नई दिल्ली/मुंबई, 29 अ्नटूबर (वि.प्र.)
सुप्रीम काेर्ट ने महाराष्ट्र में लाेकल बाॅडी इलेक्शन काे लेकर एक अहम फैसला लिया है. हालांकि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए रिजर्वेशन का मुद्दा अभी सुलझ नहीं पाया है, लेकिन काेर्ट ने साफ किया है कि पेंडिंग लाेकल बाॅडी इलेक्शन एक अंतरिम व्यवस्था के ताैर पर कराए जा सकते हैं. काेर्ट ने यह भी कहा है कि यह इलेक्शन मामले में आखिरी फैसले के अधीन हाेंगे.इससे राज्य में 20 जिला परिषदाें और 211 पंचायत समितियाें के इलेक्शन का रास्ता साफ हाे गया है.
राज्य में लाेकल बाॅडी चुनाव 2022 से ओबीसी रिज़र्वेशन के मुद्दे पर काेर्ट के चक्कर में फंसे हुए हैं. सुप्रीम काेर्ट ने कहा है कि राज्य में लाेकल बाॅडी में ओबीसी रिज़र्वेशन लागू करते समय कुल रिज़र्वेशन लिमिट 50 प्रतिशत से ज़्यादा नहीं हाेनी चाहिए. इस वजह से कई चुनावाें काे लेकर रिज़र्वेशन लागू करने पर सवाल उठे थे.
इस केस की सुनवाई के दाैरान सुप्रीम काेर्ट ने माैखिक टिप्पणी की कि उसे बाकी ज़िला परिषद और पंचायत समिति चुनावाें में 50 प्रतिशत रिज़र्वेशन लिमिट का पालन करने पर काेई आपत्ति नहीं है. इन चुनावाें के नतीजे और प्राेसेस पेंडिंग पिटीशन पर आखिरी फैसले के अधीन हाेंगे.
सुप्रीम काेर्ट के इस रुख से राज्य में बाकी लाेकल बाॅडी चुनावाें के लिए आगे का प्राेसेस शुरू हाेने का रास्ता साफ हाे गया है. हालांकि, यह राज्य चुनाव आयाेग की ऑफिशियल घाेषणा के बाद ही साफ हाेगा कि चुनावाें की घाेषणा असल में कब हाेगी, वाेटिंग की तारीख क्या हाेगी और चुनाव प्राेग्राम कब जारी हाेगा.
कमीशन काे इन चुनावाें के लिए ज़रूरी मैनपाॅवर और दूसरे एडमिनिस्ट्रेटिव इंतज़ामाें की भी प्लानिंग करनी हाेगी. इसलिए, जहां काेर्ट का राेल ज़रूरी है, वहीं असली चुनाव प्राेग्राम का अनाउंसमेंट अगला ज़रूरी कदम हाेगा.