‘रेरा’ काे अब बंद कर देना ही बेहतर हाेगा: सुप्रीम काेर्ट

    14-Feb-2026
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‘रेरा’ काे अब बंद कर देना ही बेहतर हाेगा. यह टिप्पणी गुरुवार काे सुप्रीम काेर्ट ने हिमाचल हाईकाेर्ट के फैसले के खिलाफ सुनवाई करते हुए यह कड़ी टिप्पणी की.चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा-‘रेरा’ अपनउद्देश्य से भटक गया है और बिल्डराें के दबाव में काम कर रहा. सूर्यकांत ने कहाघर खरीदने वालाें काे राहत नहीं मिल रही है और डिफाल्टर बिल्डराें काे फायदा पहुंचा रहा है. उन्हाेंने कहा ‘रेरा’ सिर्फ कागजी आदेश देता है, जबकि सख्त कार्रवाई नहीं करता है.अदालत ने कहा कि रेरा काे जिन लाेगाें के लिए बनाया गया था, वे पूरी तरह से उदास, निराश और हताश हैं. बेहतर हाेगा कि इस संस्था काे समाप्त कर दिया जाए, इस अदालत काे इससे काेई दिक्कत नहींहाेगी. प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जाेयमाल्या बागची की पीठ ने ये टिप्पणियां हिमाचल प्रदेश सरकार काे ‘रेरा’ का कार्यालय अपनी पसंद की जगह पर स्थानांतरित करने की अनुमति देते हुए की.
 
पीठ ने हिमाचल प्रदेश सरकार और अन्य लाेगाें की उस याचिका पर नाेटिस जारी किया, जिसमें प्रदेश के ‘रेरा’ कार्यालय काे शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने से जुड़े मामले में हिमाचल प्रदेश हाई काेर्ट के आदेश काे चुनाैती दी गई थी. हाईकाेर्ट ने पहले ‘रेरा’ कार्यालय काे स्थानांतरित करने से जुड़ी जून, 2025 की अधिसूचना पर अगले आदेश तक राेक लगा दी थी. बाद में 30 दिसंबर, 2025 काे जारी आदेश में अंतरिम आदेश जारी रखने का निर्देश दिया था.शीर्ष अदालत ने इस निर्देश पर राेक लगा दी. वकील सुगंधा आनंद के जरिये सुप्रीम काेर्ट में दायर अपनी याचिका में हिमाचल प्रदेश ने कहा कि प्रदेश के ‘रेरा’ कार्यालय काे शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने का फैसला शिमला शहर में भीड़ कम करने के लिए लिया गया था और यह पूरी तरह से प्रशासनिक वजहाें से लिया गया था.