केवल 6.5 ओवर मे सैकड़ा बना लेने के बाद के 13.1 ओवर में केवल 109 रन बनानेवाली और पारी के आखिरी दाैर में केवल 11 गेंद में 5 विकेट खाे देनेवाली भारतीय टीम भले ही नामीबिया काे हराकर फुली ना समाए लेकिन असली हकीकत से ताे काेच गाैतम गंभीर और कप्तान सूर्य कुमार यादव दाेनाें वाकिफ हैं.एक समय था जब स्पिन गेंदबाजी भारत का सबसे घातक हथियार था, लेकिन आज वह क्रिकेट के हर फाॅर्मेट में इसी डिपार्टमेंट में मार खा रहा है. वह ग़लतियाें से सबक नहीं ले रहा है और वही उसकी कमज़ाेरी बन गई है. अब पाकिस्तान के साथ मैच में स्पिन गेंदबाज़ी का सामना करना भारतीय टीम के लिए आसान नहीं हाेने वाला है.नामीबिया के ख़िलाफ भारतीय टीम की 93 रन से जीत के साथ बाद अपने शुरुआती दाेनाें मैच जीत लिए हैं, लेकिन कुछ सवाल विकराल हाेते जा रहे हैं.
यह हाल सिर्फ कल के मैच के नहीं बल्कि हाल के सालाें में स्पिनर्स के ख़िलाफ ख़राब प्रदर्शन टीम इंडिया की सबसे बड़ी कमज़ाेरी के रूप में देखा जा रहा है.नामीबिया के ख़िलाफ भारत की शुरुआत इतनी शानदार थी कि टीम ने महज सात ओवर में ही एक विकेट गंवाकर 104 रन बना लिए थे.लेकिन नामीबिया के कप्तान जेरार्ड ने मैच में अपनी पहली गेंद पर ही 20 गेंद में अर्धशतक जड़ने वाले ईशान किशन काे पविलियन भेज दिया. इसके बाद भारतीय बल्लेबाज़ जेरार्ड इरास्मस की स्पिन के आगे संघर्ष करते नज़र आए. उन्हाेंने 4 ओवर में महज 20 रन देकर किशन के अलावा तिलक वर्मा, हार्दिक पंड्या और अक्षर पटेल का विकेट भी लिया.वहीं नामीबिया के तेज़ गेंदबाज़ रुबेन ने इस मुक़ाबले मे 9.5 के इकाेनाॅमी रेट से रन खर्च किए.जबकि बाक़ी सभी गेंदबाज़ाें का इकाेनाॅमी रेट ताे 10 से भी ज़्यादा का रहा.इससे पहले अमेरिका के स्पिनर्स ने भी भारतीय बल्लेबाज़ाें काे ख़ासा परेशान किया.लेग स्पिनर माेहम्मद माेहसिन ने भारत के ख़िलाफ 4 ओवर में 16 रन देकर एक विकेट लिया था.हरमीत सिंह ने 4 ओवर में महज 26 रन खर्च दाे भारतीय बल्लेबाज़ाें काे पविलियन वापस भेजा था.
15 फरवरी काे पाकिस्तान के साथ मैच से पहले ये सवाल इसलिए और भी गंभीर हाे जाता है, क्याेंकि काेलंबाे की पिचाें काे स्पिनर्स के लिए भारतीय पिचाें से भी ज़्यादा मददगार माना जाता है और दूसरे यह कि पाकिस्तान अब अपने तेज़ गेंदबाज़ाें की बजाए स्पिनर्स पर ही ज़्यादा भराेसा दिखा रहा है.उसने नीदरलैंड्स के ख़िलाफ 4 और अमेरिका के ख़िलाफ 5 स्पिनर्स काे आजमाया और इनमें 13 विकेट झटके हैं. सच ताे यह है कि स्पिनर्स के ख़िलाफ भारतीय बल्लेबाज़ाें का संघर्ष 2024 से ही चल रहा है, 2024 में भारत ने 12 साल के लंबे अंतराल के बाद अपनी ज़मीन पर टेस्ट सीरीज़ 3-0 से गंवाई थी. इसके बाद दक्षिण अफ््रीका ने भी भारतीय ज़मीन पर 2-0 से टेस्ट सीरीज़ अपने नाम की. हाल के सालाें में भारतीय बल्लेबाज़ाें का स्पिनर्स के ख़िलाफ प्रदर्शन पहले जैसा नहीं रहा है. स्पिनर्स काे खेलने के मामले में भारतीय बल्लेबाज़ पहले से कमज़ाेर हुए हैं.