बजट में विकास की दिशा और गति निरंतर बनी रहे

31 Jan 2026 14:22:58

BDGBFB
 
शिवाजीनगर, 30 जनवरी (आ. प्र.)
आगामी केंद्रीय बजट इस रविवार (1 फरवरी) को पेश किया जाने वाला है. पिछले कुछ वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था ने एक लंबी छलांग लगाई है, जिसके कारण लोगों को यह अपेक्षा है कि इस बजट से वह दिशा और गति निरंतर बनी रहेगी. जीएसटी में सुधार, टैक्स कंप्लायंस को सरल बनाना और कर भुगतान की प्रक्रियाओं को और अधिक आसान बनाने की मांग की जा रही है. रोजगार सृजन के साथ-साथ जीडीपी वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान देने के संबंध सरकार से नीतिगत निर्णयों की उम्मीद है. साथ ही ईमानदार करदाताओं के लिए ‌‘सोशल सिक्योरिटी क्रेडिटफ की मांग, ज्वेलरी क्षेत्र में जीएसटी दरों में कटौती की आवश्यकता, व्यापारियों और नियमित करदाताओं के लिए विशेष रियायतें लोक मांग रहे हैं. महंगाई पर नियंत्रण, रोजगार सृजन, स्वास्थ्य-शिक्षा में निवेश और एमएसएमई सेक्टर को मजबूती भी जशरी होने के साथ साथ आवास नीतियों को मौजूदा बाजार की वास्तविकताओं के अनुरूप पुनः संरेखित करने की मांग लोगों द्वारा की जा रही है. लोगों की अपेक्षा है कि डिजिटल शिक्षा, एआई और रोबोटिक्स में निवेश, और सरकारी स्कूलों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी बढ़ाने की दृष्टि से बजट तगत निर्णय होने चाहिए.

 
 आगामी बजट के संदर्भ में हमारी प्रमुख मांगें और सुझाव ऐसी हैं कि व्यक्तिगत आयकर की छूट सीमा को बढ़ाया जाना चाहिए. साथ ही, भागीदारी फर्मों के लिए कर की दरों को कम किया जाए, ताकि वे एल.एल.पी. और कंपनियों की कर दरों के अनुरूप हो सकें. ऑडिट के लिए टर्नओवर की सीमा पिछले कई वर्षों से 1 करोड़ रुपये ही बनी हुई है. इसे बढ़ाकर कम से कम 3 करोड़ रुपये किया जाना चाहिए, ताकि छोटे व्यवसायियों को ऑडिट से राहत मिल सके. बड़ी संख्या में अकुशल श्रमिकों को रोजगार देने वाले पारंपरिक व्यवसायों को पुनर्जीवित करने के लिए एक स्वतंत्र मंत्रालय की स्थापना की जानी चाहिए. इससे पारंपरिक व्यापारियों को बहुराष्ट्रीय कंपनियों और ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में आसानी होगी. छोटे और मध्यम व्यवसायियों के लिए टैक्स कंप्लायंस को आसान बनाने हेतु आयकर कानून को सरल और सीधा बनाया जाए. जो करदाता पिछले 10 वर्षों से नियमित रूप से टैक्स भर रहे हैं, उनके लिए एक सम्मान योजना लागू की जानी चाहिए. इसके माध्यम से उन्हें सार्वजनिक स्थानों जैसे कि हवाई यात्रा, रेलवे और अस्पतालों में विशेष सुविधा और छूट देने पर विचार किया जाना चाहिए. इसी तरह, नियमित करदाताओं को पेंशन या पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया जाना चाहिए.
- राजेंद्र बाठिया, अध्यक्ष, दि पूना मर्चेंट्स चेंबर
 

BDG 
 
इस वर्ष के केंद्रीय बजट से काफी उच्च अपेक्षाएं हैं और इसे भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक दिशा-निर्धारक बजट के रूप में देखा जा रहा है. यह समय दशक का बजट निर्धारित करने का है. करदाताओं के नजरिए से मुख्य अपेक्षा नीतिगत स्थिरता, एक सरल कर संरचना और निवेश के अनुकूल वातावरण की है. सरकार से उम्मीद है कि वह राजकोषीय अनुशासन बनाए रखते हुए बुनियादी ढांचे, विनिर्माण और डिजिटल क्षेत्र में पूंजीगत व्यय बढ़ाएगी, ताकि दीर्घकालिक विकास को मजबूती मिल सके. कॉर्पोरेट क्षेत्र टैक्स कंप्लायंस में सुगमता, मुकदमेबाजी में कमी और एक अधिक सुव्यवस्थित एवं त्वरित जीएसटी प्रणाली की राह देख रहा है. विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए ट्रांसफर प्राइसिंग और सीमा पार कराधान (Cross-border Taxation) नियमों में अधिक स्पष्टता आवश्यक है. इसके अतिरिक्त, हरित ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, एआई और निर्यात-उन्मुख उद्योगों के लिए प्रोत्साहन भारत की वैेिशक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ा सकते हैं. कुल मिलाकर, यदि बजट विकास, पारदर्शिता और ईज ऑफ डूईंग बिजनेस पर संतुलित ध्यान केंद्रित करता है, तो यह उद्योग के हितधारकों और निवेशकों के बीच वेिशास को और अधिक मजबूत करेगा. -मंगेश कटारिया, चार्टर्ड एकाउंटेंट निवासी
 

