निर्माण उद्योग के सुरक्षित भविष्य के लिए नवाचार जरूरी

20 Jan 2026 14:13:46

fbb 
मोशी, 19 जनवरी (आ. प्र.)

यदि निर्माण व्यवसाय के भविष्य को सुरक्षित बनाना है, तो मौजूदा चुनौतियों का समाधान नवाचार के माध्यम से करना अनिवार्य है, ऐसे विचार जे. कुमार डिफेंस एंड एयरोस्पेस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी यूसुफ इनामदार ने रखे. 20वें अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी कंस्ट्रो-2026 में पैनेल चर्चा में वे बोल रहे थे. पुणे कंस्ट्रक्शन इंजीनियरिंग रिसर्च फाउंडेशन (पीसीईआरएफ), पुणे महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (पीएमआरडीए) और पिंपरी-चिंचवड़ मनपा के संयुक्त तत्वावधान में इस प्रदर्शनी का आयोजन किया गया था. मोशी स्थित अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी केंद्र में हुए इस कार्यक्रम में भारतीय निर्माण उद्योग का भविष्यफ विषय पर यह पैनल चर्चा हुई. पैनल चर्चा के दौरान इंडिया प्लंबिंग एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष सुभाष देशपांडे ने कहा कि सरकार की नीतियां अधिक कठोर होती जा रही हैं, जिससे निर्माण उद्योग को शोधन किए गए अपशिष्ट जल का उपयोग करना ही होगा. अधिक से अधिक वर्षा जल संचयन के लिए सायफॉनिक पाइप सिस्टम को बढ़ावा देना चाहिए. शुभम ईपीसी की निदेशक अर्चना बडेर ने कहा कि गति, गुणवत्ता और मजबूती सुनिश्चित करने के लिए समय के अनुसार बदलाव अपनाना जरूरी है. पीसीईआरएफ के उपाध्यक्ष जयंत इनामदार ने स्ट्रक्चरल स्टील के उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि इससे कार्पेट एरिया में लगभग 40 प्रतिशत तक वृद्धि होती है, समय की बचत होती है और इसमें प्रयुक्त 80 से 90 प्रतिशत सामग्री को पुनः उपयोग में लाया जा सकता है. प्रीकास्ट इंडिया इंटरनेशनल के प्रबंध निदेशक अजित भाटे ने कहा, प्रीकास्ट कॉलम और दीवारों के उपयोग से निर्माण का समय कम होता है और गुणवत्ता में निरंतरता बनी रहती है. इस अवसर पर कंस्ट्रो-2026 के चेयरमैन जयदीप राजे ने भी अपने विचार रखे. इस सत्र में बड़ी संख्या में युवा इंजीनियर, इंजीनियरिंग के विद्यार्थी और उद्योग जगत के पेशेवर उपस्थित थे. कार्यक्रम का संचालन मनोज देशमुख ने किया.  
 
फ्लाई ऐश और ट्रीटेड वॉटर का उपयोग करना जरुरी

यूसुफ इनामदार ने बताया कि पुणे शहर में हर वर्ष लगभग 80 लाख टन सीमेंट का उपयोग होता है. सीमेंट के साथसाथ बड़ी मात्रा में पीने के पानी की भी खपत होती है. इसलिए सीमेंट के स्थान पर फ्लाई ऐश और पीने के पानी के स्थान पर शोधन किए गए ट्रीटेड वॉटर का उपयोग किया जाना चाहिए.  
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