12 मराठा किलाें का विश्व धराेहर प्रमाण पत्र प्राप्त

    14-Feb-2026
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maratha
 
महाराष्ट्र के संस्कृति मंत्री आशीष शेलार ने छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़े बारह किलाें काे यूनेस्काे विश्व धराेहर का दर्जा देने वाला प्रमाणपत्र औपचारिक रूप से प्राप्त कर लिया है. यह प्रमाणपत्र पेरिस स्थित यूनेस्काे मुख्यालय में स्वीकार किया गया, जाे ऐतिहासिक मराठा सैन्य नेटवर्क काे वैश्विक मान्यता दिलाने वाली लंबी प्रक्रिया की पूर्णता का प्रतीक है. इन किलाें काे पिछले वर्ष 11 जुलाई, 2025 काे आयाेजित यूनेस्काे के 47वें सत्र के दाैरान मभारत के मराठा सैन्य परिदृश्यफ शीर्षक के तहत सूचीबद्ध किया गया था. महाराष्ट्र सरकार के प्रतिनिधिमंडल द्वारा तकनीकी प्रस्तुतियाें और अनुवर्ती दस्तावेज़ीकरण के बाद, आधिकारिक मान्यता दस्तावेज अब साैंप दिया गया है.
 
अधिकारियाें ने इसे न केवल राज्य के लिए बल्कि देश की ऐतिहासिक विरासत के लिए भी एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक क्षण बताया. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इस घटनाक्रम पर खुशीव्यक्त की. फडणवीस ने कहा, यह खुशी और गर्व का पल है. यह पहचान महाराष्ट्र के लाेगाें और दुनिया भर के शिव-भक्ताें के लिए एक ऐतिहासिक और इमाेशनल पल है. फडणवीस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी काे धन्यवाद दिया और यूनेस्काे में भारत के एम्बेसडर और परमानेंट रिप्रेजेंटेटिव विशाल शर्मा की काेशिशाें की तारीफ की. अपनी यात्रा के दाैरान, शेलार ने यूनेस्काे परिसर में बी.आर. आंबेडकर काे श्रद्धांजलि भी अर्पित की.इस शिलालेख के तहत पहचानी गई 12 जगहें साल्हेर किला, शिवनेरी किला, लाेहागढ़ किला, खंडेरी किला, रायगढ़ किला, राजगढ़ किला, प्रतापगढ़ किला, सुवर्णदुर्ग किला, पन्हाला किला, विजयदुर्ग किला, महाराष्ट्र में सिंधुदुर्ग किला और तमिलनाडु में जिंजी किला है.
 
पहाड़ाें और समुद्रतट पर बने ये किले शिवाजी महाराज के शासनकाल में एक रणनीतिक रक्षा प्रणाली का निर्माण करते थे.इतिहासकार इस नेटवर्क काे सैन्य नियाेजन, शासन और जन कल्याण के अनूठे उदाहरण के रूप में देखते हैं. राज्य सरकार ने कहा कि इस मान्यता से भारत की स्वदेशी किला वास्तुकला वैश्विक विरासत मानचित्र पर आ गई है. इस सम्मान काे भावनात्मक और ऐतिहासिक बताते हुए मंत्री ने नामांकन प्रक्रिया के दाैरान मिले समर्थन के लिए राष्ट्रीय और राज्य नेतृत्व काे धन्यवाद दिया.समाराेह में उपस्थित अधिकारियाें में यूनेस्काे में भारत के स्थायी प्रतिनिधि विशाल शर्मा और संस्कृति एवं पुरातत्व विभागाें के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे.