नई दिल्ली, 5 अ्नटूबर (वि.प्र.)
भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही बहुप्रतीक्षित व्यापार समझाैते की वार्ता एक तरह से अटक गई है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साेमवार काे स्पष्ट शब्दाें में कहा कि दाेनाें पक्ष एक ‘प्लेटाे’ पर पहुंच चुके हैं और इससे आगे काेई भी पक्ष अतिरिक्त रियायत देना या लेना बहुत मुश्किल मान रहा है.
वित मंत्री ने सार्वजनिक ताैर पर वहीं बात कही है जाे दाेनाें देशाें के अधिकारी साफ ताैर पर कहने से हिचकिचा रहे थे. दिल्ली में आयाेजित म्यूनिख सिक्याेरिटी कांफ्रेंस में एक सत्र काे संबाेधित करते हुए सीतारमण ने कहा कि यह समझाैता बेहद कठिन और जाेरदार माेलभाव के बाद यहां तक पहुंचा है. उन्हाेंने कहा, इस ‘प्लेटाे’ से आगे देना या लेना दाेनाें देशाें के लिए बहुत-बहुत मुश्किल हाेगा. अगर कहीं संचालन की गुंजाइश बची हाे ताे दाेनाें पक्ष काेशिश कर सकते हैं. वैसे समाचार लिखे जाने तक वार्ता अभी भी जारी था. वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि दाेनाें देशाें के बीच व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में है और घाटा वाशिंगटन का है. अमेरिका इस असंतुलन काे कम करना चाहता है. सीतारमण का यह बयान अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीयर के हालिया वक्तव्य के अनुरूप है. ग्रीयर ने पिछले सप्ताह भारत के वाणिज्य एवं उद्याेग मंत्री पीयूष गाेयल से मुलाकात के बाद कहा था कि समझाैता फिलहाल हाेता नहीं दिख रहा.
गाेयल और ग्रीयर की बैठक में मुद्दाें पर विस्तार से चर्चा हुई थी, लेकिन काेई ठाेस प्रगति नहीं दिखी. यह स्थिति तब सामने आई है जब कुछ दिन पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वाणिज्य मंत्री पीयूष गाेयल अमेरिका दाैरे पर गए थे. जयशंकर की अमेरिकी विदेश मंत्री मार्काे रुबियाे से बातचीत में व्यापार समझाैता प्रमुख मुद्दा रहा. गाेयल-ग्रीयर बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी ने राष्ट्रपति डाेनाल्ड ट्रंप से भी बात की थी. जानकाराें का मानना है कि शीर्ष स्तर पर भारत ने अपना रुख साफ कर दिया है कि वह समझाैते में कहां तक जा सकता है.