगति के मॉडल' के रूप में प्रस्तुत करने में वे सफल रहे हैं. बुनियादी ढांचे-महाराष्ट्र को देश की ‌‘ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी' बनाने का उनका सपना और उस दिशा में उनकी नीतियां निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं. तकनीक और स्टार्टअप-आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ‌‘डिजिटल महाराष्ट्र' पर जोर देते हुए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना फडणवीस के एजेंडे में सर्वोपरि है. तकनीक के उपयोग से प्रशासन में आई पारदर्शिता के कारण मध्यमवर्ग और युवा मतदाताओं का उन पर वेिशास बढ़ा है. ‌‘लाडली बहन और अन्य योजनाएं-‌‘सबका साथ, सबका विकास'का मंत्र और किसान सम्मान निधि जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ जनता को मिला, जिसका प्रतिबिंब मतपेटियों में दिखाई दिया है. विधानसभा चुनाव में ‌‘गेमचेंजर' साबित हुई ‌‘लाडली बहन योजना' के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण की अन्य योजनाओं को लागू कर उन्होंने महिला मतदाताओं का भारी समर्थन हासिल किया है. धुआंधार सभाएं और सीधा संवाद चुनाव प्रचार के दौरान देवेंद्र फडणवीस द्वारा की गई सभाएं न केवल नेताओं और कार्यकर्ताओं, बल्कि मतदाताओं में भी नया जोश भरने वाली साबित हुईं. विशेष रूप से, अपने भाषणों में वे केवल आलोचना नहीं करते, बल्कि आंकड़ों के साथ विकास का पूरा लेखा-जोखा प्रस्तुत करते हैं. हिंदुत्व और मराठी जैसे मुद्दों पर विरोधियों द्वारा उठाए गए आरोपों का उन्होंने अत्यंत संयमित लेकिन करारा जवाब दिया है. न केवल बड़े नेताओं के साथ, बल्कि जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के साथ उनका सीधा संपर्क पार्टी की जीत की रीढ़ साबित हुआ है. सर्वांगीण विकास के लिए सत्ता की उनकी नीति, उनके भाषणों में दिखने वाला आत्मवेिशास और तथ्यों पर आधारित प्रस्तुति विरोधियों को निरुत्तर कर देती है. विरोधियों पर केवल व्यक्तिगत टिप्पणी करने के बजाय, अपनी सरकार द्वारा किए गए कार्यों का हिसाब देने पर जोर देने के कारण उनके भाषण अत्यंत प्रभावशाली और विचारोत्तेजक होते हैं.
 
 परफॉर्मेंस के नए मानक स्थापित किए

 यह स्पष्ट रूप से दिखाई देता है कि देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र की राजनीति में ‌‘परफॉर्मेंस' के नए मानक स्थापित किए हैं. फडणवीस की सफलता के पीछे केवल राजनीतिक जोड़-तोड़ नहीं होती, बल्कि पारदर्शी प्रशासन के साथ-साथ उनके द्वारा प्रस्तुत विकास का दृष्टिकोण लोगों को पसंद आता है. चुनावों में मिलने वाली सफलता को उनकी नीतियों और अथक परिश्रम का प्रतिफल मानना चाहिए. स्वाभाविक रूप से, यह वेिशास बढ़ता है कि भविष्य में उनके द्वारा बनाई गई नीतियां, योजनाएं और विजन राज्य के विकास के चक्र को और अधिक गति प्रदान करेंगे और महाराष्ट्र को प्रगति के शिखर पर ले जाएंगे. फडणवीस की पहचान एक अत्यंत ‌‘चतुर' रणनीतिकार के रूप में भी है. एक ओर महायुति के सहयोगी दलों के साथ समन्वय बनाए रखते हुए, दूसरी ओर वे इस बात का पूरा ध्यान रखते हैं कि भाजपा की ताकत में रत्ती भर भी कमी न आए. ‌‘बूथ प्रमुख' से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक सभी को सक्रिय रखने का उनका कौशल सराहनीय है. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए 2014 से उन्होंने सफलता की जो श्रृंखला शुरू
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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