BDG
 
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना जरूरी वर्किंग कैपिटल हेतु सस्ता लोन उपलब्ध कराया जाए व्यापारियों और नियमित करदाताओं को रियायतें मिलें ज्वेलरी क्षेत्र में जीएसटी दरों में कटौती होनी चाहिए अगले दशक की दिशा निर्धारित करने का समय बुनियादी ढांचे में निवेश और कर छूट का निर्णय हो रियल एस्टेट को भूमि, वित्तीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं एक व्यापारी या नागरिक के नाते हमारे मन में अक्सर यह बात आती है कि मैं कई वर्षों से टैक्स भर रहा हूं, जबकि कई अन्य लोग मेरे टैक्स के पैसे पर सुविधाएं ले रहे हैं. अगर मैं ईमानदारी से टैक्स भरता हूं, तो सरकार को कभी मुझे भी उसका विशेष लाभ लेने का अवसर देना चाहिए. मेरी यह अवधारणा है कि जब से मैंने इन्कम टैक्स भरना शुरू किया है, तब से लेकर 65 वर्ष की आयु तक मैंने जितना भी टैक्स भरा है, उसके अनुपात में सरकार को मुझे सोशल सिक्योरिटी क्रेडिट कार्ड देना चाहिए. भले ही वह राशि तुलना में कम हो, लेकिन सरकार द्वारा वह मुझे रीइम्बर्स की जानी चाहिए. इस राशि का उपयोग वृद्धावस्था में स्वास्थ्य देखभाल और परिवहन जैसी सुविधाओं के लिए किया जा सके. चूंकि मैंने सरकार को इतने वर्षों तक टैक्स के रूप में किस्त चुकाई है, इसलिए मेरे भरण-पोषण के लिए सरकार को पेंशन जैसी कुछ राशि देनी चाहिए. इसमें कैपिटल गेन टैक्स को छोड़कर, सामान्य आय पर चुकाए गए टैक्स के बदले एक छोटी राशि ही सही, लेकिन सरकार को कोई योजना लानी चाहिए. सरकार अब डीबीटी के माध्यम से इसे आसानी से लागू कर सकती है. कुल मिलाक र मेरे बुढ़ापे में सरकार ही मेरा ख्याल रखने वाली होनी चाहिए. इसलिए, कुछ नियम तय करके सोशल सिक्योरिटी के माध्यम से ये लाभ मिलने चाहिए. -अमित मोडक, वरिष्ठ कमोडिटी विशेषज्ञ
 

BDG

 
 
रियल एस्टेट क्षेत्र को उम्मीद है कि आगामी केंद्रीय बजट 2026 में सरकार की ओर से बुनियादी ढांचे, जैसे कि सड़कों, राजमार्गों, रिंग रोड और मेट्रो कनेक्टिविटी के विस्तार के लिए अधिक समर्थन मिलेगा. वर्ष 2025 में कई शहरों में घरों की बिक्री में मंदी देखी गई. इसके कुछ प्रमुख कारणों में कच्चे माल और निर्माण लागत में वृद्धि, जमीन की कीमतों में उछाल, खरीदारों का चुनिंदा और सतर्क रुख दिखाई दिया. यही कारण है कि ‌‘वैल्यू हाउसिंग' से लेकर मलक्जरी हाउसिंगफ तक, सभी सेगमेंट्स में सरकार से ठोस उपायों की अपेक्षा की जा रही है. रियल एस्टेट देश में रोजगार पैदा करने वाला दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र है. यह कई छोटे-बड़े उद्योगों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है. परिणामस्वरूप, इस क्षेत्र का अन्य कई उद्योगों पर गुणात्मक प्रभाव पड़ता है. चूंकि कई छोटे क्षेत्र इस पर निर्भर हैं, इसलिए रियल एस्टेट के बेहतर प्रदर्शन का लाभ बाकी सभी क्षेत्रों को भी मिलता है. यह क्षेत्र रोजगार सृजन के साथ-साथ जीडीपी वृद्धि में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देता है. यदि बजट 2026 में सरकार बुनियादी ढांचे में निवेश और कर छूट के संबंध में सही निर्णय लेती है, तो इस क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं. - सचिन भंडारी, एमडी-सीईओ, वीटीपी 
 BDG
 रियल्टी रियल एस्टेट केवल एक निवेश नहीं है, बल्कि आर्थिक विकास और सामाजिक स्थिरता का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है. यूनियन बजट 2026 के मजेनजर, अब समय आ गया है कि आवास नीतियों को मौजूदा बाजार की वास्तविकताओं के अनुरूप पुनःसंरेखित किया जाए. किफायती आवास के लिए 45 लाख रुपये की मौजूदा सीमा पुणे जैसे तेजी से बढ़ते शहरों में अप्रासंगिक हो चुकी है, जहां भूमि और निर्माण लागत में काफी वृद्धि हुई है. इस सीमा को 90 लाख रुपये तक संशोधित करने, किफायती आवास को प्रोत्साहन देने वाले कर लाभ और निर्माण अनुबंधों पर जीएसटी के युक्तिकरण से आपूर्ति बढ़ेगी और घर खरीदारों को राहत मिलेगी. रेरा को लागू हुए लगभग नौ वर्ष हो चुके हैं और इस दौरान रियल एस्टेट क्षेत्र अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और संगठित हुआ है. अब आवश्यकता है कि बैंकिंग और वित्तीय सुधारों के माध्यम से रियल एस्टेट को विशेषकर भूमि अधिग्रहण के चरण में निर्माण क्षेत्र के समान सस्ती वित्तीय सुविधाएं, देशी और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से उपलब्ध कराई जाएं. -कपिल गांधी, एमडी, सिग्मा वन यूनिवर्सल
 

