गुजरात के भद्रेश्वर में स्थित वसई जैन मंदिर

    12-Feb-2026
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temple 
भुज से कच्छ में कुछ ही किलाेमीटर दूर स्थित भद्रेश्वर गुजरात का एक महत्वपूर्ण जैन तीर्थस्थल है. इतिहासकाराें का मानना है कि भद्रेश्वर की स्थापना 516 ईसा पूर्व में हुई थी.भद्रेश्वर अपने प्रसिद्ध जैन मंदिराें, मस्जिदाें और अन्य ऐतिहासिक स्थलाें के लिए जाना जाता है. भद्रेश्वर गांव में जैन मंदिर हैं, जिनमें 500 ईसा पूर्व की मूल पार्श्वनाथ प्रतिमा स्थापित है. जैन धर्म के अनुयायी देवचंद्र ने इसका निर्माण शुरू किया था और माना जाता है कि यह मंदिर भगवान महावीर की मृत्यु के लगभग 45 वर्ष बाद, लगभग 2500 वर्ष पहले बनाया गया था.
 
जैन मंदिर के अलावा, यहां 12वीं शताब्दी की दाे मस्जिदें भी हैं, जाअपनी इस्लामी संरचना के लिए प्रसिद्ध हैं.यह जैन मंदिर भारत का सबसे प्राचीन जैन मंदिर माना जाने वाला भव्य, जटिल और आकर्षक नक्काशी से परिपूर्ण है.भूकंप के कारण कई बार क्षतिग्रस्त हाेने के कारण मंदिर का समय-समय पर जीर्णाेद्धार और पुनर्निर्माण किया गया है. मंदिर के अंदर तीन संगमरमर की मूर्तियां हैं. केंद्र में वर्तमान युग के दूसरे तीर्थंकर भगवान अजितनाथ की सुंदर प्रतिमा है, दाईं ओर नाग फन वाले पार्श्वनाथ की प्रतिमा है और बाईं ओर 16वें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ की प्रतिमा है. गैर-जैन लाेगाें काे मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं है.