वैष्णाे देवी मेडिकल काॅलेज की एमबीबीएस की मान्यता रद्द

08 Jan 2026 23:10:03
 

MBBS 
 
नेशनल मेडिकल कमिशन (एनएमसी) ने जम्मू स्थित वैष्णाे देवी मेडिकल काॅलेज की एमबीबीएस की मान्यता रद्द कर दी है.कमिशन के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बाेर्ड (एमएआरबी) ने यह कार्रवाई की. काॅलेज काे पिछले साल ही एमबीबीएस काेर्स चलाने की मान्यता मिली थी. कमिशन ने 6 जनवरी काे एनएमसी के मानकाें में उल्लंघन पाए जाने पर यह फैसला लिया. माैजूदा एमबीबीएस के छात्राें का अन्य काॅलेजाें में शिफ्ट किया जाएगा.कुछ महीने पहले काॅलेज पर आराेप लगा था कि 2025-26 के पहले बैच में इसने 42 मुस्लिम, 7 हिंदू और एक सिख छात्र का नाम सीट अलाॅटमेंट लिस्ट में रखा. जिसके बाद कई हिंदू संगठनाें ने विराेध प्रदर्शन किया था. उन्हाेंने कहा था कि सीट बंटवारे में भेदभाव किया गया. हिंदू छात्राें की अनदेखी की गई, इसलिए एडमिशन लिस्ट तुरंत रद्द हाेनी चाहिए.
 
साथ ही हिंदू संगठनाें ने मांग की थी कि यह काॅलेज माता वैष्णाे देवी के भक्ताें के चढ़ावे से चलता है. इसलिए हिंदू छात्राें काे प्राथमिकता मिलनी चाहिए. बाेर्ड के अनुसार, काॅलेज ने एनएमसी के मानकाें का उल्लंघन किया. निरीक्षण के समय में ऐसी कमियां सामने आईं जिन्हाेंने उन शर्ताें का उल्लंघन किया, जिनके तहत संस्थान काे मंजूरी दी गई थी. इसलिए एनएमसी ने अंडरग्रेजुएट मेडिकल काेर्स की मान्यता रद्द कर दी. एनएमसी की टीम ने 2 जनवरी 2026 काे काॅलेज का औचक निरीक्षण किया. इसनिरीक्षण मेंपाया गया कि संस्थान में बुनियादी ढांचे, शिक्षकाें की संख्या और क्लीनिकल सुविधाओं में गंभीर कमियां हैं.रिपाेर्ट के अनुसार काॅलेज में शिक्षकाें की संख्या करीब 39 फीसदी कम थी. ट्यूटर, डेमाेंस्ट्रेटर और सीनियर रेजिडेंट डाॅक्टराें भी 65 फीसदी कम मिले.
 
मरीजाें की संख्या भी निर्धारित मानकाें से काफी कम मिली. दाेपहर 1 बजे तक ओपीडी में सिर्फ 182 मरीज माैजूद थे, जबकि कम से कम 400 मरीज हाेने चाहिए थे.अस्पताल में बिस्तराें की औसत भरी हुई स्थिति केवल 45 प्रतिशत थी, जबकि मानक 80 प्रतिशत का है. आईसीयू में भी लगभग 50 प्रतिशत ही बेड ऑक्युपेंसी पाई गई.इसके अलावा कई विभागाें में लैबाेरेटरी हीं थीं, रिसर्च लैब नहीं थी, लेक्चर थिएटर मानकाें के अनुरूप नहीं थे और लाइब्रेरी में सिर्फ 744 किताबें थीं जबकि 1,500 किताबें जरूरी हैं. अलग-अलग पुरुष और महिला वार्ड तक नहीं थे. निरीक्षण में यह भी पाया गया कि केवल 2 ऑपरेशन थिएटर काम कर रहे थे जबकि कम से कम 5 थिएटर हाेने चाहिए थे. ओपीडी क्षेत्र में माइनर ओटी की व्यवस्था भी नहीं थी और पैरा-क्लीनिकल विषयाें के लिए उपकरण भी पर्याप्त नहीं थे.
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