BDG
1 फरवरी 2026 को प्रस्तुत होने वाला बजट कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर केंद्रित हो. शिक्षा क्षेत्र में उच्च आवंटन, स्कूल और उच्च शिक्षा के लिए अधिक धन, और एनईपी 2020 का तेजी से और प्रभावी ढंग से कार्यान्वयन जरुरी है. स्वास्थ्य क्षेत्र में वृद्धि, चिकित्सा शिक्षा का विस्तार, और 200 डे केयर कैंसर सेंटर की स्थापना हो. डिजिटल शिक्षा, एआई और रोबोटिक्स में निवेश, और सरकारी स्कूलों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी बढ़नी चाहिए. रेलवे, सड़क और ऊर्जा क्षेत्र में निवेश, और सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा देना जरुरी है. किसानों के लिए समर्थन, कृषि उत्पादकता में वृद्धि, और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करना आज समय की मांग है. डॉ. आर. एम. चिटणीस, कुलपति, एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी, पुणे 
 
 
BDG
 
ईमानदार करदाताओं को सोशल सिक्योरिटी क्रेडिट मिले
आगामी बजट से मेरी अपेक्षा है कि यह आम नागरिक, किसान, युवा, मध्यम वर्ग के साथ-साथ रिटेल व्यापारियों, रिटेलर्स को भी विशेष राहत दे. छोटे और मध्यम रिटेलर्स के लिए जीएसटी प्रक्रियाओं को सरल, कंप्लायंस बोझ कम करने और वर्किंग कैपिटल हेतु सस्ता ऋण उपलब्ध कराया जाना चाहिए. ऑनलाइन और ऑफलाइन व्यापार के बीच समान प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित हो, ताकि छोटे दुकानदार भी टिके रह सकें. महंगाई पर नियंत्रण, रोजगार सृजन, स्वास्थ्य-शिक्षा में निवेश और एमएसएमई सेक्टर को मजबूती भी जशरी है. डिजिटल पेमेंट पर प्रोत्साहन और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास से व्यापार और अर्थव्यवस्था दोनों को गति मिलेगी.उम्मीद है कि बजट 2026 विकास के साथ सभी वर्गों के हितों का संतुलन बनाएगा. -विकास मुंदड़ा, कैट, पुणे जिला अध्यक्ष
 
BDG
सरकार से हमारी यह मांग है कि बजट में एक निश्चित नीति बनाकर ज्वेलरी सेक्टर में जीएसटी को कम करने का निर्णय लिया जाए. विशेष रूप से मध्यम और छोटे स्तर के ज्वेलर्स के लिए यह निर्णय अत्यंत आवश्यक है. वर्तमान में सोने और चांदी की कीमतों में भारी उतार- चढ़ाव हो रहा है. इसका सबसे बुरा असर छोटे व्यापारियों और मध्यमवर्गीय खरीदारों पर पड़ रहा है. उदाहरण के तौर पर, यदि सोने की कीमत फिलहाल 1,60,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास है, तो उस पर 3% जीएसटी यानी लगभग 4,800 रुपये अतिरिक्त बोझ पड़ता है. एक आम ग्राहक के लिए यह खर्च उठा पाना बहुत मुश्किल है. न केवल सर्राफा व्यापारियों बल्कि ग्राहकों और इस पूरे क्षेत्र के भविष्य को देखते हुए, जीएसटी या तो पूरी तरह हटा दिया जाना चाहिए या कम से कम 3% से घटाकर 1% कर दिया जाना चाहिए. इससे बाजार को काफी राहत मिल सकती है. -संगीता ललवाणी, निदेशक, गोल्ड मार्ट

BDG

Powered By Sangraha 9.0