उत्तर प्रदेश के बांदा में मकर संक्रांति के पर्व पर विभिन्न मान्यताओं पर आधारित दाे दिवसीय ‘आशिकाें का मेला’ गुरुवार काे संपन्न हाे गया.बुधवार और गुरुवार काे संपन्न इस मेले में उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के निकटवर्ती जिलाें के हजाराें नागरिकाें ने भाग लिया. बड़ी संख्या में पहुंचे प्रेमी प्रेमिकाओं ने नटबली मंदिर में माथा टेक कर पूजा, आरती, अर्चना कर मन्नत मांगी. प्राचीन मान्यता के अनुसार नट बली मंदिर में प्रेमी प्रेमिकाओं द्वारा मांगी गई सभी मन्नत पूरी हाे जाती है.मान्यता के अनुसार, भूरागढ़ दुर्ग में यह आयाेजित मेला प्रेम कथा पर आधारित है. सन 1857 के पूर्व भूरागढ़ किले के राजा अर्जुन सिंह की पुत्री का प्रेम गरीब वीरन नामक एक नट से हाे गया था.
दाेनाें शादी के लिए अडिग थे, लेकिन किलेदार राजा अर्जुन सिंह ने शादी के लिए एक चालाकी भरी शर्त रखी कि यदि नट वीरन एक रस्सी में चलकर नदी पार कर लेगा, तभी वह अपनी पुत्री की शादी उसके साथ करने के लिए राजी हाेगा.गरीब नट वीरन ने राजा की शर्त कबूल की. राज दरबार द्वारा नदी के दाेनाें छाेराें काे मिलाकर एक पतली रस्सी बांधी गई. जिस पर चलकर नट ने अपनी कला का प्रदर्शन किया और रस्सी में चलकर नदी पार कर वह रस्सी के अंतिम छाेर तक पहुंच ेजिससे वह नदी किनारे पत्थराें में गिरा और उसकी माैके पर ही मृत्यु हाे गई.जानकारी पर उसकी प्रेमिका किलेदार राजा की पुत्री ने भी किले से कूद कर आत्महत्या कर ली. जिसके बाद इस स्थान पर एक नटबली मंदिर की स्थापना की गई और प्रत्येक वर्ष मकर संक्रांति पर्व पर आशिकाें का मेले के आयाेजन की शुरुआत हुई.