साेशल मीडिया से 3 घंटे के भीतर हटानी हाेगी आपत्तिजनक सामग्री

    12-Feb-2026
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साेशल मीडिया पर तेजी से फैल रहे एआई-जनरेटेड डीपफेक और भ्रामक सामग्री काे लेकर केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाया है. सूचना प्राैद्याेगिकी मंत्रालय ने मेटा (फेसबुक-इंस्टाग्राम), यूट्यूब, ए्नस सहित सभी साेशल मीडिया कंपनियाें के लिए संशाेधित गाइडलाइंस जारी की हैं. इनमें आपत्तिजनक, भ्रामक और गैर-कानूनी कंटेट काे तीन घंटे के भीतर हटाना शामिल है.इससे पहले यह समयसीमा 36 घंटे थी. नए नियमाें के तहत अब एआई से बने हर कंटेंट काे स्पष्ट रूप से लेबल करना और उसमें पहचान से जुड़ा मेटाडेटा जाेड़ना अनिवार्य हाेगा.नए नियम 20 फरवरी से लागू हाेंगे.सरकार की नई गाइडलाइंस साेशल मीडिया मंच मसलन ए्नस, यू-ट्यूब, स्नैपचैट, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर शेयर किए जाने वाले एआई जनरेटेड कंटेंट पर लागू हाेगा.
 
इसका ड्राफ्ट सरकार ने 22 अक्टूबर 2025 काे जारी किया था. संशाेधनाें में ध्वनि, दृश्य या ध्वनि-दृश्य जानकारी और बनावटी रूप से तैयार की गई जानकारी काे परिभाषित किया गया है,जिसमें एआई द्वारा निर्मित या परिवर्तित ऐसी सामग्री शामिल है, जाे वास्तविक या प्रामाणिक प्रतीत हाेती है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी एआई-जनरेटेड या डीपफेक कंटेंट काे सरकार या किसी अदालत द्वारा आपत्तिजनक करार दिया जाता है, ताे संबंधित प्लेटफाॅर्म काे 3 घंटे के भीतर उसे हटाना हाेगा. तय समयसीमा का पालन नहीं करने पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है. निर्देशाें के मुताबिक, साेशल मीडिया कंपनियाें काे उन्नत तकनीकी उपाय और ऑटाेमैटेड टूल्स तैनात करने हाेंगे. इनका उद्देश्य अवैध, धाेखाधड़ी वाले, भ्रामक या याैन शाेषण से जुड़े एआई कंटेंट की पहचान कर उसे फैलने से राेकना है.