राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शुक्रवार काे सदन में कहा कि राष्ट्रपति अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दाैरान उनके भाषण का एक बड़ा हिस्सा बिना किसी औचित्य के कार्यवाही से हटा दिया गया जिसमें उन्हाेंने संसदीय कामकाज पर टिप्पणियां और प्रधानमंत्री की चंद नीतियाें की आलाेचना की थी.शून्यकाल की समाप्ति के बाद खड़गे ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा में उन्हाेंने सामाजिक न्याय से लेकर संसदीय तथ्याें पर अपनी बातें रखी थीं. उन्हाेंने कहा, राज्यसभा की वेबसाइट पर अपलाेड किये गये भाषण की समीक्षा करने पर मैंने पाया कि मेरे भाषण का बड़ा हिस्सा बिना किसी औचित्य के हटा दिया गया है.
ये वे हिस्से हैं जिनमें मैंने वर्तमान सरकार के कार्यकाल में संसदीय कामकाज पर तथ्याें के साथ टिप्पणियां की हैं और प्रधानमंत्री की चंद नीतियाें की आलाेचना की है, जाे नेता प्रतिपक्ष हाेने के नाते मेरा दायित्व भी है क्याेंकि मुझे लगता है कि वे नीतियां भारतीय जनमानस पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही हैं. उन्हाेंने कहा कि पांच दशक से अधिक के संसदीय जीवन में वह हमेशा भाषा की मर्यादा के प्रति सजग और सचेत रहे हैं.कहां, किन बाताें काे निकाला जा सकता है इससे वह पूरी तरह वाकिफ हैं.कांग्रेस सांसद ने कहा कि राज्यसभा के नियम एवं संचालन प्रक्रिया का नियम 261 केवल विशिष्ट और सीमित परिस्थितियाें में ही लागू हाेता है.